क्राकाटोआ ज्वालामुखी फटने के बाद सुनामी (Tsunami in Indonesia ) शनिवार को स्थानीय समयानुसार रात 9:27 बजे दक्षिणी सुमात्रा और पश्चिमी जावा के पास समुद्र की ऊंची लहरें तटों को तोड़कर आगे बढ़ी थी....
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खास बातें
- शनिवार रात आई थी सुनामी
- सुनामी के बाद से राहत-बचाव कार्य जारी
- प्रशासन के अनुसार अभी भी हजार से ज्यादा लोग लापता
जकार्ता: इंडोनेशिया में शनिवार रात आई सुनामी (Tsunami in Indonesia ) में मरने वालों की संख्या 281 तक पहुंच गई है. स्थानीय प्रशासन के अनुसार 1000 से ज्यादा लोग लापता भी हुए हैं. प्रशासन फिलहाल लापता लोगों की तलाश के लिए विशेष अभियान चला रहा है. बता दें कि सुंडा जलडमरूमध्य में शनिवार रात ज्वालामुखी फटने के बाद आई सुनामी (Tsunami in Indonesia ) ने इंडोनेशिया में बड़ी तबाही मचाई है. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार क्राकाटोआ ज्वालामुखी फटने के बाद सुनामी (Tsunami in Indonesia ) शनिवार को स्थानीय समयानुसार रात 9:27 बजे दक्षिणी सुमात्रा और पश्चिमी जावा के पास समुद्र की ऊंची लहरें तटों को तोड़कर आगे बढ़ीं जिससे अनेक मकान नष्ट हो गए. लोगों को बचाने के लिए खोज और बचाव का काम तेज कर दिया गया है. इंडोनेशिया के मौसम विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी के वैज्ञानिकों ने कहा कि अनाक क्राकाटाओ ज्वालामुखी के फटने के बाद समुद्र के नीचे भूस्खलन सुनामी (Tsunami in Indonesia ) का कारण हो सकता है. उन्होंने लहरों के उफान का एक कारण पूर्णिमा के चंद्रमा को भी बताया है.
गौरतलब है कि यह कोई पहला मौका नहीं है जब इंडोनेशिया में सुनामी की वजह से बड़ी संख्या में लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा हो. कुछ महीने पहले ही इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप में जोरदार भूकंप और इससे पैदा हुई सुनामी की चपेट में आकर करीब 400 लोगों की मौत हो गई थी. इलाज के लिए बड़ी संख्या में अस्पताल आए घायलों से डॉक्टरों को जूझना पड़ रहा है. राहत और बचाव कर्मी भी प्रभावितों की सहायता में लगे हैं. राष्ट्रीय आपदा एजेंसी ने मृतकों की संख्या अब तक 384 बताई है. यह आंकड़ा पालू नाम के शहर में मारे गए लोगों का है. उन्होंने कहा कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है. करीब साढ़े तीन लाख की आबादी वाले शहर पालू में कल सुनामी की 1.5 मीटर (पांच फुट) ऊंची लहरें उठी थीं. कई लोगों के शव समुद्र तट पर नजर आए थे.
आपदा एजेंसी ने कहा कि शाम के समय सुनामी आने की वजह से समुद्र तट के किनारे जश्न की तैयारियों में जुटे सैकड़ों लोगों इसकी चपेट में आ गए थे. उनकी तलाश के लिए अभियान शुरू किया गया था लेकिन कई लोगों का कई दिन बाद भी पता नहीं चल सका था.

