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फेयरबैंक्स (अमेरिका)। अमेरिका के अलास्का में कोरोनावायरस (Coronavirus) टीके से गंभीर प्रतिकूल असर पड़ने का दूसरा मामला सामने आया है। दोनों ही प्रभावित स्वास्थ्यकर्मी हैं।
हालिया मामले में एक महिला चिकित्साकर्मी को गुरुवार को फेयरबैंक्स में टीका लगा और इसके 10 मिनट बाद ही प्रतिकूल असर दिखाई देने लगा। उनमें ‘एनाफिलेक्टिक’ लक्षण सामने आए, इसमें जीभ का सूज जाना, कर्कश आवाज और सांस लेने में परेशानी जैसी दिक्कतें शामिल हैं।
महिला को फेयरबैंक्स मेमोरियल अस्पताल के आपात विभाग में एपीनेफरीन की दो खुराक दी गई और छह घंटे के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर एंजलिक रमीरेज ने एक बयान में कहा, हालांकि एलर्जी संबंधी प्रतिक्रियाएं असामान्य हैं यद्यपि यह दवाई लेने या टीके की खुराक से ऐसा हो सकता है
उन्होंने कहा, इसलिए हमारे कर्मचारी एनाफिलेक्सिस से संबंधित लक्षणों का इलाज करने के लिए प्रशिक्षित हैं। हमारे कर्मचारियों के स्वास्थ्य में सुधार है और उन्हें कल घर भेज दिया गया था।अस्पताल की मातृ कंपनी फाउंडेशन हेल्थ पार्टनर्स ने कहा कि महिला अपनी पहचान नहीं जाहिर करना चाहती थीं लेकिन उन्होंने एक बयान जारी किया है।
इसमें उन्होंने कहा है कि वे टीका लेने के लिए लोगों को प्रेरित करेंगी। उनका कहना है कि एक डॉक्टर होने के नाते उन्होंने कोविड-19 से पीड़ित लोगों का दर्द और मौतें देखी हैं और उसके मुकाबले उन्हें हुई एलर्जी बेहद कमतर है।
इससे पहले मंगलवार को काउंटी के बार्टलेट रीजनल अस्पताल में टीके से गंभीर प्रतिकूल असर का मामला सामने आया था। महिला स्वास्थ्यकर्मी को एनाफिलेक्सिस से पीड़ित होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
इसी अस्पताल के एक और कर्मचारी में अगले दिन प्रतिकूल असर देखे गए लेकिन स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि यह आंशिक प्रतिक्रिया है और व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती किए जाने की जरूरत नहीं है।
अमेरिका के अपोलो और सोवियत संघ के लूना चंद्र अभियानों के बाद पहली बार कोई देश चांद की सतह से नमूने लेकर आया है. इन नमूनों से पृथ्वी के इस उपग्रह की सतह और उसके अतीत के बारे में नई जानकारियाँ मिल सकेंगी. चांग ई-5 यान स्थानीय समयानुसार गुरुवार रात क़रीब डेढ़ बजे मंगोलिया के भीतरी इलाक़े में उतरा. अंतरिक्ष में लगातार अपनी क्षमता बढ़ाता जा रहा चीन इस मिशन की कामयाबी को एक बड़ी उपलब्धि मान रहा है.
पिछले सात वर्षों में चेंग-5 मिशन चीन का तीसरा सफल चंद्र अभियान रहा है. अमेरिकी अपोलो अंतरिक्षयान से चांद पर गए अंतरिक्षयात्रियों और सोवियत रूस के रोबोटिक लूना मिशन ने चांद की सतह से क़रीब 400 किलो तक मिट्टी और पत्थर जमा किए थे. चांद से लाए ये सभी नमूने क़रीब तीन अरब साल पुराने हैं.

चांग ई-5 मिशन
चांग ई-5 को 24 नवंबर को दक्षिणी चीन के वेनचांग स्टेशन से एक अंतरिक्षयान के ज़रिए छोड़ा गया था. पहले ये मिशन चांद के ऊपर पहुंचा और इसने खुद को चांद की कक्षा में स्थापित किया और चांद के चक्कर लगाने लगा. बाद में ये दो टुकड़ों में बंट गया - पहला सर्विस व्हीकल और रिटर्न मॉड्यूल जो चांद की कक्षा में ही रुका रहा और दूसरा मून लैंडर जो धीरे-धीरे चांद की सतह की तरफ बढ़ने लगा. 8.2-टन के इस यान ने 1 दिसंबर को चांद की सतह पर निर्धारित जगह के क़रीब सॉफ्ट लैंडिंग की.

यान चंद्रमा की सतह पर दो दिन रहा
इस मिशन को मॉन्स रूमकेर में उतारा गया जो चांद की ज्वालामुखी वाली पहाड़ियों के पास मौजूद एक जगह है. लैंडिंग के कुछ दिनों बाद यान ने चांद की सतह से पहली रंगीन तस्वीर भेजीं. इसने चांद की सतह पर अपने पैर के पास ले लेकर क्षितिज तक की तस्वीर ली. चांद की सतह के मिट्टी और पत्थरों के नमूनों को इकट्ठा करने के लिए चांग ई-5 के लैंडर में कैमरा, रडार, एक ड्रिल और स्पेक्ट्रोमीटर फिट किया गया था. ये लैंडर क़रीब दो किलो तक के वज़न के पत्थर और मिट्टी इकट्ठा कर सकता था. इकट्ठा नमूनों को ये एक ऑर्बिटिंग मिशन तक पहुंचागा जो इसे आगे पृथ्वी पर भेजेगा.

कैप्सूल से लाए गए नमूनों को एक विशेष लेबोरेटरी में भेजा जाएगा
2013 में चांग ई-3 और 2019 में चांग ई-4 मून मिशन. इन दोनों में ही एक लैंडर के साथ-साथ एक छोटा मून रोवर शामिल किया गया था. इन दोनों की तुलना में चांग ई-5 जटिल मिशन था.

चांग ई-5 मून लैंडर के पैर की तस्वीर
माना जा रहा है कि मॉन्स रूमकेर से लाए गए नमूनों की उम्र 1.2 से 1.3 अरब साल होगी, यानी वो पहले लाए गए नमूनों की अपेक्षा नए होंगे. जानकारों का मानना है कि इससे चांद के भूवैज्ञानिक इतिहास के बारे में अधिक जानकारी मिल सकेगी. इन नमूनों की मदद से वैज्ञानिकों को सटीक रूप से 'क्रोनोमीटर' तैयार करने में भी मदद मिलेगी जिससे सौर मंडल के ग्रहों के सतहों की उम्र को माना जाता है. ये किसी ग्रह या उपग्रह की सतह पर मौजूद ज्वालामुखी की संख्या पर निर्भर करता है.
वैज्ञानिकों के अनुसार जिस ग्रह की सतह पर अधिक ज्वालामुखी होंगे वो अधिक पुरानी होगी यानी उसकी उम्र अधिक होगी (इसके लिए वैज्ञानिक ज्वालामुखी के क्रेटर की संख्या की गिनती करते हैं). हालांकि इसके लिए अलग-अलग जगहों को देखा जाना ज़रूरी होता है.
अपोलो और लूना मिशन के भेजे गए नमूनों से 'क्रोनोमीटर' तैयार करने में वैज्ञानिकों को काफी मदद मिली थी.अब चांग ई-5 मिशन के भेजे नमूनों से उन्हें इसे और सटीक रूप से विकसित करने में मदद मिलेगी.
वॉशिंगटन। अमेरिका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति जो बिडेन और नवनिर्वाचित उप राष्ट्रपति कमला हैरिस के शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन करने वाली समिति ने लोगों से अपील की है कि वे कोरोनावायरस (Coronavirus) के मद्देनजर शपथ ग्रहण समारोह में शामिल न हों।
बिडेन की अपनी आयोजन समिति ने इससे पहले घोषणा की थी कि शपथ ग्रहण समारोह 20 जनवरी को कैपिटोल बिल्डिंग के बाहर आयोजित होगा। वहीं शपथ ग्रहण समारोह से संबंधित ज्वाइंट कांग्रेशनल कमेटी ने कहा है कि कोविड-19 से संबंधित एहतियातों की वजह से कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों की संख्या में बड़ी कमी की जाएगी।
शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के लिए आमतौर पर कांग्रेस के सदस्य और उनके क्षेत्रों के मतदाताओं के बीच 2 लाख टिकटों का वितरण होता है, लेकिन इस बार आयोजक सिर्फ करीब 1 हजार टिकटों का वितरण करेंगे यानी कांग्रेस के निर्वाचित 535 सदस्य और उनके साथ एक अतिथि ही शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा ले सकते हैं।
शपथ ग्रहण के लिए कांग्रेशनल कमेटी के साथ काम करने वाली नव निर्वाचित राष्ट्रपति की समिति ने भी समर्थकों से घर पर ही शपथ ग्रहण समारोह देखने की अपील की है।