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पटनाः बॉलीवुड की ऐश्वर्या राय के बाद अब राजनीति में भी एक ऐश्वर्या राय का उदय होने जा रहा है. संयोग ऐसा है कि दोनों ही एश्वर्या के ससुर अपनी-अपनी पिच के धुरंधर बल्लेबाज़ हैं. बॉलीवुड वाली ऐश्वर्या और उनके ससुर यानी सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के बारे में ज़्यादा कुछ बताने की ज़रूरत नहीं. ज़रूरत है तो राजनीति में उभर रही नई ऐश्वर्या राय के बारे में चर्चा करने की क्योंकि बिहार की राजनीति का कल इनका हो सकता है.
::/introtext::एश्वर्या के दादा दारोग प्रसाद राय 1970 में प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके जबकि पिताजी चंद्रिका राय भी प्रदेश में मंत्री रह चुके हैं. इसलिए राजनीति इनके खून में हैं. इन सबके बावजूद राजनीति की ऐश्वर्या ने सुर्खियां बटोरनी तब शुरु की जब एक समय के बिहार के फायरब्रांड नेता और पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव इनके ससुर बने. राजनीति की इस ऐश्वर्या की शादी पिछले 12 मई को ही लालू यादव के बड़े बेटे तेज़ प्रताप यादव से हुई है.
लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की शादी को अभी दो महीने भी नहीं हुए हैं और जिस तेज़ी से उनकी पत्नी ऐश्वर्या राय अखबारों में सुर्खियां बटोर रही हैं उससे एक बात तो साफ है कि लालू कुनबे में राबड़ी देवी के बाद एक बार फिर नारी शक्ति का उदय होने वाला है. पार्टी के स्थापना दिवस के लिये छपे बैनर और पोस्टरों में ऐश्वर्या को जिस तरह स्थान दिया गया है. उससे इस चर्चा ने ज़ोर पकड़ लिया है कि, जल्दी ही लालू परिवार के इस नए सदस्य की राजनीति में एंट्री होगी जो अपने पति तेजप्रताप के अधूरे सपने को सच करेगी.
लालू परिवार के ताने बाने पर नज़र डाले तो यह बात साफ हो जाती है कि अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव की तुलना में तेजप्रताप को शुरु से पार्टी में कम तवज्जो मिलती रही है. नीतीश कुमार के साथ गठबंधन के बाद जब जेडीयू-आरजेडी की सरकार बनी थी तब भी लालू यादव ने उपमुख्यमंत्री के तौर पर बड़े बेटे तेजप्रताप की जगह तेजस्वी को ही चुना था. तेजप्रताप के मन में शायद तब से ही एक टीस रह गई थी. इसलिए जब पिछले साल नीतीश के साथ लालू का नाता टूटा और सरकार गिरी तब तेज प्रताप अपनों पर ही काफी आग-बबूला हो गये थे.
करीबियों की माने तो तेजप्रताप इस कदर गुस्साए कि उन्होंने अपने डिप्टी सीएम रहे छोटे भाई तेजस्वी और मां राबड़ी देवी को ही कमरे में बंद कर दिया. उनका कहना था कि उम्र में वह बड़े रहे फिर भी उनके स्थान पर छोटे भाई को बड़ा पद दिया गया. और उस गलत फैसले का नतीजा रहा कि परिवार पूरी तरह से सत्ता से बाहर हो गया. हालांकि इस घटना से परिवार के लोगों ने इनकार किया लेकिन कुछ करीबियों ने तब इस बात की पुष्टि की थी.
लालू यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव का व्यक्तित्व अपने बड़े भाई तेज प्रताप की तुलना में ज़्यादा गंभीर और संतुलित रहा है. यही वजह रही कि पार्टी में उनका कद ऊंचा रहा और लोगों ने उन्हें नो-नानसेंस लिया. तेजप्रताप स्वभाव से इमोशनल हैं और कई बार ऐसी बातें भी कह जाते हैं जिसे आसानी से तोड़-मरोड़ कर लोग दोनो भाईयों के बीच दूरी बढ़ा देते हैं.
अब पिछले दिनो ही तेजप्रताप की वाल पर लिखा गया कि माता राबड़ी की सेहत को लेकर वो काफी प्रेशर में हैं और राजनीति से दूर होना चाह रहे हैं. बाद में उन्हें सफाई देनी पड़ी कि किसी ने उनका अकांउट हैक कर लिया था. वैसे यह भी सच है कि बिना आग के धुंआ नहीं निकलता. ऐसा हो सकता है कि बड़े होने के नाते लालू का उत्तराधिकारी बनने की ख्वाहिश तेजप्रताप की हो जो अब तक पूरी नहीं हो पायी है.
तो क्या अब राजनीति की ऐश्वर्या अपने पति तेजप्रताप की इस ख्वाहिश को पूरी करेंगी? लालू परिवार के करीबियों की माने तो बहू ऐश्वर्या का कद परिवार और बिना एंट्री लिये ही राजनीति में भी काफी बढ़ रहा है. ऐसा हो भी क्यों न? दिल्ली विश्वविद्यालय की ग्रेजुएट और एमिटी यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई करने वाली ऐश्वर्या अगर परिवार और सत्ता की राजनीति का भी मैनेजमेंट करने लगें तो भला लालू यादव को इसमें क्या आपत्ति हो सकती है?
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