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नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्र को संबोधित किया. पीएम ने आजादी के 75 साल के जश्न पर अगले 25 वर्षों के लिए कई लक्ष्य निर्धारित किए. उन्होंने कहा कि भारत को स्वतंत्रता की शताब्दी मनाने से पहले एक विकसित राष्ट्र का तमगा हासिल करना चाहिए.
मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :
पीएम मोदी ने कहा, 'हम बापू, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, बाबासाहेब अंबेडकर, वीर सावरकर के शुक्रगुजार हैं, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी.
अपने संबोधन में, पीएम मोदी ने लोगों से 2047 तक स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को पूरा करने के लिए पांच प्रतिज्ञाओं के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया.
पीएम मोदी की साल 2047 के लिए पांच प्रतिज्ञाएं हैं - विकसित भारत, गुलामी को दूर करना, विरासत में गर्व, एकता, नागरिकों का कर्तव्य.
समारोह की शुरुआत पीएम मोदी के राज घाट के दौरे से हुई थी जहां उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी थी. इसके बाद पीएम ने लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया.
आजादी के 75 साल के जश्न को एक मेगा कार्यक्रम, आजादी का अमृत महोत्सव द्वारा चिह्नित किया जा रहा है, जो मार्च 2021 में शुरू हुआ था. देश भर में, राष्ट्रीय स्मारकों और प्रतिष्ठित इमारतों को तिरंगे की रोशनी से रोशन किया गया है.
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के जवानों ने आज मिशन 'अमृतरोहण' के रूप में एक साथ 75 चोटियों पर चढ़ाई की है और एक विशिष्ट रिकॉर्ड के रूप में उन 75 चोटियों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया है.
पहली बार में, सरकार ने लोगों को तीन दिनों के लिए अपने घरों में झंडा प्रदर्शित करने की भी अनुमति दी है. "हर घर तिरंगा" अभियान के लिए ध्वज कानूनों को भी बदलना पड़ा.
21 तोपों की औपचारिक सलामी में पहली बार स्वदेश निर्मित होवित्जर तोपों का इस्तेमाल किया गया. रक्षा अनुसंधान संगठन डीआरडीओ द्वारा विकसित एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस) पीएम मोदी के मेक इन इंडिया अभियान का प्रमुख उत्पाद है.
राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए गए हैं. लाल किले की सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा घेरे में 10,000 से अधिक जवानों को तैनात किया गया है. एंट्री प्वाइंट पर फेशियल रिकग्निशन सिस्टम कैमरे लगाए गए.
इस वर्ष, विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सांस्कृतिक, प्राकृतिक और धार्मिक विरासत को दर्शाने वाली इमारतों और लाल किले की दीवारों को प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों के पोस्टर से सजाया गया.
नई दिल्ली: एनडीए के प्रत्याशी और बंगाल के पूर्व गवर्नर जगदीप धनखड़ देश के अगले उप राष्ट्रपति होंगे. शनिवार को मतदान और फिर शाम 6 बजे शुरू हुई मतगणना के बाद 7.40 बजे धनखड़ को निर्वाचित घोषित किया गया. जगदीप धनखड़ ने पिछली बार हुए उप राष्ट्रपति चुनाव में वेंकैया नायडू से बड़ी जीत दर्ज की है. धनखड़ को 70 फीसदी से ज्यादा वोट मिले हैं. जबकि वेंकैया नायडू को 68 फीसदी के करीब वोट मिले थे. सूत्रों के हवाले से खबर है कि जगदीप धनखड़ को 528 वोट और मार्गरेट अल्वा को 182 वोट मिले. जबकि 15 वोट अवैध पाए गए. वहीं विपक्षी दलों में एकजुटता नहीं होने का खामियाजा मार्गरेट अल्वा को भुगतना पड़ा और उन्हें पराजय मिली. उप राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान शनिवार सुबह 10 बजे शुरू हुआ और शाम को 5 बजे तक चला. उपराष्ट्रपति के चुनाव में 725 सांसदो ने मतदान किया किया. शनिवार को वोटिंग में करीब 93 प्रतिशत सांसदों ने वोट डाला, जबकि 55 सांसदों ने मतदान नहीं किया.
उप राष्ट्रपति चुनाव में रिटर्निंग अफसर ने आधिकारिक तौर पर नतीजे घोषित करते हुए कहा कि कुल 780 निर्वाचक थे और 725 ने अपना वोट डाला, जो कुल मतों का 92.45 फीसदी था. जबकि 55 ने वोट नहीं डाला.इन 55 गैरहाजिर सांसदों में 34 टीएमसी, बीजेपी-सपा और शिवसेना के 2-2 और बसपा के एक सांसद शामिल हैं. 36 सांसदों वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने चुनाव में मतदान नहीं करने का फ़ैसला किया था. लेकिन शुभेंदु अधिकारी के पिता शिशिर अधिकारी और डिब्येन्दु अधिकारी ने मतदान किया,यानी टीएमसी 34 सांसदो ने मतदान नहीं किया. बीजेपी के दो सांसदों ने वोट नहीं डाला. सनी देओल और संजय धोत्रे ने वोट नहीं डाला. राष्ट्रपति चुनाव में भी ये वोट नहीं डाल सके थे.
देश का अगला उपराष्ट्रपति चुनने के लिए शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, कई केंद्रीय मंत्रियों और विभिन्न दलों के सांसदों ने मतदान किया. दोपहर तक 85 फीसदी से ज्यादा सांसदों ने मतदान कर दिया था. संसद के दोनों सदनों को मिलाकर कुल सदस्यों की संख्या 788 होती है. इनमें से राज्यसभा की 8 सीट फिलहाल खाली हैं. इन 780 में से करीब 90 फीसदी सांसद 4.30 बजे तक मतदान कर चुके थे. तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने पहले ही साफ कर दिया था कि वो मतदान से दूर रहेगी. दोनों सदनों में उसके कुल 39 सांसद थे. वाइस प्रेसिडेंट इलेक्शन के लिए वोटिंग 10 बजे प्रारंभ हुआ था और शाम 5 बजे समाप्त होगा. पीएम मोदी उप राष्ट्रपति चुनाव में सबसे पहले वोट डालने वाले सांसदों में शामिल रहे. उन्होंने वोटिंग से जुड़ी एक तस्वीर साझा करते हुए ट्वीट किया. गृह मंत्री अमित शाह ने मतदान के बाद अपनी तस्वीर साझा करते हुए ट्वीट किया.
बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी मतदान किया. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व्हीलचेयर पर संसद भवन पहुंचे और उपराष्ट्रपति चुनाव में अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. मनमोहन सिंह ने पिछले महीने राष्ट्रपति चुनाव में भी व्हीलचेयर से संसद भवन पहुंचकर वोट डाला था. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने दोपहर में मतदान किया. राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, पार्टी महासचिव जयराम रमेश और मुख्य विपक्षी दल के कई अन्य सांसदों ने भी वोट डाला. उपराष्ट्रपति चुनाव में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने भी मतदान किया. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, राज्यसभा में नेता सदन पीयूष गोयल, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और कई अन्य केंद्रीय मंत्रियों ने मतदान किया.
लोकसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक राकेश सिंह, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के रघु राम कृष्ण राजू और तेलंगाना राष्ट्र समिति के सांसदों ने भी वोट डाला.उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए प्रत्याशी और पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल जगदीप धनखड़ (71) का मुकाबला विपक्ष की संयुक्त उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा (80) से है.बीजेपी के पास लोकसभा में पूर्ण बहुमत और राज्यसभा में 91 सांसदों को देखते हुए धनखड़ का चुना जाना पहले ही तय माना जा रहा था. मौजूदा उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू का कार्यकाल 10 अगस्त को खत्म हो रहा है.
नई दिल्ली: 26 जनवरी, 1950 को गणतंत्र बने भारत के राष्ट्रपति पद पर दूसरी बार एक महिला सुशोभित हो गई हैं, बस ,औपचारिक घोषणा होना शेष रह गया है... 18 जुलाई को हुए राष्ट्रपति चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व में केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की प्रत्याशी श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने संयुक्त विपक्ष के प्रत्याशी यशवंत सिन्हा से हुए मुकाबले में कुल वोटों में से 50 फीसदी से अधिक वोट हासिल कर लिए हैं, हालांकि मतगणना अब भी जारी है... भारतीय संविधान में की गई व्यवस्था के अनुसार पांच साल के कार्यकाल वाले इस सर्वोच्च पद पर श्रीमती द्रौपदी मुर्मू 25 जुलाई, 2022 को शपथ लेकर विराजमान होंगी, जिन्हें देश के मौजूदा प्रधान न्यायाधीश (CJI) एन.वी. रमना पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे... सो, इस समय यह याद करना दिलचस्प रहेगा कि भारत के गणतंत्र बन जाने, यानी संविधान को अंगीकार कर लेने के बाद से अब तक कितने राष्ट्रपति देश में रह चुके हैं, और उनसे जुड़ी कुछ रोचक और अनजानी बातें जान लेना भी काफी रोचक होगा...
भारत के राष्ट्रपतियों से जुड़े 20 रोचक तथ्य
1- द्रौपदी मुर्मू भारतीय गणराज्य की 15वीं राष्ट्रपति चुनी गई हैं... भारत का राष्ट्रपति राष्ट्राध्यक्ष होने के साथ-साथ भारतीय सशस्त्र सेनाओं का सुप्रीम कमांडर तथा देश का पहला नागरिक भी होता है...
2- द्रौपदी मुर्मू देश की पहली जनजातीय महिला राष्ट्रपति तथा दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं... भारत की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल थीं, जो 25 जुलाई, 2007 से 25 जुलाई, 2012 तक राष्ट्रपति पद पर विराजमान रहीं...
3- अब तक देश के 12 राष्ट्रपतियों ने अपना पांच-वर्षीय कार्यकाल पूरा किया है... भारत के दो राष्ट्रपति - तीसरे राष्ट्रपति डॉ ज़ाकिर हुसैन (निधन : 3 मई, 1969) तथा पांचवें राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद (निधन : 11 फरवरी, 1977) - का देहावसान पद पर रहते हुए हुआ, और वे अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए थे...
5- भारत में अब तक कुल तीन कार्यवाहक राष्ट्रपति रहे हैं... देश के पहले कार्यवाहक राष्ट्रपति वराहगिरी वेंकटगिरि (वी.वी. गिरि) थे, जो भारत के तीसरे राष्ट्रपति डॉ ज़ाकिर हुसैन के पद पर रहते हुए निधन के बाद 3 मई, 1969 से 20 जुलाई, 1969 तक 78 दिन तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के पद पर रहे... जब वी.वी. गिरि ने राष्ट्रपति चुनाव में भाग लेने के लिए पद से त्यागपत्र दिया, तो 20 जुलाई, 1969 से 24 अगस्त, 1969 तक 35 दिन के लिए मोहम्मद हिदायतुल्ला (वह भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) भी रह चुके हैं) को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया... इसके बाद, देश के तीसरे कार्यवाहक राष्ट्रपति बासप्पा दानप्पा जत्ती (बी.डी. जत्ती) बने, जब पांचवें राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद का पद पर रहते हुए निधन हो गया... बी.डी. जत्ती 11 फरवरी, 1977 से 25 जुलाई, 1977 तक कुल 164 दिन के लिए कार्यवाहक राष्ट्रपति रहे...
6- मोहम्मद हिदायतुल्ला देश के सर्वोच्च पद पर (कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में) पहुंचने वाले एकमात्र शख्स हैं, जो भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) भी रहे...
7- मोहम्मद हिदायतुल्ला ही एकमात्र शख्सियत हैं, जो कार्यवाहक राष्ट्रपति रहने के बाद देश के उपराष्ट्रपति बने... मोहम्मद हिदायतुल्ला 31 अगस्त, 1979 से 30 अगस्त, 1984 तक भारत के उपराष्ट्रपति रहे... उनके उपराष्ट्रपति काल में देश के राष्ट्रपति पद नीलम संजीवा रेड्डी तथा ज्ञानी ज़ैल सिंह विराजमान रहे...
8- छठे राष्ट्रपति नीलम संजीवा रेड्डी भारत के एकमात्र राष्ट्रपति रहे, जिनका चुनाव निर्विरोध हुआ था... वर्ष 1977 में हुए चुनाव के लिए दाखिल किए गए सभी 36 अन्य नामांकन पत्र रद्द हो गए थे, और वही अकेले मैदान में बचे थे...
9- एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि वर्ष 1969 में भी नीलम संजीवा रेड्डी ने आधिकारिक कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में राष्ट्रपति चुनाव लड़ा था, परन्तु उस वक्त वह बेहद कम अंतर से निर्दलीय वराहगिरी वेंकटगिरि (वी.वी. गिरि) से हार गए थे...
10- देश में सबसे रोचक राष्ट्रपति चुनाव 1969 का ही रहा था, जब नीलम संजीवा रेड्डी के कांग्रेस का आधिकारिक प्रत्याशी होने के बावजूद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सांकेतिक तौर पर वी.वी. गिरी का समर्थन किया था, जिसकी बदौलत वामदलों के अलावा कांग्रेस के भी कुछ जनप्रतिनिधियों ने वीवी. गिरी का साथ दिया. हालांकि वी.वी. गिरी को पहली वरीयता वाले सिर्फ 48 फीसदी मत हालि हुए थे, और उन्हें पूर्ण बहुमत नहीं मिला था, परन्तु उस वक्त चुनाव में तीसरे आधिकारिक प्रत्याशी वित्तमंत्री सी.डी. देशमुख को भी एक लाख से कुछ ज़्यादा वोट मिल गए थे, जिसके फलस्वरूप नीलम संजीवा रेड्डी चुनाव हार गए थे...
11- भारत में छह राष्ट्रपति ऐसे रहे, जो उपराष्ट्रपति, यानी संसद के उच्च सदन राज्यसभा के सभापति भी रहे हैं... भारत के पहले उपराष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन देश के दूसरे राष्ट्रपति बने थे... देश के दूसरे उपराष्ट्रपति डॉ ज़ाकिर हुसैन भारत के तीसरे राष्ट्रपति बने थे... तीसरे उपराष्ट्रपति वी.वी. गिरी भी देश के चौथे राष्ट्रपति चुने गए... रामास्वामी वेंकटरमण भारत के सातवें उपराष्ट्रपति थे, जो आठवें राष्ट्रपति चुने गए... आठवें उपराष्ट्रपति डॉ शंकर दयाल शर्मा भी नौवें राष्ट्रपति बने... इसी प्रकार, नौवें उपराष्ट्रपति कोचेरिल रमन नारायणन (के.आर. नारायणन) भी भारत के 10वें राष्ट्रपति बने... के.आर. नारायणन के बाद राष्ट्रपति पद पर अब तक कोई भी उपराष्ट्रपति विराजमान नहीं हुआ है...
12- राष्ट्रपति के रूप में सबसे छोटा कार्यकाल तीसरे राष्ट्रपति डॉ ज़ाकिर हुसैन का रहा था... वह 13 मई, 1967 से 3 मई, 1969 तक ही राष्ट्रपति रहे, और उनका कार्यकाल कुल एक साल 355 दिन का रहा... यह देश के राष्ट्रपति के रूप सबसे छोटा कार्यकाल रहा...
13- देश के पांचवें राष्ट्रपति और भारत के दूसरे मुस्लिम राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद का 11 फरवरी, 1977 को देहावसान हो जाने पर बासप्पा दानप्पा जत्ती (बी.डी. जत्ती) कार्यवाहक राष्ट्रपति बने, और उन्होंने अपने पांच माह 14 दिन के कार्यकाल के दौरान देश के प्रधानमंत्री पद पर मोरारजी देसाई तथा उनके मंत्रिमंडल को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई...
14- वर्ष 1957 में हुए चुनाव में राष्ट्रपति पद पर 1950 से विराजमान डॉ राजेंद्र प्रसाद ने दोबारा चुनाव लड़ा था, और उस वक्त उन्हें 98.99 फीसदी मत प्राप्त हुए थे... यह किसी भी राष्ट्रपति द्वारा हासिल किए गए वोटों में सर्वाधिक प्रतिशत है...
15- वर्ष 1962 के राष्ट्रपति चुनाव में डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन को 98.25 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे, और यह दूसरा सर्वाधिक वोट प्रतिशत है... हालिया वर्षों में कोचेरिल रमन नारायणन (के.आर. नारायणन) ने 1997 के राष्ट्रपति चुनाव में लगभग 95 फीसदी वोट पाए थे, जब शिवसेना के अतिरिक्त सभी बड़ी पार्टियों ने उनका समर्थन किया था...
16- भारत के चौथे राष्ट्रपति वी.वी. गिरि एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति हैं, जो देश के कार्यवाहक राष्ट्रपति भी रहे हैं, और उपराष्ट्रपति भी रहे हैं...
17- देश के पहले और एकमात्र सिख राष्ट्रपति ज्ञानी ज़ैल सिंह थे, जो 25 जुलाई, 1982 से 25 जुलाई, 1987 तक भारतीय गणराज्य के सातवें राष्ट्रपति रहे...
18- देश के पहले मुस्लिम राष्ट्रपति डॉ ज़ाकिर हुसैन थे, जो भारत के तीसरे राष्ट्रपति के रूप में 13 मई, 1967 से 3 मई, 1969 तक सर्वोच्च पद पर रहे... भारत के दूसरे मुस्लिम राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद थे, जो पांचवें राष्ट्राध्यक्ष के रूप में 24 अगस्त, 1974 से 11 फरवरी, 1977 तक राष्ट्रपति पद पर विराजमान रहे... देश के तीसरे मुस्लिम राष्ट्रपति डॉ अवुल पकिर जैनुलाबदीन अब्दुल कलाम, यानी डॉ ए.पी.जे. अब्दुल कलाम थे, जो देश के 11वें राष्ट्रपति के रूप में 25 जुलाई, 2002 से 25 जुलाई, 2007 तक विराजमान रहे...
19- देश के पहले दलित राष्ट्रपति के.आर. नारायणन थे, जो 25 जुलाई, 1997 से 25 जुलाई, 2002 तक भारतीय गणराज्य के 10वें राष्ट्रपति रहे... देश के दूसरे दलित राष्ट्रपति भारत के 14वें और निवर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद हैं, जिन्होंने 25 जुलाई, 2017 को पदभार संभाला था, और अब 25 जुलाई, 2022 को द्रौपदी मुर्मू के शपथग्रहण तक पद पर रहेंगे...
20- भारत के सभी राष्ट्रपति इस प्रकार हैं...
* पहले राष्ट्रपति थे डॉ राजेंद्र प्रसाद (जन्म 1884 - निधन 1963) - दो कार्यकाल तक पद पर रहे एकमात्र राष्ट्रपति, सबसे लम्बा कार्यकाल - (26 जनवरी, 1950 - 13 मई, 1962)
* दूसरे राष्ट्रपति थे डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन (जन्म 1888 - निधन 1975) - राष्ट्रपति पद पर पहुंचे पहले उपराष्ट्रपति - (13 मई, 1962 - 13 मई, 1967)
* तीसरे राष्ट्रपति थे डॉ ज़ाकिर हुसैन (जन्म 1897 - निधन 1969) - पहले मुस्लिम राष्ट्रपति, पद पर रहते हुए देहावसान, सबसे छोटा कार्यकाल - (13 मई, 1967 - 3 मई, 1969)
* चौथे राष्ट्रपति थे वी.वी. गिरि (जन्म 1894 - निधन 1980) - पहले कार्यवाहक राष्ट्रपति (उपराष्ट्रपति, कार्यवाहक राष्ट्रपति तथा राष्ट्रपति - तीनों पदों पर रहे एकमात्र व्यक्ति) - (24 अगस्त, 1969 - 24 अगस्त, 1974)
* पांचवें राष्ट्रपति थे फखरुद्दीन अली अहमद (जन्म 1905 - निधन 1977) - दूसरे मुस्लिम राष्ट्रपति, पद पर रहते हुए देहावसान - (24 अगस्त, 1974 - 11 फरवरी, 1977)
* छठे राष्ट्रपति थे नीलम संजीवा रेड्डी (जन्म 1913 - निधन 1996) - निर्विरोध चुने गए एकमात्र राष्ट्रपति - (25 जुलाई, 1977 - 25 जुलाई, 1982)
* सातवें राष्ट्रपति थे ज्ञानी ज़ैल सिंह (जन्म 1916 - निधन 1994) - पहले और एकमात्र सिख राष्ट्रपति - (25 जुलाई, 1982 - 25 जुलाई, 1987)
* आठवें राष्ट्रपति थे आर. वेंकटरमण (जन्म 1910 - निधन 2009) - (25 जुलाई, 1987 - 25 जुलाई, 1992)
* नौवें राष्ट्रपति थे डॉ शंकर दयाल शर्मा (जन्म 1918 - निधन 1999) - (25 जुलाई, 1992 - 25 जुलाई, 1997)
* 10वें राष्ट्रपति थे के.आर. नारायणन (जन्म 1920 - निधन 2005) - पहले दलित राष्ट्रपति - (25 जुलाई, 1997 - 25 जुलाई, 2002)
* 11वें राष्ट्रपति थे डॉ अवुल पकिर जैनुलाबदीन अब्दुल कलाम, यानी डॉ ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (जन्म 1931 - निधन 2015) - तीसरे मुस्लिम राष्ट्रपति - (25 जुलाई, 2002 - 25 जुलाई, 2007)
* 12वीं राष्ट्रपति थीं श्रीमती प्रतिभा पाटिल (जन्म 1934) - पहली महिला राष्ट्रपति - (25 जुलाई, 2007 - 25 जुलाई, 2012)
* 13वें राष्ट्रपति थे डॉ प्रणब मुखर्जी (जन्म 1935 - निधन 2020) - (25 जुलाई, 2012 - 25 जुलाई, 2017)
* 14वें और निवर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (जन्म 1945) - दूसरे दलित राष्ट्रपति - (25 जुलाई, 2007 - 25 जुलाई, 2012)
| भारत के राष्ट्रपति | ||||
|---|---|---|---|---|
| संख्या | राष्ट्रपति का नाम | जन्म | निधन | कार्यकाल |
| 1 | डॉ राजेंद्र प्रसाद | 3 दिसंबर, 1884 | 28 फरवरी, 1963 | 26 जनवरी, 1950 से 13 मई, 1962 |
| 2 | डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन | 5 सितंबर, 1888 | 17 अप्रैल, 1975 | 13 मई, 1962 से 13 मई, 1967 |
| 3 | डॉ ज़ाकिर हुसैन | 8 फरवरी, 1897 | 3 मई, 1969 | 13 मई, 1967 से 3 मई, 1969 |
| ** | वराहगिरी वेंकटगिरी | 10 अगस्त, 1894 | 24 जून, 1980 | 3 मई, 1969 से 20 जुलाई, 1969 |
| ** | मोहम्मद हिदायतुल्ला | 17 दिसंबर, 1905 | 18 सितंबर, 1992 | 20 जुलाई, 1969 से 24 अगस्त, 1969 |
| 4 | वराहगिरी वेंकटगिरी | 10 अगस्त, 1894 | 24 जून, 1980 | 24 अगस्त, 1969 से 24 अगस्त, 1974 |
| 5 | डॉ फखरुद्दीन अली अहमद | 13 मई, 1905 | 11 फरवरी, 1977 | 24 अगस्त, 1974 से 11 फरवरी, 1977 |
| ** | बासप्पा दानप्पा जत्ती | 10 सितंबर, 1912 | 7 जून, 2002 | 11 फरवरी, 1977 से 25 जुलाई, 1977 |
| 6 | नीलम संजीवा रेड्डी | 19 मई, 1913 | 1 जून, 1996 | 25 जुलाई, 1977 से 25 जुलाई, 1982 |
| 7 | ज्ञानी ज़ैल सिंह | 5 मई, 1916 | 25 दिसंबर, 1994 | 25 जुलाई, 1982 से 25 जुलाई, 1987 |
| 8 | रामास्वामी वेंकटरमण | 4 दिसंबर, 1910 | 27 जनवरी, 2009 | 25 जुलाई, 1987 से 25 जुलाई, 1992 |
| 9 | डॉ शंकर दयाल शर्मा | 19 अगस्त, 1918 | 26 दिसंबर, 1999 | 25 जुलाई, 1992 से 25 जुलाई, 1997 |
| 10 | कोचेरिल रमन नारायणन | 4 फरवरी, 1920 | 9 नवंबर, 2005 | 25 जुलाई, 1997 से 25 जुलाई, 2002 |
| 11 | डॉ ए.पी.जे. अब्दुल कलाम | 15 अक्टूबर, 1931 | 27 जुलाई, 2015 | 25 जुलाई, 2002 से 25 जुलाई, 2007 |
| 12 | प्रतिभा पाटिल | 19 दिसंबर, 1934 | - | 25 जुलाई, 2007 से 25 जुलाई, 2012 |
| 13 | डॉ प्रणब मुखर्जी | 11 दिसंबर, 1935 | 31 अगस्त, 2020 | 25 जुलाई, 2012 से 25 जुलाई, 2017 |
| 14 | रामनाथ कोविंद | 1 अक्टूबर, 1945 | - | 25 जुलाई, 2017 से 25 जुलाई, 2022 |
| 15 | द्रौपदी मुर्मू | 20 जून, 1958 | - | 25 जुलाई, 2022 को होगा शपथग्रहण |
| ** : कार्यवाहक राष्ट्रपति | ||||
कानपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को विपक्ष पर विकास कार्यों में अड़ंगा डालने का आरोप लगाते हुए कहा कि हर राजनीतिक दल का दायित्व है कि वह किसी पार्टी और व्यक्ति के विरोध को देश की मुखालफत में न बदले. प्रधानमंत्री ने समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व राज्यसभा सदस्य हरमोहन सिंह यादव की 10वीं पुण्यतिथि पर कानपुर में आयोजित गोष्ठी में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दिए संबोधन में कहा, “हाल के समय में विचारधारा या राजनीतिक स्वार्थ को समाज और देश के हित से भी ऊपर रखने का चलन शुरू हो गया है. विपक्षी दल कई बार तो सरकार के कामकाज में सिर्फ इसलिए अड़ंगा डालते हैं, क्योंकि जब वे सत्ता में थे, तब अपने द्वारा लिए गए फैसलों को लागू नहीं कर पाए. अब अगर इन फैसलों का क्रियान्वयन होता है तो वे उसका विरोध करते हैं. देश के लोग इसे पसंद नहीं करते.”
मोदी ने कहा, “यह हर राजनीतिक दल का दायित्व है कि वह किसी पार्टी और व्यक्ति के विरोध को देश की मुखालफत में न बदले. विचारधाराओं का अपना स्थान है और होना भी चाहिए. राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं भी हो सकती हैं, लेकिन देश सबसे पहले है.” उन्होंने कहा, “लोहिया जी का मानना था कि समाजवाद समानता का सिद्धांत है. वह सतर्क करते थे कि समाजवाद का पतन उसे असमानता में बदल सकता है. हमने भारत में इन दोनों परिस्थितियों को देखा है.” मोदी ने कहा, “हमने देखा है कि भारत के मूल विचारों में समाज वाद-विवाद का विषय नहीं है. हमारे लिए समाज हमारी सामूहिकता और सहकारिता की संरचना है. समाज हमारा संस्कार है, संस्कृति है, स्वभाव है. इसलिए लोहिया जी भारत के सांस्कृतिक सामर्थ्य की बात कहते थे. उन्होंने रामायण मेला शुरू कर हमारी विरासत और भावनात्मक एकता के लिए जमीन तैयार की थी.”
प्रधानमंत्री ने कहा, “हरमोहन सिंह यादव लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रहे और उन्होंने विधान परिषद सदस्य, विधायक, राज्यसभा सदस्य और अखिल भारतीय यादव महासभा के अध्यक्ष के रूप में विभिन्न पदों पर कार्य किया. हरमोहन सिंह यादव के चौधरी चरण सिंह और राम मनोहर लोहिया के साथ घनिष्ठ संबंध थे.” उन्होंने कहा कि हरमोहन सिंह यादव ने अपने बेटे एवं विधान परिषद के पूर्व सभापति सुखराम सिंह के साथ कानपुर और उसके आसपास कई शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
मोदी ने कहा कि वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान कई सिखों के जीवन की रक्षा करने में वीरता के प्रदर्शन के लिए हरमोहन सिंह यादव को 1991 में शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था.राजनीतिक विश्लेषक सपा के पूर्व राज्यसभा सदस्य के पुण्यतिथि कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन को यादव वोटबैंक में सेंध लगाने की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं.
नई दिल्ली : देश का 15वां राष्ट्रपति कौन होगा, ये गुरुवार को तय हो जाएगा. राष्ट्रपति चुनाव के लिए 18 जुलाई को मतदान हो चुका है और आज को पूर्वाह्न 11 बजे यहां संसद भवन में मतगणना शुरू होगी. सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की ओर से द्रौपदी मुर्मू जबकि विपक्ष की तरफ से यशवंत सिन्हा उम्मीदवार हैं. मुर्मू की जीत की काफी संभावना जताई जा रही है. यदि वह जीत हासिल करती हैं, तो देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बन जाएंगी.
मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :
देश के वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो जाएगा और 25 जुलाई को नए राष्ट्रपति शपथ लेंगे. सभी राज्यों से मतपत्र संसद भवन लाए जा चुके हैं.
चुनाव अधिकारी संसद के कमरा संख्या 63 में मतगणना के लिए तैयार हैं. इस कक्ष में मतपत्रों की चौबीस घंटे कड़ी सुरक्षा की जा रही है.
चुनाव के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी राज्य सभा के सचिव जनरल पीसी मोदी बृहस्पतिवार को मतगणना की निगरानी करेंगे. शाम तक चुनाव परिणाम घोषित किए जाने की संभावना है.
मोदी पहले सांसदों के सभी मतों की गिनती के बाद चुनावी रुझानों के बारे में जानकारी देंगे और फिर 10 राज्यों के वोटों की वर्णानुक्रम में गिनती के बाद फिर से जानकारी साझा करेंगे.
गौरतलब है कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए संसद भवन समेत 31 स्थानों और विधानसभाओं के भीतर 30 केंद्रों पर सोमवार को पूर्वाह्न 10 बजे से शाम पांच बजे के बीच मतदान हुआ था. कई राज्यों में मुर्मू के पक्ष में 'क्रॉस वोटिंग' होने की खबरें भी आई थीं. राष्ट्रपति चुनाव में सदस्यों को व्हिप जारी नहीं किया जाता.
मनोनीत सांसदों को छोड़कर संसद के दोनों सदनों लोकसभा व राज्य सभा के सदस्य और सभी राज्यों की विधानसभा के सदस्य राष्ट्रपति चुनाव में मतदान करते हैं.
राष्ट्रपति चुनाव में 776 सांसदों और 4,033 निर्वाचित विधायकों समेत कुल 4,809 मतदाता मतदान के पात्र थे. इसमें मनोनीत सांसद व विधायक और विधान परिषद के सदस्य मतदान नहीं कर सकते. निर्वाचन आयोग के अनुसार सोमवार को हुए मतदान के दौरान 99 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने अपना वोट डाला.
भारतीय जनता पार्टी के सांसद सनी देओल और संजय धोत्रे समेत आठ सांसद मतदान नहीं कर पाए. देओल मतदान के दौरान इलाज के लिए विदेश गए हुए हैं जबकि धोत्रे आईसीयू में भर्ती हैं.
सोमवार को भाजपा और शिवसेना के दो-दो, बहुजन समाज पार्टी, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और एआईएमआईएम के एक-एक विधायक ने मतदान नहीं किया.
कोविंद ने वर्ष 2017 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में कुल 10,69,358 में से 7,02,044 वोट पाकर जीत हासिल की थी. उनकी प्रतिद्वंद्वी मीरा कुमार को केवल 3,67,314 वोट मिले थे.