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मां के दूध में मौजूद अनूठी संरचना छोटे बच्चों को भविष्य में होने वाली फूड अलर्जी से बचाती है। जबकि बाज़ार में मिलने वाले बेबी फूड ये फायदे नहीं देते हैं। बताया गया है कि मां के दूध में मौजूद अवचायक शर्करा, लैक्टोज़ और वसा के बाद तीसरा एक ऐसा ठोस घटक हैं जो शिशु को अलर्जी के ख़तरे से बचाने में कारगर है। हालांकि ये शिशुओं द्वारा पचाने योग्य नहीं होते हैं, लेकिन एक प्रीबायोटिक (एक अनौपचारिक खाद्य घटक जो आंतों में फायदेमंद सूक्ष्मजीवों के विकास को बढ़ावा देता है) के रूप में कार्य करते हैं। जो शिशुओ में अलर्जी रोग का एक प्रमुख प्रभावक माना जाता है।
खास बात ये है कि मां के दूध में एचएमओ की संरचना परिवर्तनीय है। ये स्तनपान का चरण, गर्भावस्था की उम्र, मां का स्वास्थ्य, जातीयता, भौगोलिक स्थान जैसे कारकों से निर्धारित होती है।वही एक साल के शिशु की त्वचा के छिद्र परीक्षणों से पता चला है कि स्तनपान करने वाले शिशुओं ने खाद्य एलर्जी को लेकर कोई संवेदनशीलता प्रदर्शित नहीं की है।
स्तनपान से कई बीमारियों का जोखिम होता है कम
पिछले अध्ययनों से ये भी पता चला है कि स्तनपान कराने वाले शिशुओं को कई तरह की चिकित्सीय स्थितियों, जैसे कि घरघराहट, संक्रमण, अस्थमा और मोटापे का जोखिम कम होता है। ये अध्ययन टीम ने 421 शिशुओं और माताओं से लिए दूध के नमूनों पर किया जिसके बाद ये शोध सामने आया।
वही ये बात भी सामने आई है कि शिशुओ में होने वाली एलर्जी ज़रूरी नहीं कि आगे भी हो लेकिन ये भविष्य के लिए एक चेतावनी भी है।
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