शारदीय नवरात्रि: विवाह संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए करें माँ कात्यायिनी की पूजा.....
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आज नवरात्रि का छठा दिन है और यह दिन माँ आदिशक्ति दुर्गा के छठे स्वरुप देवी कात्यायिनी को समर्पित है। महर्षि कत के गोत्र में उत्पन्न होने और महर्षि कात्यायन की पुत्री होने के कारण इन देवी का नाम कात्यायिनी है। कहते हैं महर्षि कात्यायन ने कठोर तपस्या करके माँ पार्वती को प्रसन्न किया था जिसके फलस्वरूप माता ने उन्हें वरदान दिया था कि वे पुत्री के रूप में उनके यहां जन्म लेंगी।

वैवाहिक जीवन में आती है माता की कृपा से खुशियां
अगर आपके वैवाहिक जीवन में समस्याएं आ रही हैं या फिर आप अविवाहित हैं और आपके विवाह में अड़चनें आ रही हैं तो माता कात्यायिनी की पूजा आपके लिए बहुत ही लाभकारी सिद्ध होगी। इन देवी के आशीर्वाद से आपका दांपत्य जीवन खुशियों से भर जाएगा साथ ही पति पत्नी के संबंध भी एक दूसरे के साथ मधुर बने रहेंगे।

माता का यह स्वरुप सोने के समान चमकीला है। इनकी चार भुजाएं हैं जिसमें ऊपरी बाएं हाथ में कमल का पुष्प सुशोभित है, दूसरे दाएं हाथ में अभय मुद्रा है, निचले बाएं हाथ में माता ने तलवार पकड़ा हुआ है और दूसरे निचले दाएं हाथ में वरदमुद्रा है जिससे माता अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
अपने इस रूप में माता ने पीले रंग का वस्त्र धारण किया हुआ है। देवी कात्यायिनी का वाहन सिंह है।

विवाह संबंधी बाधाओं को दूर करने वाली यह माता बृहस्पति ग्रह से जुड़ी हुई हैं। ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं। कहते हैं गोपियों ने श्री कृष्ण को प्राप्त करने के लिए इन्हीं देवी की उपासना की थी।
पूजन विधिगोधूली वेला का समय इनकी पूजा के लिए श्रेष्ठ होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार देवी कात्यायिनी की पूजा के लिए उत्तरपूर्व दिशा सबसे शुभ मानी जाती है। इन देवी को पीला रंग बहुत ही प्रिय है इसलिए इनकी पूजा में पीले रंग की वस्तुओं का प्रयोग करना चाहिए। सबसे पहले गंगाजल छिड़ककर शुद्धि कर लें। माता को पीले रंग का वस्त्र अर्पित करें। हल्दी और कुमकुम का टीका लगाएं। पीले पुष्प अर्पित करें, धुप और दीपक जलाएं। दीपक सरसों के तेल में जलाएं। अब हाथ में फूल और अक्षत लेकर माता का ध्यान करें।
प्रसाद के रूप में आप पीले फल या मिठाई चढ़ा सकते हैं। इसके अलावा आप गुड़ और चना या फिर बेसन के हलवे का भी भोग माता को लगा सकते हैं। पूजा समाप्त होने के बाद गुड़ और चना गाय को खिला दें।

चन्दन की माला से इस मंत्र का जाप 108 बार करें।
। चंद्र हासोज्ज वलकरा शार्दू लवर वाहना।
।। कात्यायनी शुभं दघा देवी दानव घातिनि ।।
माता की पूजा से होते है यह लाभ
देवी की पूजा से धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इनकी कृपा से मनुष्य भयमुक्त रहता है। इसके अलावा इनकी आराधना से विवाह से जुड़ी समस्याओं का निवारण हो जाता है और व्यक्ति का जीवन खुशाहल बन जाता है।
पीले वस्त्र पहनकर माता की पूजा करें और इन्हें हल्दी का उबटन अर्पित करें।
