मुख्यमंत्री रमन सिंह : पुलिस और प्रशासनिक अफसरों को नसीहत देते हुए कहा कि ” घटना बड़ी होने के पहले ही रोकनी चाहिये”....
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रायपुर 6 मई 2018। … जब तक अपराधी के मन में कानून का डर नहीं होगा…और न्याय पाने वाले के मन में संतुष्टि नहीं होगी, कि अधिकारी उनके साथ खड़े हैं, ज्यूडिसियल सिस्टम उनके साथ है…तब तक सरकार और कानून व्यवस्था की बेहतर स्थिति नहीं बनती है। … मुख्यमंत्री आज राज्य शासन के गृह और विधि विभाग द्वारा आयोजित न्यायिक अधिकारियों, जिला कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों, लोक अभियोजकों और विवेचना अधिकारियों की स्टेट लेवल कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान छत्तीसगढ़ में अपराध के तीन प्रकार गिनाये..पहला तो नक्सलवाद और नक्सलवाद की वजह से जुड़ी घटनाएं….दूसरा, आर्थिक विकास और औद्योगिकीकरण, जिसकी वजह से बाहर के लोगों का प्रवेश होता है, इनमें कुछ तत्व होते है जो अपराध का अंजाम देते है, जबकि तीसरा सामान्य तरीके के अपराध, जिसमें चिटफंड, मानव तस्करी, फिरौती और अन्य अपराध हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधि-विधायी व्यवस्था से जुड़े ऐसे कांफ्रेंस सिर्फ राज्य स्तर पर नहीं, बल्कि संभाग और जिला स्तर पर भी आयोजित होना चाहिये। चीफ जस्टिस ने भी आज ऐसे कांफ्रेंस को लेकर यहीं बातें रखी। मुख्यमंत्री रमन सिंह ने पुलिस और प्रशासनिक अफसरों को नसीहत देते हुए कहा कि ” घटना बड़ी होने के पहले ही रोकनी चाहिये”…। तात्कालिक घटना को किस तरह से आक्रोश बढ़ने के पहले नियंत्रित कर लिया जाये, अफसर अपनी बुद्धिमता का परिचय देकर उस पर कैसे काबू पायेे, उस पर चिंता करनी चाहिये।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में घटनाक्रम की विवेचना का भी जिक्र किया, उन्होंने कहा कि आज कल अपराध का अंदाज बदल गया है.. 1000 किलोमीटर दूर बैठा अपराधी अपराध कर रहा है..ऐसे में विवेचना में भी उच्च तकनीक का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने विवेचना करने वाले अफसरों को टिप्स देते हुए कहा कि विवेचना में ना सिर्फ साइंस बल्कि साइक्लॉजी का भी इस्तेमाल किया जाना चाहिये।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2000 में विधि-विधायी विभाग का बजट सिर्फ 16 करोड़ था, जिसे आज बढ़ाकर 641 करोड़ कर दिया गया है.. साथ ही पदों और नियुक्ति की प्रक्रिया भी जारी है।
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