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प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के अंदर कई तरह के बदलाव आते हैं। प्रेग्नेंसी के समय हर्मोन्स चेंज होने के कारण महिलाओं में अलग-अलग तरह की फूड क्रेविंग्स भी होती है। कई महिलाओं को मीठा खाने का मन होता है, तो कुछ महिलाओं को बहुत तीखा खाने का मन करता है। लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ भी खाने से पहले महिलाओं को अपने हेल्थ का बहुत ध्यान रखना पड़ता है। प्रेग्नेंसी के दौरान आपकी डाइट गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास पर असर डालती है। अक्सर गर्भवती महिलाएं गन्ने के जूस को पीने को लेकर कंफ्यूज रहती हैं। डॉक्टर्स के मुताबिक प्रेग्नेंसी में गन्ने का गूस आपके हेल्थ के लिए फायदेमंद होता है। मीठे को लेकर आपकी क्रेविंग को खत्म करने के साथ आपके हेल्थ का भी ध्यान रखता है। गन्ने में विटामिंस, सॉल्युबल फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम और फाइटोन्यूट्रिएंट्स के गुणों से भरपूर होता है। प्रेग्नेंसी में गन्ने का जूस पीने के क्या फायदे हैं, आइए जानते हैं...
1. एनर्जी बूस्टर
प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में एनर्जी काफी कम हो जाती है। ऐसे में गन्ने का जूस आपके लिए बेस्ट एनर्जी बूस्टर का काम करता है। प्रेग्नेंट महिलाओं को हाइड्रेट करने में भी गन्ने का जूस काफी फायदेमंद है। अगर आपको लो फिल हो रह हो, तो आप बस एक गिलास ताजे गन्ने का जूस पीकर खुद को बूस्ट कर सकती हैं।
2. इम्यून सिस्टम को बनाए स्ट्रॉन्ग
एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर गन्ने का जूस प्रेग्नेंसी में सर्दी, इन्फेक्शन और फ्लू जैसी समस्याओं से आपको बचाकर रखता है। गन्ने का जूस प्रेग्नेंट महिलाओं के लिवर को स्ट्रॉन्ग बनाने में मदद करता है।
प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में कब्ज की समस्या काफी ज्यादा बढ़ जाती है। इस दौरान अधिकतर महिलाएं कॉन्स्टिपेशन और इनडाइजेशन की समस्या से परेशान रहती है। गन्ने का जूस पीने से महिलाओं को कब्ज से राहत मिलती है। प्रेग्नेंसी के समय पेट में होने वाले इंफेक्शन को भी दूर करने में गन्ने का रास काफी कारगर साबित हुआ है। गन्ने का जूस आपके पेट की समस्याओं को दूर कर उसे सही रखने में मदद करता है।
1. डायबिटीज पेशेंट के लिए हानिकारक
डायबिटीज पेशेंट के लिए गन्ने का रस काफी हानिकारक होता है। ऐसे में जो महिलाएं डायबिटीज की समस्या से जूझ रही हो, उन्हें गन्ने का रस पीने से पहले अपने डॉक्टर से एक बार सलाह जरूर लेनी चाहिए। लेकिन अगर हो सकें, तो गन्ने के रस का सेवन करने से बचना चाहिए।
2. ओवर लिमिट से बचें
प्रेग्नेंसी में गन्ने का जूस पीना सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। लेकिन अगर आप अधिक मात्रा में इसका सेवन करते हैं, तो ये आपके हेल्थ के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए प्रेग्नेंसी में आप गन्ने के रस का सेवन एक लिमिट में करने की कोशिश करें।
मेनोपॉज किसी महिला का वो समय होता है जब उसे एक उम्र के बाद मासिक धर्म नहीं आता है। महिलाओं को 50 साल की आसपास की उम्र में मासिक धर्म आना बंद हो जाता है। कुछ महिलाओं को मेनोपॉज होने के बाद भी ब्लीडिंग होने लगती है। इस कंडीशन को पोस्टमेनोपॉज़ल ब्लीडिंग कहा जाता है। इस स्थिति के कई कारण हो सकते हैं। साथ ही पोस्टमेनोपॉज़ल ब्लीडिंग की वजह से महिलाओं को कई तरह की बीमारियां भी घेरने लगती हैं, जिसमें एंडोमेट्रियल कैंसर भी शामिल है।


पोस्टमेनोपॉज़ल रक्तस्राव 55 से अधिक महिलाओं में से लगभग 10% में होता है।

स्मार्टफोन आपके लाइफ का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। इसके फायदे भी हैं और नुकसान भी काफी हैं। स्मार्टफोन से कई नई तरह तरह की बीमारियां भी पैदा हो रही हैं, विशेष रूप से मेंटल हेल्थ को लेकर। स्मार्टफोन ने एक तरफ दूनियों को कम किया हैं वहीं दूसरी तरफ करीबी लोगों में दूरियां बढ़ा दी हैं। चीनी स्मार्टफोन निर्माता वीवो के एक नए स्टडी से पता चलता है 88 फीसदी मैरिड इंडियन कपल्स को लगता है कि स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग उनके रिश्ते को खराब कर रहा है।

88 फीसदी यूजर्स अपने खाली समय को अपने स्मार्टफोन पर बिताते हैं। 89 प्रतिशत को खाली समय मिलते ही उनको मोबाइल यूज करने की इच्छा होती है।

स्मार्टफोन की लत आपस की बातचीत में बन रही रुकावट
महिलाओं में बढ़ रहे सर्वाइकल कैंसर की समस्या की रोकथाम के लिए भारत सरकार काफी सक्रिय हो गई है। 9 से 14 उम्र की लड़कियों के लिए सरकार उनके स्कूलों में ही सर्वाइकल कैंसर को रोकने के लिए वैक्सीन उपलब्ध कराएगी। वैक्सीनेशन के लिए यह निर्णय राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह की सिफारिश पर लिया गया है। जिसमें सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम में ह्यूमन पैपिलोमावायरस वैक्सीन को शामिल करने की सलाह दी गई थी।
केंद्रीय शिक्षा सचिव संजय कुमार और केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से स्कूलों में HPV वैक्सीनेशन सेंटर्स के आयोजन के लिए दिशा निर्देश जारी करने की अपील की है। साथ ही सभी सरकारी और निजी स्कूल में वैक्सीनेशन गतिविधियों के समन्वय के लिए एक नोडल व्यक्ति की पहचान करने के भी निर्देश दिए है। शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक स्कूल न जाने वाली लड़कियों के वैक्सीनेशन के लिए मोबाइल टीमें उन तक पहुंचेंगी।
भारत में सर्वाइकल कैंसर का फैलाव
विश्व स्तर पर सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में सबसे ज्यादा पाए जाने वाला चौथा आम कैंसर है। भारत में ये कैंसर महिलाओं में दूसरे स्थान पर है। भारत वैश्विक सर्वाइकल कैंसर में अपना योगदान देने वाला सबसे बड़ा हिस्सेदार है।
सर्वाइकल कैंसर का इलाज
समय रहते सर्वाइकल कैंसर का पता चलने पर इसका इलाज संभव है। ज्यादातर सर्वाइकल कैंसर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस से जुड़ा होता है। HPV वैक्सीन के जरिए सर्वाइकल कैंसर को रोका जा सकता है। लेकिन ये तभी संभव है जब कैंसर होने से पहले ही महिलाओं को ये वैक्सीन दे दी जाए।
सर्वाइकल कैंसर के शुरुआत में कोई लक्षण या संकेत नहीं होते हैं, लेकिन बीमारी बढ़ने के साथ इन समस्याओं का आप सामना कर सकते हैं-
- संभोग के दौरान या बाद में योनि से खून निकलना
- पीरियड्स के बीच असामान्य ब्लीडिंग
- कोख में दर्द होना