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पीरियड्स हर उम्र की लड़की और महिलाओं के लिए काफी मुश्किल होता है। खासकर पेट में होने वाली ऐंठन और प्राइवेट पार्ट्स में बैक्टीरिया के कारण होने वाले संक्रमण से गंभीर स्वास्थ्य संबंधित बीमारियां हो सकता हैं। इतने ही नहीं इस समय रेसिज जैसी समस्या भी हो सकती है। पीरियड्स में जब सफाई की बात आती है तो प्राइवेट पार्ट्स की सफाई बनाए रखना बहुत ज्यादा जरूरी हो जाता है। क्योंकि वे शरीर की प्राकृतिक कार्यप्रणाली को नियंत्रित करने में मदद करता है। ये सभी समस्याएं पीरियड्स में स्वच्छता और जरूरी चीजों के महत्व की ओर इशारा करते हैं, जिन्हें हर महिला को अपनी लाइफस्टाइल में जरूर शामिल करना चाहिए।
1. डिस्पोजेबल टॉयलेट सीट कवर
पीरियड के दौरान UTI जैसे संक्रमण की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे में आप डिस्पोजल टॉयलेट सीट कवरिंग का उपयोग खुद की सुरक्षा के लिए जरूर करें। ये कवर वाटरप्रूफ होता है जो टॉयलेट सीट की सतह पर संक्रमण फैलने की संभावना को खत्म करता हैं, साथ ही सीट पर खून के धब्बे को भी लगने से बचाता है।
पीरियड्स के दौरान अक्सर प्राइवेट पार्ट में पसीना और नमी होने की समस्या हो जाती है। वैसे तो ये समस्या आम है लेकिन अपने प्राइवेट पार्ट में इंफेक्शन होना या किसी तरह के इंफेक्शन से बचने के लिए ड्राई रखने की जरूरत होती है। ऐसे में आप अपने साथ वेट वाइप्स का उपयोग कर सकते हैं। ये पीरियड्स के दौरान आपको नमी और पसीने को पोंछने में मदद करेगा।
पीरियड के दौरान आपको इंफेक्शन होने का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसे में आपको अपनी ज्यादा केयर करने की जरूरत होती है। लेकिन ऑफिय में या किसी पब्लिक प्लेस में खुद को सुरक्षित रख पाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। पब्लिक टॉयलेट यूज करने से आपको यूरीन इंफेक्शन, प्राइवेट पार्ट में रैसेजी जैसी समस्या बढ़ सकती है। इसलिए पब्लिक टॉयलेट यूज करने से पहले आप टॉयलेट सीट पर सैनिटाइजर जरूर स्प्रे कर लें। आपको टॉयलेट सीट सेनिटाइजर आसानी से मिल जाएगा।
4. पैड
पैंट्री लाइनर यानि पैड पीरियड्स में महिलाओं के लिए एक एक सुरक्षा कवच के रूप में काम करता है। पीरियड फ्लो में आपके कपड़ों पर लगने वाले दाग-धब्बों से आपको बचाने में पैड काफी मददगार होते है। आप इसे अपने ऑफिस बैग में रखकर जरूर कैरी करें। खासकर वर्किंग वुमन या फिर कॉलेज गर्ल। पीरियड एक ऐसी चीज है जो कभी-कभी समय से पहले भी आ जाती है। ऐसे में एमरजेंसी के लिए आप अपने साथ एक पैड जरूर कैरी करके रखें। और समय-समय पर अपने पैड को बदलते रहे।
( डिस्क्लेमर : इस लेख में दी गई सभी जानकारी और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं। इन चीजों पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। )
बच्चों को घर के हेल्दी खाने से ज्यादा बाहर का जंक फूड खाना ज्यादा पसंद होता है। जिस कारण आज के समय में बच्चों की इम्यूनिटी काफी कमजोर हो जाती है जो बच्चों में संक्रमण का कारण बन सकता है। बाहर का खाना बच्चो के हेल्थ के लिए अच्छा नहीं होता है। इस कारण भी बच्चों को पेट में दर्द की समस्या होती है। बच्चे बहुत ज्यादा नादान भी होते हैं। ऐसे में वो बाहर से खेलकर आने के बाद बिना हाथ साफ किए ही खाना खाने लगते हैं। इस वजह से भी बच्चों के पेट में इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। ये इंफेक्शन बच्चों में पेट दर्द के साथ उल्टी, दस्त और बुखार की समस्या भी साथ लाता है। आइए जानते हैं बच्चों को पेट के इंफेक्शन से कैसे बचाया जा सकता है।
* बच्चों का जी मिचलाना लगता है, उन्हे कुछ भी खाने का मन नहीं होता है।
बार-बार उल्टी होना और कुछ भी अच्छा नहीं लगना।
* बुखार आ जाना।
* पेट के साथ हाथ और पैरों में भी बहुत ज्यादा दर्द होना।
पेट में इंफेक्शन होने पर घरेलु इलाज
बच्चे को पेट में इंफेक्शन का इलाज एंटी वायरल दवाओं की मदद से किया जाता है। इसके साथ ही आपको कई अन्य बातों पर भी काफी ध्यान देने की जरूरत होती है। ऐसे में आइए जानते हैं बच्चों के पेट में इंफेक्शन को कम करने के लिए आप किन घरेलू उपायों को अपना सकते हैं।
पेट का इंफेक्शन होने के कारण बच्चों को उल्टी, दस्त जैसी समस्या होने लगती हैं, जो बच्चों में डिहाइड्रेशन की परेशानी को बढ़ा सकता है। इसलिए आप बच्चों को तरह पदार्थ जरूर दें। उनकी डाइट में जूस, सूप और उचित मात्रा में पानी को जरूर शामिल करें।
2. हल्का आहार
पेट इंफेक्शन के समय बच्चों के खान-पान का बहुत ज्यादा ख्याल रखने की जरूरत होती है। ऐसे में आप उनकी डाइट में मूंग दाल की खिचड़ी, दलिया या हल्का भोजन ही शामिल करें।
3. जंक फूड से रखें दूर
स्टमक इंफेक्शन होने पर बच्चों को कुछ भी बाहर का खाने पीने से रोकें। बाहर का फूड उनके हेल्थ के लिए अच्छा नहीं है। खासकर इंफेक्शन होने पर उनके पेट दर्द को बढ़ा सकता है।
आज के समय में लोग शादी से पहले ही फैमिली प्लानिंग कर लेते हैं। जिसमें शादी के कुछ सालों बाद ही बच्चा करने पर विचार किया जाता है। ऐसे में महिलाएं कई बार असुरक्षित तरह से संबंध बनाने के कारण प्रेग्नेंट हो जाती है। जिससे बचने के लिए गर्भ गिराने के कई उपाय अपनाती है। लेकिन इससे भी फायदा नहीं मिलने पर महिलाएं अपना अबॉर्शन करवाती है जो डॉक्टरों की देखरेख में ही किया जाता है। लेकिन प्रेग्नेंसी के 7वें हफ्ते महिलाएं बिना अबॉर्शन करवाएं भी अपना गर्भ गिरा सकती है।
4. अबॉर्शन की दवाई लेने से पहले और बाद में स्कैन करना अनिवार्य है, जो केवल स्त्री रोग विशेषज्ञ ही कर सकती हैं।
5. इससे आपको किसी तरह के कॉम्प्लिकेशन से बचने में मदद मिलेगी।
गर्भ गिराने के लिए महिलाएं जो अबॉर्शन पिल्स खाती हैं उसके कारण उन्हें पेट में दर्द और ऐंठन होने लगती है। महिलाओं को इस दौरान होने वाला दर्द और ऐंठन पीरियड पैन से भी ज्यादा तेज हो सकता है।
अबॉर्शन पिल्स आपके शरीर में बन रहे प्रेग्नेंसी हॉर्मोन प्रोजेस्टेरॉन के उत्पादन को बंद कर देती हैं। जिसके कारण भ्रूण आपके गर्भाशय से बाहर आने लगता है, जिस कारण महिलाओं को ज्यादा ब्लीडिंग होने लगती है। इस ब्लीडिंग की प्रक्रिया कुछ दिनों, हफ्तों से लेकर एक महीने तक भी हो सकती है।
गोली लेने के बाद अक्सर महिलाओं को चक्कर आने लगता हैं। चक्कर आने के साथ महिलाओं को सिरदर्द की भी शिकायत हो सकती है। कभी-कभी सिरदर्द इतना बढ़ जाता है कि महिलाओं को बुखार और शरीर दर्द भी होने लगता है।
अबॉर्शन पिल्स लेने के बाद भी कई बार पूरी तरह गर्भ नहीं गिरता है। अबॉर्शन पिल्स का ये सबसे बड़ा साइड इफेक्ट है। ऐसे मे अगर आपके अंदर ही भ्रूण के टुकड़े रह गए तो यह वायरस और किसी बड़ी बीमारी का कारण भी बन सकता है। इसलिए अबॉर्शन पिल्स लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
महिलाएं अपनी प्रेग्नेंसी के दौरान माता-पिता बनने के बारे में सोच कर काफी खुश रहती है। लेकिन अचानक ही काफी लॉ फील करने लगती हैं। उन्हें कुछ भी अच्छा नहीं लगता है। प्रेग्नेंसी के दौरान ये बातें काफी आम होती हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक हार्मोनल बदलाव, सही से नींद न आना, पहले के डिप्रेशन केस जैसे कई कारक प्रेग्नेंसी में आपके मेंटल हेल्थ को अफेक्ट कर सकते हैं। प्रेग्नेंसी के 9 महीने हर महिला के लिए जीतने खास होते हैं, उतना ही तनावपूर्ण भी रहते है। लेकिन प्रेग्नेंसी के समय महिला को अपने मेंटल हेल्थ का ध्यान रखने की बहुत जरुरत होती है। प्रेग्नेंट महिला के मेंटल हेल्थ का सीधा असर उनके गर्भ में पल रहे बच्चे के स्वास्थ्य पर पड़ता है। लेकिन अगर महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान गंभीर मेंटल हेल्थ का सामना कर रही है तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। लेकिन अगर आप मूड स्विंग या कम तनाव महसूस कर रही हैं तो इन टिप्स को फॉलो कर अपने मेंटल हेल्थ को बेहतर रख सकती हैं।
प्रेग्नेंसी के दौरान तनाव को कम करने के लिए महिलाएं पॉजिटिव सेल्फ टॉक करने की कोशिश करें। अक्सर प्रेग्नेंसी में महिलाएं मोटी हो जाती है, हार्मोनल बदलाव के कारण चेहरे पर पिंपल निकलने लगते हैं जो आपकी खूबसूरती को थोड़ा कम कर देता है। अपनी प्रेग्नेंसी को वो कैसे हेंडल करेंगी इस बात को लेकर भी अक्सर वो तनाव में रहती हैं। ऐसे में महिलाएं अपने दिन की शुरुआत खुद का सेल्फ कॉन्फिडेंश बढ़ाकर करें। आप खुद से कहें की "मैं स्ट्रॉन्ग हूं", 'मैं खूबसूरत हूं"। इस तरह की बातें खुद से करने पर आपका कॉन्फिडेंश बढ़ेगा और आप तनाव मुक्त बनेंगी।
प्रेंग्नेंसी के दौरान आपके मूड को बनाए रखने में मदद करने के लिए टॉक थेरेपी एक शक्तिशाली उपाय है। टॉक थेरेपी में आप अपने डॉक्टर, किसी खास दोस्त या रिश्तेदार जिस पर आप विश्वास कर सकती हैं, उनसे अपने दिल की बातें कहें। उनसे अपने बचपन की बातें शेयर करें, ऐसी बाते करें जिन्हें करने से आपको अच्छा फील हो। ताकि आप अपने तनाव को दूर करके खुश रह सकें।
प्रेग्नेंसी के समय महिलाएं ज्यादा बिजी रह सकती हैं। लेकिन इस समय आप अपनी लाइफ के महत्वपूर्ण लोगों से जुड़े रहने की कोशिश करें। प्रेग्नेंसी के दौरान अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से रिश्ते नजदीकियां बनाएं रखें। अपने खास लोगों से मिलने पर आपका तनाव मिनटों में दूर हो सकता है। ऐसे में अगर आप भी प्रेग्नेंसी के दौरान किसी भी तरह का तनाव महसूस कर रही हैं तो अपने खास लोगों से मिलने का प्लान जरूर बनाएं।
4. अपने पार्टनर से करें दिल खोल कर बातें
प्रेग्नेंसी को लेकर जितनी एक्साइटेड महिलाएं होती हैं उतने ही पुरुष भी होते हैं, लेकिन कई बार वो अपनी एक्साइटमेंट खुलकर दिखा नहीं पाते हैं। ऐसे में आप कोशिश करें की अपने पार्टनर के साथ खुलकर बात करें। ऐसा करने से आप अपने पार्टनर की फिलिंग भी समझ पाएंगी और उनके मन की बातें भी जान पाएंगी। प्रेग्नेंसी के दौरान तनावमुक्त होने के लिए ये सबसे अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।
तनाव को कम करने में योग एक पावरफूल तरीका है। कुछ रिसर्च में ये पाया गया है कि पेरेंटल योग प्रेग्नेंसी के दौरान भी आपके मूड को अच्छा रखने में मदद करता है। लेकिन ये योग शुरू करने से पहले आप अपने डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें। इतना ही नहीं तनाव के साथ बेहतर नींद के लिए भी पेरेंटल योग काफी फायदेमंद है।