अगर आप अनंत चतुर्दशी को भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन करने जा रहे है तो जान लें गणपति विसर्जन से जुड़ी खास बातें और नियम विधि.....
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रायपुर। गणेश चतुर्थी के दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश की प्रतिमाओं को लोग अपने घरों में हर्षोल्लास के साथ विराजमान करते हैं. 10 दिनों तक लगातर गणेशजी की पूजन-भक्ति करते हैं ताकि उनकी कृपा भक्तों पर बनीं रहे. 11 वें दिन अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान की प्रतिमा को विसर्जित किया जाता है. हर वर्ष अनंत चतुर्दशी का दिन गणपति के भक्तों के लिए बहुत ही खास होता हैं . अगर आप अनंत चतुर्दशी को भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन करने जा रहे है तो जान लें गणपति विसर्जन से जुड़ी खास बातें और नियम विधि.

विसर्जन करते समय इन बातों का रखें ध्यान
- प्रभु का विसर्जन करने से उनकी विधिवत पूजा-अर्चना करने के बाद भगवान को विशेष प्रसाद का भोग लगाएं और अब श्री गणेश का स्वस्तिवाचन करें.
- एक साफ चौकी लें और उसे गंगाजल या गौमूत्र से साफ करके उस पर स्वास्तिक बनाएं. अब उस पर अक्षत रख के साफ पीला, गुलाबी या लाल कपड़ा बिछाएं.
- चौकी के चारों ओर सुपारी रखें और कपड़े के ऊपर फूलों की पत्तियां भी डाल दें.
- अब श्री गणेश को उनके जयघोष के साथ स्थापना वाले स्थान से उठाएं और तैयार चौकी पर विराजित करें. पाटे पर विराजित करने के बाद उनके साथ फल, फूल, वस्त्र, दक्षिणा और 5 मोदक भी रख दें.
- नदी, तालाब या पोखर के किनारे विसर्जन से पूर्व कपूर की आरती करें और श्री गणेश से खुशी-खुशी विदाई की कामना करें और उनसे धन, सुख, शांति, समृद्धि के साथ मनचाहे आशीर्वाद मांग. 10 दिन जाने-अनजाने में हुई गलती के लिए क्षमा प्रार्थना भी कर लें.
विसर्जन का शुभ मुहूर्त-
अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश जी की प्रतिमाओं का विसर्जन कर दिया जाता है. यूं तो इस दिन कभी भी किसी भी समय गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन किया जा सकता है लेकिन पंडितों के अनुसार, इस बार सुबह 6 से 7 बजे और दोपहर 1:30 से 3 बजे तक का समय प्रतिमा विसर्जन के लिए ठीक नहीं है. इसके अलावा आप किसी भी समय विसर्जन कर सकते हैं.
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