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रायपुर.कंक्रीट के जंगल में जमीन के भीतर का पानी सूखता जा रहा है। बीत रही गर्मी ने एक बार फिर चेता दिया है कि बारिश का पानी नहीं बचाया तो अगली गर्मियों में इससे भी बुरे हालात होंगे। इसके बाद भी सरकारी तंत्र ने बारिश का पानी सहेजने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि राजधानी में बारिश का पानी बचाने के इंतजामों में ढेरों खामियां-कमियां हैं। इसके चलते ही हर साल हालात बिगड़ते हैं। अगर यह पानी बरबाद होने से बचा लें तो पूरे शहर की पांच साल की पानी की जरूरतें पूरी हो सकती हैं। दरअसल रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए सरकारी, गैर सरकारी और निजी स्तर पर जो थोड़ी-बहुत कोशिश की जाती है, लेकिन उसकी टाइमिंग में भी बड़ी खामी है। आमतौर पर सरकारी स्तर पर जून के अंत में या जुलाई की शुरुआत में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए अभियान चलाए जाते हैं। जबकि इसके लिए प्रयास मई से ही शुरू हो जाने चाहिए। बारिश के पानी को बचाने के लिए स्ट्रक्चर यानी तालाब-पोखर आदि भी काफी कम हैं। इसका सीधा असर ग्राउंड वाटर लेवल पर पड़ता है। यानी जितने ज्यादा स्ट्रक्चर होंगे, उतना ही ज्यादा भूजल स्तर बढ़ाया जा सकता है।
वैज्ञानिक बताते हैं कि राजधानी में रीचार्ज की मेथड भी सुधरना चाहिए। तालाबों के शहर रायपुर को एक बार फिर अपने तालाबों की ओर ध्यान देना होगा, क्योंकि ओपन स्पेस में बारिश के पानी को बचाने के लिए ये बेहतर होते हैं। मानसून की अतिरेक चाल यानी कभी बारिश, कभी कमजोर मानसून के चलते राजधानी में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है।
भूजल में चिंताजनक गिरावट
केंद्रीय भूजल बोर्ड छत्तीसगढ़ में भूजल की सालाना स्टडी करता है। इसके लिए पूरे प्रदेश में 1200 जगह मार्किंग की गई है। तय जगहों पर साल में चार बार यानी प्री और पोस्ट मानसून ग्राउंड वाटर लेवल के साथ पानी की क्वालिटी भी परखी जाती है। पूरे राज्य में 95 फीसदी जगहों पर पानी की क्वालिटी सही है। बोर्ड के मुताबिक राजधानी में लगातार गिरते भूजल स्तर को केवल मानसून का पानी बचाने की अच्छी तैयारी कर बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए शहर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के स्ट्रक्चर बढ़ाने की जरूरत है।
70 फीसदी बरसाती पानी यूं ही बह जाता है
केंद्रीय भूजल प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक प्रदीप कुमार नायक के मुताबिक किसी भी शहर में पूरी तरह डेवलप्ड एरिया में 70 फीसदी बरसाती पानी जमीन के अंदर नहीं जा पाता। इसके विपरीत ऐसे इलाके जहां जमीन होती है, वहां सीपेज 70 फीसदी तक हो जाता है। उनके मुताबिक रायपुर में जलस्रोतों को रिचार्ज करने का कोई वैज्ञानिक तरीका ही नहीं है। इस खामी को ठीक किए बिना पानी बचाने के तमाम प्रयास उपयोगी साबित नहीं होंगे।
ओपन स्पेस में रेन वाटर हार्वेस्टिंग का बने प्लान
राजधानी में कलेक्टोरेट समेत कई बड़े गार्डन और खाली जगहों पर भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की जरूरत बताते हैं। वक्त रहते ओपन स्पेस रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए एक बड़ी कार्ययोजना बनानी होगी। ऐसे सरकारी भवन जहां छत और मैदान दोनों में ही पर्याप्त जगह हो, वहां इसके इंतजाम किए जा सकते हैं। इसके अलावा सड़कों, हाईवे और ओवरब्रिज जैसे निर्माण में भी इसे अनिवार्य किया जाना चाहिए। दिल्ली में बने ग्रीन हाईवे से प्रेरणा लेकर यहां भी इसे अमल में लाया जा सकता है।
करोड़ों लीटर पानी बचा सकते हैं
वैज्ञानिकों के मुताबिक राजधानी में जिस तरह की भौगोलिक स्थिति है, उसमें केवल 15 मिनट की बारिश से तकरीबन 2 करोड़ लीटर पानी बचाया जा सकता है। इस लिहाज से देखें तो अगर शहर में बारिश के पानी को बचाने के पर्याप्त इंतजाम किए जाएं तो केवल एक सीजन में यहां तक कि कमजोर मानसून के हालात में भी 2 से 5 साल की जरूरतों के लिए पानी बचाया जा सकता है। इसके लिए लोगों में जागरूकता लानी होगी, ताकि सही समय पर इसके प्रयास हों।
निगम ने बनाया है नियम
नगर निगम के अधिकारी बताते हैं कि 2013 से सभी मकान बनाने की अनुमति के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सेटअप बनाना अनिवार्य किया गया है। इसके अंतर्गत 8 से 9 हजार रुपए से लेकर प्लॉट एरिया के मुताबिक धरोहर राशि जमा करवाई जाती है। मकान मालिक जब रेन वाटर हार्वेस्टिंग सर्टिफिकेट देता है, उसे ये राशि लौटा दी जाती है। निगम क्षेत्र में निजी और शासकीय हर तरह के भवनों के निर्माण के लिए यह शर्त पूरी करनी होती है। निगम के भवनों में भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सेटअप लगाए गए हैं।
विशेषज्ञों की राय
ओपन स्पेस में बर्बाद न हो पानी
हाइड्रोलॉजिस्ट के. पाणिग्रही ने बताया कि स्थानीय स्तर पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग से जुड़ी खामियों को दूर कर लिया जाए तो भविष्य में जल संकट का समाधान किया जा सकता है। मई से ही पूरे शहर को इसके लिए जुट जाना चाहिए। ओपन स्पेस में भी पानी बरबाद न हो, इसके लिए योजना बनानी होगी।
घरों में बने हैं सेटअप
नगर निवेशक बीआर अग्रवाल ने बताया कि नगर निगम की ओर से बारिश का पानी बचाने के लिए हर साल व्यापक प्रयास किए जाते हैं। लोग घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सेटअप बनवाएं, इसके लिए धरोहर राशि भी लेते हैं। मानसून से पहले रिचार्ज स्रोतों की साफ-सफाई करवाई जाती है।