Owner/Director : Anita Khare
Contact No. : 9009991052
Sampadak : Shashank Khare
Contact No. : 7987354738
Raipur C.G. 492007
City Office : In Front of Raj Talkies, Block B1, 2nd Floor, Bombey Market GE Road, Raipur C.G. 492001
——
ईरम आगा
पुरुषों से भरे एक ऑडिटोरियम में जब दो बुर्कानशीं महिलाएं पहुंचती हैं तो सबकी निगाहें उनकी तरफ मुड़ जाती हैं. वक्फ बोर्ड की मीटिंग में महिलाओं का शामिल होना आम घटना नहीं है. वक्फ के एक सदस्य कहते हैं कि इन दो महिलाओं पर उन्हें गर्व है. तमिलनाडु की रहने वाली अमातुल आतिफा (36) और फातिमा मुज्जफर पहली दो महिलाएं हैं जिन्हें वक्फ बोर्ड में विद्वान के तौर पर शामिल किया गया है. ये दोनों न सिर्फ स्टीरियोटाइप तोड़ रही हैं बल्कि उनकी नियुक्ति को लेकर रूढ़िवादियों में बड़ी बहस जारी है.
ओडिशा वक्फ बोर्ड के एक बुजुर्ग सदस्य गर्व के साथ कहते हैं, “तमिलनाडु ने यह करिश्मा कैसे कर दिखाया?” इस पर एक अन्य सदस्य कहते हैं, 'मेरी दुआ है कि दोनों इस काम में सफल हों और नई ऊंचाइयों को छुएं.' दोनों महिलाओं ने वक्फ बोर्ड में सुन्नी समुदाय के प्रमुख काज़ी मोहम्मद सलाउद्दीन अय्युब और शिया समुदाय के प्रमुख काज़ी गुलाम मेहदी खान की जगह ली है. इससे पहले यह जगह सिर्फ काज़ियों को दी जाती थी.
यह पहली बार नहीं है जब तमिलनाडु में महिलाएं वक्फ बोर्ड में शामिल हुई हैं. 2002 में बदर सयीद वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष रह चुकी हैं. इसके बाद के सालों में भी बोर्ड में महिला सदस्य शामिल रही हैं. हालांकि यह पहली बार है जब महिलाओं को बोर्ड में विद्वानों की श्रेणी में शामिल किया गया है.
इन महिलाओं का कहना है कि 30 अप्रैल को उनकी नियुक्ति को लेकर तमिलनाडु वक्फ बोर्ड को मिली जुली प्रतिक्रिया मिल रही है. आतिफा कहती हैं, “एक काज़ी ने मेरी विद्वता पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर मेरे काम को नकार दिया. पर चूंकि मैं एक टीवी नेटवर्क में प्रवचन कर चुकी हूं तो मुझे जनता से और शिया पर्सनल लॉ बोर्ड से काफी समर्थन मिला.”
वहीं दूसरी तरफ सुन्नी विद्वान और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की सदस्य मुज्जफर कहती हैं कि रूढ़िवादियों और काज़ियों के समर्थकों ने उन्हें काफी परेशान किया. वह कहती हैं, “उन्होंने मुझसे कहा कि मेरे पास थोड़ी नैतिकता होनी चाहिए और मुझे यह छोड़ देना चाहिए था.”
सभी समुदायों की महिलाओं के लिए बराबरी के अधिकार की वकालत करती हूई मुज्जफर कहती है, “कट्टरपंथी परंपराओं से बाहर निकलना महिलाओं के लिए हमेशा से मुश्किल रहा है. फिर चाहे पोप की बात हो या पुजारी की. हमारा संघर्ष एक जैसा है.”
ये दोनों मानती हैं कि उनकी नियुक्ति में वनियाम्बाडी विधायक और वक्फ बोर्ड मंत्री डॉक्टर निलोफर कफील की महत्वपूर्ण भूमिका रही. कई सुझावों पर गौर करने के बाद डॉक्टर कफील ने आतिफा और मुजफ्फर को स्कॉलर कैटिगरी में चुना.
नियम के मुताबिक बोर्ड में एक चेयरपर्सन होते हैं. हर इलेक्टोरल कॉलेज से एक या अधिकतम दो सदस्य जिन्हें राज्य सरकार इस पद के लिए उचित समझती है. राज्य की विधानसभा के मुस्लिम सदस्य, राज्य की बार काउंसिल के मुस्लिम सदस्य, वक्फ के वो मुतावल्ली जिनकी सालाना आय 1 लाख या उससे अधिक है.
प्रतिष्ठित मुस्लिम संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले एक या अधिकतम दो सदस्यों को राज्य सरकार चुनती है. इस्लामिक थियोलॉजी के स्कॉलर्स में से एक या अधिकतम दो लोगों को राज्य सरकार नामित कर सकती है. राज्य सरकार में डिप्टी सेक्रेटरी या उससे ऊपर की रैंक के एक अधिकारी.
सरकार और सेंट्रल वक्फ ट्रिब्यूनल के आदेश के मुताबिक बोर्ड में कम से कम दो सदस्य महिलाएं होनी चाहिए.
पद पर नियुक्ति से पहले अपने संघर्ष को याद करती हुई मुजफ्फर कहती हैं कि जब उन्हें चुना गया तो एक याचिका दायर कर सवाल उठाए गए कि कैसे एक औरत काज़ी की जगह ले सकती है? उन्होंने बताया, “मद्रास हाईकोर्ट ने यह साफ किया कि सरकार के प्रावधानों और सेंट्रल वक्फ ट्रिब्यूनल की मदद के आधार पर ही यह किया जा रहा है. ”
मुज्जफर कहती हैं कि वह पीछे हटने वालों में नहीं है. वह जस्टिस अहमद बशीर महिला कॉलेज में हुई एक घटना का जिक्र करती हुई कहती हैं कि वह वहां यूनियन हेड थीं और वहीं उन्होंने 20 सालों बाद कल्चरल प्रोग्राम दोबारा शुरू करवाए थे.
वह कहती हैं, “कॉलेज प्रबंधन को लगता था कि महिला कॉलेज में ये सारी चीजें नहीं होनी चाहिए लेकिन 1991 में मैंने यह करिश्मा कर दिखाया. यह अब भी जारी है.”
वहीं शिया स्कॉलर आतिफा ने कहा कि लोगों की स्वीकार्यता नहीं मिलना सबसे बड़ा चैलेंज है. उन्होंने कहा, “किसी को वक्फ बोर्ड से कोई फर्क नहीं पड़ता था लेकिन हमारे आने के बाद इसकी चर्चा होने लगी.”
दोनों महिलाएं एक ही कॉलेज से पढ़ी हैं और अब दोनों एक ही बोर्ड की सदस्य हैं. दोनों महिला सशक्तिकरण, महिलाओं के स्किल डेवलपमेंट, लोगों की भलाई के लिए वक्फ की संपत्ति का जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल पर फोकस करेंगी.
आतिफा ने कहा, 'हम शिया समुदाय की मदद करेंगे ताकि वे सरकार की सभी स्कीमों का फायदा उठा सकें. जानकारी की कमी की वजह से अब तक वे उसका फायदा नहीं उठा सके हैं.'