चंचल सोनी जन्म से दिव्यांग नेशनल और इंटरनेशल मंचों पर अपने हुनर का जलवा बिखेर रही हैं.....
::/introtext::::fulltext::
रायपुर। कुरुद की रहने वाली चंचल सोनी के हौसले को देखकर अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं। जन्म से दिव्यांग की छाप के साथ जीवन में आगे बढ़ने वाली चंचल इन दिनों नेशनल और इंटरनेशल मंचों पर अपने हुनर का जलवा बिखेर रही हैं। कहा जाता है कि जिनके अंदर आत्मविश्वास होता है, दुनिया में इतिहास वही रचता है। इसका जीता जागता उदाहरण हैं चंचल। चंचल शासकीय माध्यमिक शाला डांडेसरा में छठवीं की छात्रा हैं। उनका दाहिना पैर मात्र घुटने तक है। घुटने के नीचे का हिस्सा जन्म से ही नहीं है। इसके बावजूद डांस के प्रति उनकी लगन देखकर लोग आश्चर्य में रह जाते हैं। ढाई वर्ष की उम्र से कर रही डांस चंचल ढाई वर्ष की उम्र से डांस कर रही हैं।
उनके घरवालों का कहना है कि जब वह छोटी थी तभी से मोबाइल, टीवी आदि में को देखकर डांस के लिए जिद करती थी। अब दस साल की हो गई हैं। इनकी सबसे बड़ी उपलब्धि नेशनल लेबल डांस एवं म्यूजिक चैम्पियनशिप में गोल्ड मेडल है। हाल ही में इसका सलेक्शन इंटरनेशनल चैम्पियनशिप में हुआ है।
घर वाले नहीं जाने देते थे बाहर तो यूट्यूब को बना लिया जरिया
चंचल ने यूट्यूब को ही डांस टीचर बना लिया। उनकी मां बताती हैं कि बाहर वालों के डर से इसे घर से बाहर नहीं जाने देते थे। लोग अक्सर इसकी दिव्यांगता का मजाक उड़ाया करते थे। लोगों के ताने और बातों को सुनकर कई बार यह रोना-धोना कर चुकी है। डांस सीखने के लिए इसने मोबाइल पर यूट्यूब का सहारा लिया। डांस वीडियोज देखकर डांस करती रही। ढाई साल की उम्र में पहली बार स्कूल के स्टेज पर डांस किया था। इसके टीचर काफी खुश हुए थे और प्रोत्साहित किया। वर्तमान में ट्रेनर दिपाली राजपूत के पास डांस सीखने जाती है।
मां को है भरोसा, इतिहास रचेगी बेट
चंचल की मां मंजू सोनी का कहना है कि हौसला बुलंद हो तो निगाहें एहतराम करती हैं, राही राह न बदले तो मंजिलें झुककर सलाम करती हैं। मेरी बेटी की मेहनत और लगन देखकर मुझे पूरा भरोसा है कि यह एक दिन इतिहास जरूर रचेगी। भगवान ने जब इसे एक ही पैर देकर धरती पर भेजा था, उस वक्त मेरी रातों की नींद गायब हो गई थी। भगवान ने एक पैर नहीं दिया तो क्या हुआ, हौसला जरूर दिया है।
::/fulltext::
