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छत्तीसगढ़
Posted On Saturday, 05 May 2018 19:17

चलती ट्रेन में बाहर झांककर देखने की कोशिश करते पोल से टकराने से मौत

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चलती ट्रेन में बाहर झांककर देखने की कोशिश करते पोल से टकराने से मौत......

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ट्रेन का टिकट लेने उतरे भांजे को देख रहा था मामा, अगले ही पल में हो गई उसकी दर्दनाक मौत

बिलासपुर.चलती ट्रेन में बाहर झांककर भांजे को ट्रेन में चढ़ते देखने की कोशिश करते मामा की पोल से टकराने से मौत हो गई। वहीं प्लेटफार्म पर गिरकर भांजा घायल हो गया। जीआरपी ने इस मामले में मर्ग कायम कर लिया है। पेंड्रा के समीप ग्राम नेवसा नवापारा निवासी अनुरूप सिंह पिता स्व. हीरासिंह अपने भांजे दीपक कुमार पिता नंदलाल कुमार 20 के साथ बिलासपुर जाने के लिए 11 बजे पेंड्रारोड रेलवे स्टेशन पहुंचे। उनके साथ अनुरूप सिंह का एक दोस्त भी था। वे लोग पेंड्रारोड- बिलासपुर लोकल ट्रेनें से बिलासपुर आने वाले थे।

- स्टेशन पहुंचने के बाद अनुरूप ने दीपक को टिकट लाने कहा और स्वयं दोस्त के साथ ट्रेन में सवार हो गया। वे लोग जनरेटर बनवाने के लिए बिलासपुर आ रहे थे।

- 11.15 बजे ट्रेन छूटी तब तक दीपक नहीं पहुंचा था तो अनुरूप सिंह दरवाजे पर खड़ा होकर उसे देखने लगा।

- इस बीच दीपक प्लेटफार्म पर पहुंचा तो ट्रेन चलने लगी थी वह दौड़कर चढ़ने की कोशिश किया और फिसलकर प्लेटफार्म पर गिर गया।

- इस बीच अनुरूप सिंह उसे देखने के लिए अपने शरीर को ट्रेन से और बाहर निकाला। आधी ट्रेन प्लेटफार्म से बाहर निकल चुकी थी उसी समय अनुरूप का सिर खंभे से टकराया और वह ट्रेन से नीचे गिर गया।

- ट्रेन आगे बढ़ गई लोगों ने देखा तो इसकी सूचना जीआरपी को दी। जीआरपी स्टाफ मौके पर पहुंचा और घायल अनुरूप और दीपक को लेकर गौरेला के विक्टोरियम हास्पिटल पहुंचे।

- अनुरूप का सिर फट गया था और काफी मात्रा में खून बह गया था। अस्पताल में जांच के बाद डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं दीपक के हाथ पैर में खरोच आई।

- उसका भी इलाज कराया गया। पोस्टमार्टम के बाद अनुरूप सिंह शव परिजनों को सौंप दिया गया। पेंड्रारोड जीआरपी ने मामले में मर्ग कायम कर लिया है।

दोस्त बिलासपुर पहुंच गया

- अनुरूप सिंह के साथ उसका एक दोस्त भी ट्रेन में सवार हुआ था। उसके दोस्त को उसके गिरने का पता ही नहीं चला। ट्रेन से गिरने के समय ट्रेन में सवार कुछ लोगों ने उसे देखा अवश्य था लेकिन किसी को पता नहीं चला।

 - दोस्त उसे कुछ देर ट्रेन में तलाशता रहा लेकिन उसे पता नहीं चला। बताया जा रहा है कि वह ट्रेन से बिलासपुर पहुंच गया। यहां पहुंचने के बाद उसे हादसे की जानकारी मिली तो वह वापस पेंड्रारोड रवाना हुआ।
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छत्तीसगढ़
Posted On Saturday, 05 May 2018 19:03

पत्थलगड़ी : गांवों में लगे हरे पत्थरों पर दर्ज कई पंक्तियों में काननू की गलत व्याख्या

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पत्थलगड़ी : गांवों में लगे हरे पत्थरों पर दर्ज कई पंक्तियों में काननू की गलत व्याख्या.....

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छत्तीसगढ़ में पत्थलगड़ी : प्रदेश के सबसे ज्वलंत विवाद की हर परत पर कानून और संविधान विशेषज्ञों का विश्लेषण

रायपुर. जशपुर और आसपास लगातार गहरा रहा पत्थलगड़ी मामला कानूनी तौर पर कितना सही है और कितना गलत, इसका भास्कर ने कानूनविदों से विश्लेषण करवाया है। कानूनविदों की राय है कि गांवों में रखे गए हरे पत्थरों में दर्ज कई पंक्तियों में कानून की जो व्याख्या की गई है, वह सही नहीं है। यही नहीं, ग्रामसभा को असीमित अधिकार तो हैं, लेकिन वह गांव में किसी का प्रवेश रोक नहीं सकती है। 

पत्थलगड़ी आंदोलन के तहत तीन गांवों में जो पत्थर रखे गए हैं, उनमें कानन के अलग- अलग अनुच्छेद का हवाला दतेे हुए इसे सही करार देने की कोशिश की गई है, लेकिन अब इसे लेकर सवाल उठने लगे हैं। काननूविदों के मुताबिक इन शिलालेख में जितने भी अनुच्छेदलिखे गए हैं उसमें उसकी पहली लाइन को लिखकर ही माइंड गेम खेला गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक पत्थरों पर लिखी कुछ पंक्तियां तो सही हैं, लेकिन कुछ पंक्तियों के जरिये लोगों को भड़काने की कोशिश को राजद्रोह की संज्ञा भी दी जा सकती है।

किस अनुच्छेद के क्या मायने

1. पत्थर पर पहली लाइन में अनुच्छेद 13(3)क का जिक्र किया गया है जिसमें जनजातियों के रुढ़ी व प्रथा को विधि का बल प्राप्त है। इसे ऐसा बताया जा रहा है जैसे कि जनजाती समुदाय अपने मुताबिक काननू बना सकती है जबकि इसका मूलरुप है कि जो भी जनजातियों में रुढ़ि व प्रथा चली आ रही है जिसे काननू में मान्यताप्राप्त है वह लागू रहेगी।

सकती है।

किस अनुच्छेद के क्या मायने

1. पत्थर पर पहली लाइन में अनुच्छेद 13(3)क का जिक्र किया गया है जिसमें जनजातियों के रुढ़ी व प्रथा को विधि का बल प्राप्त है। इसे ऐसा बताया जा रहा है जैसे कि जनजाती समुदाय अपने मुताबिक काननू बना सकती है जबकि इसका मूलरुप है कि जो भी जनजातियों में रुढ़ि व प्रथा चली आ रही है जिसे काननू में मान्यताप्राप्त है वह लागू रहेगी।

2. दूसरी पंक्ति में अुच्छेद 244(1)(2) का जिक्र किया गया है। जिसमें पूर्व स्वशासन व नियंत्रण की शक्ति है लिखा गया है। यह अनुच्छेद असम राज्य के जनजाति क्षेत्रों के लिए बनाई गई है। जिसमें लिखा गया है कि संसद विधि द्वारा असम राज्य के भीतर एक स्वशासी राज्य बना सकेगी साथ ही इसके संचालन के लिए वह विधान मंडल या मंत्रिमंडल भी बना सकेगी।

3. तीसरी पंक्ति में अनुच्छेद 19(5)(6) का उल्लेख करते हुए लिखा गया है कि जनजातियों के स्वशासन व नियंत्रण क्षेत्र में गैर लोगों के मौलिक अधिकार लागू नहीं हैं। जिसे कानूनविदों ने सही करार दिया है।

4. चौथी पंक्ति में अनुच्छेद 244(1) कंडिका (5) क के हवाले से लिखा है कि कोई भी सामान्य कानून जैसे आईपीसी, आरपीसी और भूमि अधिग्रहण कानून पांचवीं अनुसूची वाले इलाकों में लागू नहीं है। कानूनविदों के अनुसार यह गलत व्याख्या है।

5. नीचे की पंक्तियों ने जिन फैसलों के आधार पर जो तथ्य लिखे गए हैं, वह सीधे वैसा नहीं है। फैसला साक्ष्य आैर परिस्थितियों के अनुसार हुए हैं। इन्हें कानून बताकर लोगों को बरगलाने का काम किया जा रहा है।

इसलिए राजद्रोह : संविधान के मुताबिक जो काेई बोले गए या लिखे गए शब्दों या संकेतों द्वारा दृश्यरूपण द्वारा अन्यथा विधि द्वारा स्थापित सरकार के प्रति घृणा या अवमानना पैदा करेगा, या पैदा करने का प्रयत्न करेगा, ऐसे कृत्यों को राजद्रोह की श्रेणी में रखा गया है।

ग्रामसभा के अधिकार भी दायरे में, यह स्वायत्त संस्था नहीं ह

- पत्थलगड़ी में दूसरा महत्वपूर्ण मसला ग्रामसभा के अधिकारों से जुड़ा हुआ है। गांवों में लगाए गए हर पत्थर का सबसे पहला वाक्य यही है कि सबसे ऊंची ग्रामसभा है। गांव से सबं ंं धित सभी मामले उसी के अधीन है। लेकिन काननूविदों का कहना है कि ग्रामसभा को सारे अधिकार एक दायरे में ही दिए गए हैं तथा इन अधिकारों के आधार पर वह खदु को स्वायत्त संस्था नहीं घोषित कर सकती। विशेषज्ञों के मुताबिक जल, जंगल और जमीन पर ग्रामसभा का हक है, लेकिन वह गांव में किसी को घुसने से नहीं रोक सकती। ग्रामसभा के अधिकारों को ऐसे समझ सकते हैं।

ग्रामसभा कानून से ऊंची नहीं

- अनुसूचित क्षेत्र में सभा को यह अधिकार है कि वह अपने यहाँ के जनजातीय समुदाय तथा व्यक्तियों की परंपरा, संस्कृतिक पहचान तथा समुदायिक साधनों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए।

- ग्राम सभा (अनुसूचित जनजाति समुदाय) में आपसी झगड़ों तथा विवाद निपटाने के लिए अनुसूचित जनजाति में जो पुराने रिवाज चले आ रहे हैं, उन्हें भी बचाएगी। अर्थात ग्रामसभा इन विषयों पर फैसला ले सकती है, जिसे संबंधित पक्षों को मानना होगा।

- ग्रामसभा अपनी सीमा के भीतर आने वाले जल, जंगल तथा जमीन की प्रचलित नियम के अनुसार देखभाल करेगी। इनसे जुड़े किसी भी विवाद का निपटारा करते समय ग्रामसभा यह ध्यान रखेगी कि फैसला संविधान की मूल भावना के खिलाफ न हो।

- ग्राम सभा अपनी सीमा के भीतर आने वाले सभी बाजारों और सभी प्रकार के पशुमेलों का प्रबंधन करेगी इसका मतलब यह हुआ कि ग्राम सभा यह तय कर सकेगी कि मेला कब, कहाँ और कैसे लगेगा वगैरह।

- ग्राम में लागू की जाने वाली सभी प्रकार की योजनाओं (जनजातीय-उपयोजना सहित) पर ग्राम सभा का नियंत्रण रहेगा। यानी ग्राम सभा ही यह तय करेगी कि कौन सी योजना ग्राम सभा लागू होंगे।

- ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग तथा ऐसे कृत्यों, जिसे राज्य सरकार तत्समय प्रवृत किसी विधि के अधीन उसे प्रदत्त करे या न्यस्त करे का पालन करेगी।

- धारा 10 (1) (क) में विनिर्दिष्ट कृत्य तथा धारा 10 (5) में वर्णित अनुसूचित क्षेत्र में ग्राम सभा के अतिरिक्त शक्तियों एवं कृत्यों के अलावा राज्य सरकार समय – समय अनुसूचित क्षेत्र में ग्राम सभा को अन्य अतिरिक्त शक्तियाँ तथा कृत्य निर्धारित कर सकेगी।

- ग्राम सभा, ग्राम पंचायत के कृत्यों से संबंधित किसी विषय पर विचार करने के लिए स्वतंत्र होगी तथा ग्राम पंचायत इनकी सिफारिशें को तत्समय प्रवृत नियमों के आलोक में कार्यान्वित करेगी।

- धारा 10 (1) तथा धारा 10 (5) में ग्राम सभा के वर्णित कृत्य तत्समय प्रवृत सरकार / के अधिनियमों/नियमों एवं उनके क्षेत्राधिकार को प्रभावित नहीं करेगा।

पत्थलगड़ी में कई बातें सही लेकिन प्रशासन से बर्ताव गलत

 - रिजवी वरिष्ठ क्रिमिनल लाॅयर फैसल रिजवी के मुताबिक पत्थरगड़ी में लिखी गई बातें सही हैं, लेकिन गांवों में इस आधार पर पुलिस-प्रशासन से किया गया बर्ताव पूरी तरह गलत है। शासन को आदिवासियों को समझाना चाहिए कि आपकी मर्जी के बगैर आपके जमीन आैर जंगल पर दूसरा कोई नहीं घुस सकता। लिखी गई बातों को गलत तरीके से समझाया जा रहा है। क्योंकि कई लोग संविधान में में लिखी गई बातों को ठीक से समझ नहीं सकते। पत्थर में अनुसूचित क्षेत्र को संविधान में प्राप्त अधिकार का जिक्र किया गया है। इसे तोड़ना संविधान का अपमान है।

 

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छत्तीसगढ़
Posted On Saturday, 05 May 2018 18:31

ग्राम स्वराज अभियान के दौरान 7 प्रमुख योजनाओं का लाभ दिलाने में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम

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 डॉ. रमन सिंह : ग्राम स्वराज अभियान के दौरान 7 प्रमुख योजनाओं का लाभ दिलाने में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम...

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दूरस्थ अंचलों में बुजुर्गों को पेंशन के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा: ग्राम पंचायत में मिलेगी पेंशन

मुख्यमंत्री  डॉ. रमन सिंह ने आज यहां इंडोर स्टेडियम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा आयोजित ग्राम स्वराज अभियान के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि ग्राम स्वराज अभियान के दौरान 7 प्रमुख योजनाओं का हितग्राहियों को लाभ दिलाने में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम स्थान पर है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ अंचलों में वृद्धावस्था पेंशन के लिए बुजुर्गों को अब दूर नहीं जाना पड़ेगा। ग्राम पंचायतों के माध्यम से उन्हें ग्राम पंचायतों में ही पेंशन मिलेगी। इसके लिए जल्द ही आदेश जारी किया जाएगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री अजय चन्द्राकर ने समारोह की अध्यक्षता की।
    मुख्यमंत्री ने समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में बिहान के महिला समूह देश में सबसे बेहतर और संगठित रूप से कार्य कर रहे हैं। अब तक प्रदेश के एक लाख 12 हजार बिहान के महिला समूहों को आजीविका के लिए 1480 करोड़ रूपए की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि पूरे देश के साथ छत्तीसगढ़ में भी संविधान निर्माता बाबा साहब अम्बेडकर की जयंती 14 अप्रैल से 5 मई तक ग्राम स्वराज अभियान आयोजित किया गया। इस दौरान 14 जिलों के चयनित 346 गांवों में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री जनधन योजना, सौभाग्य, उजाला योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के अंतर्गत पात्र शत्-प्रतिशत हितग्राहियों को लाभ दिलाया गया। इसी प्रकार मिशन इंद्रधनुष के तहत गर्भवती महिलाओं और बच्चों का शत्-प्रतिशत टीकाकरण किया गया।
    मुख्यमंत्री ने ग्राम स्वराज अभियान के समापन समारोह में प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में आयी बिहान महिला समूह की महिलाओं से आग्रह किया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, सौभाग्य योजना सहित प्रधानमंत्री द्वारा गरीबों के लिए संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रति आभार प्रकट करने के लिए महिलाएं प्रधानमंत्री को पोस्ट कार्ड लिखकर धन्यवाद पत्र भेजें। समारोह में उपस्थित महिलाओं ने हाथ उठाकर सहर्ष अपनी सहमति दी।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में महिलाओं को शक्ति का प्रतीक माना जाता है। अपने कार्यों से महिलाओं ने यह साबित करके दिखाया है। पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया, जिसके विरूद्ध पंचायती राज संस्थाओं में 56 प्रतिशत स्थानों पर महिला प्रतिनिधि चुनकर आए। उन्होंने कहा कि नक्सल आतंक और भय के माहौल में दंतेवाड़ा की सड़कों में वाहन चलाना मुश्किल काम है। यह महिला सशक्तिकरण का ही परिणाम है कि दंतेवाड़ा की सड़कों पर 50 महिलाएं ई-रिक्शा चला रही हैं। उन्होंने कहा अम्बिकापुर शहर को सबसे साफ-सुथरे शहर का खिताब मिला है। इसका सबसे बड़ा श्रेय महिला स्व-सहायता समूहों को है, जो घर-घर कचरा इकट्ठा करने का काम करती हैं। कांकेर में गोबर बीनने वाली महिलाएं सीताफल संग्रहण का कम कर रही हैं और सीताफल के गुदे से तैयार आईसक्रीम रायपुर जैसे शहरों में भेज रही है। बिहान के महिला स्व-सहायता समूह स्कूलों में बच्चों के लिए 22 लाख गणवेश तैयार करने का काम भी कर रही हैं। गांवों में असामाजिक तत्वों पर अंकुश लगाने में भी महिला स्वसहायता समूहों का सराहनीय योगदान है। डॉ. सिंह ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत प्रदेश के 55 लाख परिवारों को दी जा रही 50 हजार रूपए तक के निःशुल्क इलाज की सुविधा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीब परिवारों को पांच लाख रूपए तक निःशुल्क इलाज की सुविधा मिलेगी। इस योजना का लाभ छत्तीसगढ़ के 37 लाख गरीब परिवारों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि गांवों में शासन की योजनाओं के प्रति काफी जागरूकता आयी है। कौशल विकास मिशन के तहत 60 ट्रेडो में 3 से 6 माह का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने स्वरोजगार के लिए महिलाओं को हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
    कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री अजय चन्द्राकर ने कहा कि सबसे अच्छा काम करने वाले बिहान महिला स्व-सहायता समूह को डेढ़ लाख रूपए का स्वच्छता दूत कुंवरबाई सम्मान हर वर्ष दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिहान समूह की महिलाओं को अपने कुटीर उद्योग के उत्पादों की बिक्री के लिए शहरों में दुकाने उपलब्ध कराई जाएंगी। जिला पंचायत और जनपद पंचायतें शहरों में दो-दो दुकानों का निर्माण कर इन्हें बिहान समूहों को उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में ग्राम पंचायतों को सशक्त और अधिकार संपन्न बनाने के लिए राज्य शासन द्वारा अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सामाजिक समरसता वाला शांत प्रदेश है, जहां ग्रामीण क्षेत्रों की परम्पराओं का भी संरक्षण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महिला स्व-सहायता समूह आजीविका के लिए यदि एक से अधिक गतिविधियां प्रारंभ करना चाहती हैं तो उन्हें इसके लिए भी सहायता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 10 लाख मकान बनाए जाएंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री आर.पी. मंडल ने बताया कि ग्राम स्वराज अभियान के तहत प्रदेश में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 23 हजार 620 रसोई गैस कनेक्शन दिए गए। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 26 हजार 500 हितग्राहियों को स्वीकृति पत्र प्रदान किए गए और 17 हजार 900 हितग्राहियों का गृह प्रवेश कराया गया। उजाला योजना में 66 हजार 53 एल.ई.डी. बल्ब वितरित किए गए। प्रधानमंत्री जनधन योजना में 17 हजार 717 बैंक खाते खोले गए। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में 21 हजार 156 लोगों का और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में 40 हजार 377 लोगों का बीमा कराया गया। सौभाग्य योजना में भी लक्ष्य के अनुसार शत्-प्रतिशत घरों में बिजली कनेक्शन दिए गए। उन्होंने बताया कि राष्ट्रव्यापी ग्राम स्वराज अभियान के तहत छत्तीसगढ़ में 14 अप्रैल को सामाजिक न्याय दिवस, 18 अप्रैल को स्वच्छ भारत दिवस, 20 अप्रैल को उज्ज्वला दिवस, 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस, 28 अप्रैल को ग्राम स्वराज दिवस, 30 अप्रैल को आयुष्मान भारत दिवस और 02 मई को किसान कल्याण दिवस मनाया गया। इन अवसरों पर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए।    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर इंडोर स्टेडियम परिसर में आजीविका एवं कौशल विकास मेला का शुभारंभ भी किया। उन्होंने समारोह में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बिहान समूह की महिलाओं को सहायता राशि के चेक वितरित किए। इस अवसर पर उन्होंने अच्छा काम करने वाले बिहान समूहों तथा स्वच्छता अभियान के स्वच्छता दूतों तथा वर्ष 2017 की संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा में चयनित छत्तीसगढ़ के युवाओं को सम्मानित किया।  
        समारोह में धरसींवा विधायक श्री देवजी भाई पटेल, आरंग विधायक श्री नवीन मारकंडेय, विधायक श्री बनार्ड जोसेफ रोड्रिक्स, छत्तीसगढ़ वित्त आयोग के अध्यक्ष श्री चंद्रशेखर साहू , मुख्य सचिव श्री अजय सिंह, जिला पंचायत रायपुर की अध्यक्ष श्रीमती शारदा देवी विशेष अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित थीं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री पी.सी. मिश्रा, कलेक्टर रायपुर श्री ओ.पी.चौधरी , जिला पंचायत रायपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री नीलेश क्षीरसागर सहित बड़ी संख्या में बिहान समूह की महिलाएं, अनेक जनप्रतिनिधि और सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के संचालक श्री तारन प्रकाश सिन्हा ने आभार प्रकट किया।

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छत्तीसगढ़
Posted On Saturday, 05 May 2018 18:04

लोक निर्माण मंत्री श्री राजेश मूणत ने किया सड़क निर्माण कार्यों का भूमिपूजन

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लोक निर्माण मंत्री श्री राजेश मूणत ने किया सड़क निर्माण कार्यों का भूमिपूजन..... 

 
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लोक निर्माण मंत्री श्री राजेश मूणत ने आज राजधानी रायपुर के वार्ड नं. 12 (शहीद मनमोहन सिंह बख्शी वार्ड) में कोटा की चारों दिशाओं में सीमेंट कांक्रीट सड़क निर्माण और डामरीकरण कार्यों के लिए भूमिपूजन और शिलान्यास किया। कोटा की चारों दिशाओं में 18.45 किलोमीटर सड़क निर्माण किया जाएगा, जिस पर लगभग पांच करोड़ 13 लाख रूपए की लागत आएगी। श्री मूणत ने समारोह को संबोधित करते हुए राज्य शासन द्वारा रायपुर नगर निगम क्षेत्र में जनसुविधाओं के विकास के लिए किए प्रयासों पर प्रकाश डाला। समारोह की अध्यक्षता रायपुर नगर निगम के सभापति श्री प्रफुल्ल विश्वकर्मा ने की। निगम निगम के नेता प्रतिपक्ष श्री सूर्यकांत राठौर सहित स्थानीय वार्ड पार्षद श्रीमती ठाकुर और बड़ी संख्या में नागरिक इस अवसर पर उपस्थित थे। 

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