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शिक्षाकर्मियों के संविलियन को मंजूरी....
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::fulltext::मध्यप्रदेश: प्रदेश के शिक्षाकर्मियों को शिवराज सिंह चौहान सरकार ने मंगलवार को संविलियन की सौगात दी। संविलियन होने के बाद शिक्षकर्मी नियमित शिक्षक बन गए हैं। अब इन्हें नियमित शिक्षकों की तरह पेंशन, ग्रेच्युटी, बीमा, शासकीय आवास, अनुकंपा नियुक्ति जैसी सुविधा मिलेगी, साथ ही शिक्षाकर्मियों को सरकार के सातवें वेतनमान का भी लाभ मिलेगा। संविलियन की सौगात मिलने से शिक्षकर्मियों में खुशी की लहर है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में भी सन 1994—95 से शिक्षाकर्मी संघ लगातार संविलियन की मांग कर रही है। इसके लिए प्रदेश में कई बार हड़ताल भी किए जा चुके हैं, वहीं मध्यप्रदेश में शिक्षाकर्मियों को संविलियन की मंजूरी मिलने की खबर मिलते ही छत्तीसगढ़ शिक्षाकर्मी संघ ने भी सरकार को पत्र लिखकर सरकार से संविलियन की मांग की है। वर्तमान में शिक्षाकर्मी संघ प्रदेश के 90 विधानसभा क्षेत्रों में संकल्प शिविर लगाकर प्रदेश की जनता को सरकार के खिलाफ जागरूक करने का प्रयास कर रही है, इससे पहले उन्होंने सरकार से बैठक कर संविलियन के मामले को सुलझाने का प्रयास किया था। लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी थी।
बता दे कि मध्यप्रदेश के शिक्षाकर्मी बीते 22 साल से शिक्षा विभाग में संविलियन की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। इस साल जनवरी में अध्यापकों ने शिवराज सरकार के खिलाफ संविलियन की मांग को लेकर आर-पार की लड़ाई शुरू कर दी थी। 13 जनवरी को आजाद अध्यापक संघ की चार महिला अध्यापक और 100 से अधिक अध्यापकों ने जंबूरी मैदान सामूहिक मुंडन कराया था। इस आंदोलन के बाद से चुनावी वर्ष में शिवराज सरकार बेहद घबराई हुई थी। लिहाजा सरकार ने 21 जनवरी को अध्यापकों के साथ चर्चा करने का बाद संविलियन की घोषणा की थी, लेकिन जनवरी से लेकर मई के बीतने तक संविलियन आदेश जारी नहीं होने से अध्यापकों की नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही थी। इस नाराजगी को देखते हुए शिवराज कैबिनेट ने अध्यापकों की मांग को आखिरी मंजूरी दे ही दी।
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