Owner/Director : Anita Khare
Contact No. : 9009991052
Sampadak : Shashank Khare
Contact No. : 7987354738
Raipur C.G. 492007
City Office : In Front of Raj Talkies, Block B1, 2nd Floor, Bombey Market GE Road, Raipur C.G. 492001
——
रायपुर.अंबेडकर अस्पताल में पीलिया व मौसमी बीमारी के मरीजाें की संख्या बढ़ने से मेडिसिन वार्ड में मरीजाें का इलाज जमीन पर बेड लगाकर किया जा रहा है। दूसरी ओर कई वार्डों के बेड खाली पड़े हैं। मेडिसिन विभाग के चार वार्डों में 120 बेड हैं, लेकिन यहां 200 से ज्यादा मरीजों का इलाज किया जा रहा है। दूसरे वार्डों में मरीजों को आसानी से बेड मिल रहा है।
अंबेडकर अस्पताल में मौसमी बीमारियों के मरीज बढ़ने के बाद अव्यवस्था का माहौल है। मेडिसिन के मेल व फिमेल वार्ड में मरीजों को हर मौसम में जमीन पर इलाज कराना पड़ रहा है। चार वार्ड भी मरीजों के लिए कम पड़ रहे हैं। वर्तमान में राजधानी में पीलिया फैला है। इसके कारण मरीजों की संख्या बढ़ गई है। पीलिया के मरीजों को भी फ्लोर बेड पर रखा गया है। इसके कारण मरीज व स्टाफ के बीच विवाद भी हो रहा है। पीलिया के अलावा वायरल फीवर, सर्दी व खांसी के मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
ऐसे में चार वार्डों में 120 बेड भी कम पड़ रहे हैं। वार्ड में ही फ्लोर बेड लगाया गया है। यह भी कम पड़ रहा है तो गैलरी में बेड लगाया गया है। भाठागांव के लक्ष्मी प्रसाद को पीलिया है। उसे ओपीडी में इलाज के बाद भर्ती करने के लिए वार्ड आठ भेजा गया। वहां एक भी बेड खाली नहीं था। उसे गैलरी का बेड दिया गया, जहां पंखा भी नहीं था। लक्ष्मी ने कहा कि वह इस बेड पर कैसे इलाज कराएगा? डाॅक्टर ने कहा कि ऐसे ही इलाज कराना पड़ेगा। यह समस्या दूसरे मरीजों के साथ भी है।
ज्यादातर इन वार्डों में बेड खाली
ईएनटी, जनरल सर्जरी, पीडियाट्रिक्स, ऑर्थोपीडिक्स, प्लास्टिक सर्जरी, पीडियाट्रिक सर्जरी।
200 के लिए पर्याप्त
चिकित्सा शिक्षा विभाग इस साल मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 150 सीटों को 200 करने का प्रस्ताव एमसीआई को भेज सकता है। 200 सीटों के हिसाब से बेड की संख्या कम नहीं पड़ेगी।
नई बिल्डिंग में कैंसर विभाग, दो वार्ड खाली
लिनियर एक्सीलरेटर मशीन से लगे 6 अतिरिक्त वार्ड का निर्माण किया गया है। वर्तमान में तीन मंजिला इस बिल्डिंग में कैंसर विभाग शिफ्ट हो गया है। वार्ड के साथ एचओडी कक्ष भी इसी बिल्डिंग में आ गया है। कैंसर के दो वार्ड खाली हो गए हैं। फिलहाल यह खाली है। इसे नेत्र विभाग के मरीजों को रखा जा रहा है। 60 बेड का डीपी (डिसएबल पेशेंट) वार्ड बनाया गया है। इसके बेड अक्सर खाली पड़े रहते हैं। हड्डी रोग विभाग के मरीज यहां जरूरत के हिसाब से भर्ती किया जाता है। इस वार्ड का निर्माण इसलिए किया गया था, ताकि बाहर भटकने व घूमने वाले मरीजों को भर्ती किया जा सके। देखने में आ रहा है कि भटकने व घूमने वाले मरीजों की हालत जस का तस है। वे अभी भी बाहर ही पड़े रहते हैं। डिसएबल मरीजों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
लामा बना हथियार
अंबेडकर में मरीजों की ज्यादा भीड़ होने के बाद जूडो लामा यानी लेफ्ट अगेनेस्ट मेडिकल एडवाइज के तहत मरीजों को भगा देते हैं। कोई मरीज जब बेड नहीं मिलने की शिकायत करता है तो यह तरीका अपनाया जाता है। लामा में ये कह दिया जाता है कि मरीज अपनी मर्जी से अस्पताल से छुट्टी करवाकर चला गया। लिखित में मरीज व उनके परिजन का हस्ताक्षर लिया जाता है। कई बार गंभीर केस में भी यही तरीका अपनाया जाता है। इसे लेकर कई बार विवाद भी हो चुका है।
प्रमुख सचिव ने भी लगाया था बैन
चार साल पहले स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने अस्पताल के किसी भी विभाग में फ्लोर बेड लगाने पर बैन लगा दिया था। उनके इस आदेश का पालन कुछ दिनों तक ही हुआ। जब मरीजों की संख्या बढ़ गई तो फिर से फ्लोर बेड लगाए जाने लगे। फिलहाल ऐसा कोई समय नहीं होता है जब मेडिसिन विभाग में फ्लोर बेड न लगाए जा रहे हो। अस्पताल का सबसे बड़ा विभाग व ज्यादा बीमारी कवर होने के कारण मेडिसिन विभाग में हमेशा मरीजों की भीड़ रहती है। जिला अस्पताल में वार्ड खाली रहते हैं। वहां मरीजों को खास सुविधा नहीं दी जाती, इसलिए वे अंबेडकर अस्पताल में आ जाते हैं।