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1996 में जशपुर के बच्छरांव में पत्थर लगाकर अपनी सत्ता की घोषणा की थी। यह पत्थर आज भी लगा है।
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- जशपुर के 3 गांव में लोगों ने लगाए खुद की सत्ता वाले पत्थर
- 18 अप्रैल को जशपुर को किया गया था नक्सलमुक्त घोषित, लोग कर रहे विरोध
रायपुर। आधी रात के करीब 11.40 बजे नारायणपुर थाने के टीआई के कमरे में बैठीं डीएम प्रियंका शुक्ला का फोन बजा। दूसरी ओर से बटुंगा एसडीएम हितेश कुमार बघेल की आवाज आई, मैडम! अब क्लियर है, हम आ रहे हैं। इसके बाद डीएम ने चैन की सांस ली। एसडीएम बघेल उन अधिकारियों में शामिल थे, जिन्हें ग्रामीणों ने शनिवार रात बंधक बना लिया था। उनके साथ ही बगीचा के एसडीओपी पदम सिंह तंवर, कुनकुरी की महिला एसडीओपी उमेझा खातून, थाना प्रभारी राजेश मढ़ई सहित 15 पुलिसकर्मी शामिल थे। हालांकि अधिकारियों ने बंधक बनाए जाने की बात से इनकार किया है। उनका कहना है कि सिर्फ ग्रामीणों से बात करने के लिए रुके थे। उनके कुछ लोगों ने शराब पी रखी थी, तो वो मानने को तैयार नहीं हो रहे थे।
- शाम करीब 6 बजे के करीब बटुंगा में ग्रामीणों ने अधिकारियों को घेर लिया। इसके बाद रात करीब 8.20 बजे सूचना पहुंची कि अधिकारी फंस गए हैं। मौक़े की नज़ाकत को देखते हुए डीएम प्रियंका शुक्ला और एसपी प्रशांत सिंह 6.30 बजे ही बटुंगा के नज़दीक ब्लॉक मुख्यालय बगीचा कैंप करने पहुंच गए।
-अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को बंधक बनाए जाने की खबर ने प्रशासन के साथ ही सरकार को भी हिलाकर रख दिया। मौके की जानकारी के लिए खुद डीजीपी एएन उपाध्याय आ गए। इसके बाद आधी रात को जब एसडीएम ने सब ठीक हाेने की सूचना दी तो प्रशासन और शासन ने राहत की सांस ली।
इसलिए भड़का विवाद
- छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में चल रहा पत्थलगड़ी आंदोलन उग्र हो गया है। यहां के बटुंगा, बच्छरांव और सिहारडांड गांव में लोगों ने खुद की सत्ता वाले पत्थर लगा दिए हैं। प्रशासन और बाहरी लोगों के आने पर रोक लगा दी है।
- ऐसे में भाजपा की ओर से सद्भावना यात्रा का आयोजन शनिवार को किया गया था। मामल तब बिगड़ गया जब एक महिला नेत्री ने मंच से एलान किया कि हम ये पत्थलगड़ी तोड़ेंगे। इसके बाद यात्रा में शामिल लोगों ने पत्थलगड़ी को तोड़ना शुरू कर दिया। इसके विरोध में ग्रामीण आ गए। विरोध तनाव और बहस के बाद बड़े हंगामे में बदल गया।
- इस दौरान नेता और सद्भावना यात्रा में शामिल लोग तो निकल गए, लेकिन चार अधिकारी और 15 पुलिसकर्मी फंस गए। शुरुआत में ग्रामीणों ने यह आग्रह कर रोक लिया कि, उनके पत्थलगढी को तोड़ा गया है वे तोड़ने वालो के खिलाफ कार्यवाही का आवेदन ले लें। इस बीच कुछ लोगों के स्वर आक्रोश में बदल गए कि जब पत्थलगड़ी तोड़ा गया, तो तोड़ने वालों को क्यों नहीं रोका गया।
जशपुर के नक्सलमुक्त घोषित होने का विरोध
- 10 दिन पहले 18 अप्रैल को ही जशपुर जिले को नक्सल मुक्त घोषित किया गया था। महज चार दिन के भीतर ही आदिवासियों ने जिले के तीन गांव बच्छरांव, सिहारडांड और बटुंगा में पत्थर गाड़कर सरकार के खिलाफ हुंकार भरी थी। तब से क्षेत्र में तनाव था।
- हालात का जायजा लेने एक दिन पहले ही भास्कर टीम वहां पहुंची थी और पाया कि बच्छरांव और आसपास के दर्जनभर गांवों में हालात ठीक नहीं है। लोगों के तेवर काफी उग्र हैं।
- बच्छरांव पहुंचते ही भास्कर टीम को दाउद कुजूर और मिलियन मिंज ने रोककर आने की वजह पूछी। फिर एक रजिस्टर में पूरा ब्योरा दर्ज किया। इस रजिस्टर में पहले चारों नाम भास्कर टीम के ही दर्ज हुए। यानी इससे पहले पत्थलगड़ी के बाद गांव में कोई बाहरी व्यक्ति नहीं पहुंचा था।
- लोगों ने बताया कि उनकी लड़ाई हक, रोजगार और शोषण के खिलाफ है। सबने कहा- सरकार से कोई लड़ाई नहीं है। पर जिसे यहां आना है, हमारी इजाजत से आए। जो भी फैसला होगा, ग्रामसभा ही सर्वोच्च रहेगी... सब वही तय करेगी, कोई और नहीं।
- लोगों ने बताया कि बच्छरांव में पत्थलगड़ी 22 अप्रैल को हुई, लेकिन यहां और आसपास के दर्जनभर गांवों में छह माह से सरकारी अमले के खिलाफ लोग लामबंद हो रहे हैं।
- तैयारी कौन करवा रहा है, इस पर लोग खामोश हैं। वो कहते हैं कि आसपास के आधा दर्जन से ज्यादा गांवों में भी जल्द पत्थलगड़ी होगी। इससे लगता यह कि यह आंदोलन सुनियोजित तरीके से चल रहा है।
लोगों के पास बुनियादी सुविधाएं नहीं: ग्रामीण
- पत्थलगड़ी मूवमेंट के बाद कुनकुरी के सामाजिक कार्यकर्ता जोसेफ तिग्गा का नाम उछला, इन गांवों के लोगों का कहना है कि उन्हें नहीं जानते। सब आपस में ही फैसला लेते हैं।
- गांव के लोगों का कहना है कि यहां के गांव बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। 2013 से रोजगार गारंटी का पैसा नहीं मिला। तालाब खुदाई और सड़क का काम बरसों से बंद है। गांव का बोर हर साल सूख जाता है। पीने का पानी नहीं है।
- 6 महीने पहले प्रशासन ने नया बोर करवाया। पर अब तक उसमें पंप नहीं लगा है।
- सिहारडांड और बटुंगा से नदी गुजरती है। बारिश में दोनों गांव चार महीने बाकी राज्य से कट जाते हैं। 10 साल से पुल मांग रहे हैं, अब तक योजना ही नहीं बनी।
- सिहारडांड के साथ कलिया में अब तक बिजली नहीं आई है। सौर उर्जा का सहारा है। हर घर में एक ही बल्ब जलता है, टीवी वगैरह भी नहीं है।
- यहां एक सीसी रोड बनती दिखी। लोगों ने बताया कि 18 साल से मांग रहे थे, अब काम शुरू हुआ है। पता नहीं, कितने साल चलेगा। पुलिस पर सबसे ज्यादा आरोप हैं।
सरकार को साजिश की बू, प्रशासन ने कहा- नक्सलवाद से कोई संबंध नहीं
- मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा, "अगर जशपुर में प्रजातांत्रिक या धार्मिक स्वरूप में कुछ हुआ है तो ठीक है। अगर गैरकानूनी ढंग से कुछ किया जा रहा है तो कार्रवाई की जाएगी। विकास कार्य संवैधानिक तरीके से ही होते हैं। विकास की राह में किसी को बांधा नहीं पहुंचानी चाहिए।"
- प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा, "भाजपा सरकार के फ्लॉफ विकास मॉडल की देन है पत्थलगड़ी। पत्थलगड़ी आदिवासियों के शोषण और दमन के खिलाफ जनआक्रोश है। मुख्यमंत्री को जानकारी होनी चाहिए यह मामला धार्मिक है या नहीं। अगर मगर नहीं करना चाहिए।"
- डीजी नक्सल ऑपरेशन डीएम अवस्थी ने कहा, "पत्थलगड़ी पूरी तरह राजनीतिक और लॉ एंड ऑर्डर से जुड़ा मामला है। झारखंड में यह पहले से चल रहा है। अब जशपुर और अंबिकापुर में भी शुरू हो गया है। नक्सलवाद से इसका कोई संबंध नहीं है। हमारी हर गतिविधि पर नजर है।"