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रायपुर. छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा में 20 प्रतिशत से कम अंक और 80 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वालों के पुनर्मूल्यांकन पर दो साल से लगी रोक का हटा दी है। शनिवार को माशिमं में हुई परीक्षाफल समिति की बैठक में परीक्षाफल समिति के सदस्य संजय जोशी के प्रस्ताव पर सभी सदस्यों ने मुहर लगाई। इस निर्णय से प्रदेश के दो लाख से अधिक दसवीं-बारहवीं के परीक्षार्थियों को राहत मिलेगी। इस मुद्दे को लेकर नईदुनिया ने लगातार खबर प्रकाशित की थी। इसमें बताया था कि किस तरह इस साल 80 फीसद से अधिक अंक पाने वाले विद्यार्थियों का पुनर्मूल्यांकन में लगी बंदिश के कारण टापर बनने का सपना टूट रहा है।
::/introtext::विशेषज्ञों का कहना था कि यदि बोर्ड 21 से 80 के मध्य वाले विद्यार्थियों को पुनर्मूल्यांकन की सुविधा देकर यह मानता है कि उनमें त्रुटि संभावित है फिर मानवीय त्रुटि तो सभी उत्तरपुस्तिकाओं में हो सकती है। इससे 20 प्रतिशत से कम अंक और 80 फीसद से अधिक अंक पाने वाले परीक्षार्थियों को भी उत्तरपुस्तिका को पुनः जांच कराने का अधिकार एवं न्याय अवश्य मिलना चाहिए।
80 फीसद से ऊपर वालों की दोबारा नहीं जांचेंगे कॉपी
माशिमं की परीक्षाफल समिति ने अब 80 प्रतिशत अंक पाने वाले दसवीं-बारहवीं के परीक्षार्थियों की कापी मुख्य परीक्षा में दो बार नहीं जांचने का फैसला लिया है। उनकी कापी एक बार ही जंचेगी और पुनर्मूल्यांकन का मौका दिया जाएगा। गौरतलब है कि 20 प्रतिशत से कम अंक और 80 फीसद से अधिक अंक पाने वाले परीक्षार्थियों के पुनर्मूल्यांकन पर रोक लगाने के बाद माशिमं ने 80 फीसद से अधिक अंक पाने वालों विद्यार्थियों की कापी मुख्य परीक्षा में दो बार जांचने का प्रावधान रखा था।
उत्तर-पुस्तिका फाड़ी, आठ बच्चों का परिणाम शून्य
इस बार आठ बच्चे ऐसे थे जिन्होंने दसवीं-बारहवीं की आंसर पुस्तिका के कुछ पन्ने फाड़ दिये थे। इन परीक्षार्थियों के परिणाम भी रोक दिये गये हैं। परीक्षाफल शून्य कर दिया गया है।
परीक्षाफल समिति में यह प्रस्ताव लाया गया था कि 20 प्रतिशत से कम अंक और 80 फीसद से अधिक अंक पाने वाले परीक्षार्थियों को भी पुनर्मूल्यांकन का अधिकार दिया जाये। इस पर निर्णय लिया गया है अब सभी को पात्रता होगी। - संजय जोशी, सदस्य, परीक्षाफल समिति ,माशिमं
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