कोलकाता रेड लाइट की सेक्स वर्कर्स ने दुर्गा प्रतिमा के लिए मिट्टी देने से किया इनकार...
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कोलकाता. कोलकाता के रेड लाइट एरियासोनागाछी के निवासियों ने दुर्गा पूजा के लिए अपने आंगन से मिट्टी दान करने का विरोध किया है। यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया है। बता दें कि पिछले तीन साल से दुर्गापूजा के लिए यहां से मिट्टी देने से इनकार किया जाता रहा है। दरअसल, मान्यता के अनुसार एक वेश्यालय के आंगन से लाई गई मिट्टी को दुर्गा पूजा के लिए शुभ माना जाता है।
माता दुर्गा की मूर्तियों को लेकर एक खास तरह की मान्यता है। इस मान्यता के अनुसार इन मूर्तियों को बनाने के लिए तवायफ के घर बाहर या रेडलाइट एरिया से मिट्टी लाई जाती है। सेक्स वर्कर्स असोसिएशन दरबार समोनॉय कमिटी के मेंटर और सलाहकार सुश्री भारती डे के अनुसार यह निर्णय समाज की मुख्यधारा में सेक्स वर्कर्स की अस्वीकृति के विरोध में किया गया है।
मूर्ति बनाने वाले कलाकारों का कहना है कि परंपरा के मुताबिक रेडलाइट एरिया की मिट्टी को जब तक मूर्ति में इस्तेमाल नहीं किया जाता तब तक वह पूर्ण नहीं मानी जाती। हालांकि पहले कारीगर या फिर मूर्ति बनवाने वाले सेक्स वर्कर्स के घरों से भिखारी बनकर मिट्टी मांग कर लाते थे, लेकिन बदलते समय के साथ ही इस मिट्टी को भी अब इसका कारोबार होने लगा है।पहले तो कारीगर या फिर मूर्ति बनवाने वाले सेक्स वर्कर्स के घरों से भिखारी बनकर मिट्टी मांग कर लाते थे, लेकिन अब इसका कारोबार होने लगा है।
सोनागाछी की मिट्टी के बिना नहीं बनती है मूर्ति
दुर्गा पूजा में सिर्फ बंगाल में ही वेश्यालयों के की मिट्टी का इस्तेमाल नहीं किया जाता बल्कि संपूर्ण देश में वेश्यालय की मिट्टी का इस्तेमाल किया जा सकता है जिसकी कीमत 300 से 500 रुपए बोरी होती है वेश्यालय की मिट्टी से बनी मां दुर्गा की प्रतिमा की कीमत 5 हजार से लेकर 15 हजार तक होती है।
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