रायपुर : शिक्षाकर्मियों के तेवर हुए तूफानी ! सरकार के लिए खतरे की घंटी.....
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रायपुर 6मई 2018। कहते तो यही हैं कि सब्र का फल मीठा होता है !! लेकिन कभी ऐसा भी होता है कि ज्यादा मीठा होने के इंतजार में फल का स्वाद बिगड़ भी जाता है…! कहीं यही हालत सरकार की भी शिक्षाकर्मियों के मुद्दे पर ना हो जाये। संविलियन के इंतजार की इंतहा इस कदर हो गयी है कि अब शिक्षाकर्मी सीधे तौर पर सरकार को चेताने लगे हैं। ऐसे में फिलहाल आसार तो यही बनते नजर आ रहे हैं कि लेटलतीफी कहीं शिक्षाकर्मियों का आक्रोश इस कदर ना भड़का दे कि सरकार को बड़ा नुकसान चुनाव में उठाना पड़ जाये।
हाईपावर कमेटी के साथ पिछले दिनों हुई बैठक के बाद शिक्षाकर्मी इतने आग बबूला हैं कि पूछिये मत। बैठक के बाद उधर नाराज शिक्षाकर्मी मोर्चा ने महापंचायत की हुंकार भरी…तो इधर शिक्षाकर्मियों ने भी सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ तीखे हमले शुरू कर दिये हैं। फेसबुक और व्हाट्सएप में शिक्षाकर्मियों की नाराजगी साफ छलक रही है।
शिक्षाकर्मियों की नाराजगी सिर्फ कमेटी की लेटलतीफी पर ही नहीं है, बल्कि वो नाराज बेवजह मध्यप्रदेश दौरे पर सब कमेटी को भेजे जाने और महासंघ को बेहद आसानी से मुख्यमंत्री को मिले वक्त को लेकर भी हैं। व्हाट्सएप और फेसबुक शिक्षाकर्मियों के तीखे हमले से पटे पड़े हैं। एक शिक्षाकर्मी ने बेहद ही गंभीर टिप्पणी के साथ लिखा है-
“यहां की सरकार इतनी भी सक्षम नहीं कि स्वयं निर्णय ले सके…पहले राजस्थान और अब एमपी अध्ययन करने जायेंगे”
हाईपावर कमेटी अगर आश्वासन देकर शिक्षाकर्मियों को मीटिंग से वापस करती, तो शायद शिक्षाकर्मियों की इतनी नाराजगी नहीं होती, जितनी छलक रही है, लेकिन मध्यप्रदेश भेजने का दांव फिलहाल तो कमेटी ही नहीं, सरकार के भी उलटा पड़ सकता है। नाराजगी तो इशारा कर रही है कि कहीं अगर सरकार ने आगे चलकर संविलियन का ऐलान कर भी दिया तो, सरकार को उसका लाभ मिलेगा या नहीं ये एक बड़ा सवाल है।
बड़ा सवाल तो है, कि आखिर मध्यप्रदेश क्यों ?..मध्यप्रदेश में तो ऐसा कुछ भी नहीं, जो छत्तीसगढ़ सरकार को बेहतर फैसले में मददगार साबित होगा, बावजूद ये दौरा हो रहा है, कई शिक्षाकर्मी सरकार के पक्षपात से भी नाराज हैं, लिहाजा शिक्षाकर्मियों के एक गुट महासंघ को मुख्यमंत्री से मिलने के लिए मिले वक्त पर भी सवाल उठाया गया है। एक शिक्षाकर्मी ने लिखा है…
"जब किसी प्रदेश के मुखिया नये संघ के तुरंत मिलने का समय दें और महासम्मेलन के लिए हां कर दें तो सोचो क्या होगा ?"
फिलहाल शिक्षाकर्मियों का तीखा हमला जारी है, ऐसे में 11 मई की महापंचायत पर सबकी नजर है। सरकार की भी और सरकारी मशीनरी भी शिक्षाकर्मियों के आक्रोश पर बेहद करीबी नजर रखे हुए हैं। ऐसे में 11 की हुंकार शिक्षाकर्मियों के आंदोलन की दशा तय करेगी, तो ये भी तय है कि वो हुंकार हाईपावर कमेटी की कार्यवाही को दिशा देगी।
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