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लंदन: प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने ब्रिटेन में लॉकडाउन लागू करने का ऐलान किया है. उन्होने सोमवार को कहा कि इंग्लैंड के लगभग 56 मिलियन लोग पूर्ण लॉकडाउन में वापस लौटेंगे. यह लॉकडाउन संभवतः फरवरी के मध्य तक लागू रहेगा ताकि तेजी से फैल रहे कोरोना के नए स्ट्रेन को रोका जा सके.अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि ये लॉकडाउन बुधवार से लागू हो जाएंगे. इसके तहत बुधवार से सभी स्कूल भी बंद हो जाएंगे. उनकी तरफ से यह घोषणा स्कॉटलैंड की तरफ से हुई घोषणा के बाद सामने आया है.
ब्रिटेन में कोरोनावायरस से सबसे अधिक मृत्यु दर के कारण आबादी की तीन-चौथाई लोग अर्थात 44 मिलियन, पहले से ही कठिन प्रतिबंधों को झेल रहे हैं.जॉनसन ने कहा कि सोमवार को कोविड से संक्रमित लगभग 27,000 लोग अस्पताल में थे जो पिछले साल अप्रैल में प्रकोप की पहली लहर के चरम से भी 40 प्रतिशत अधिक है.पिछले मंगलवार को 80,000 से अधिक लोग सिर्फ 24 घंटे में संक्रमित पाए गए थे.
उन्होंने कहा कि देश के अधिकांश हिस्से पहले से ही प्रतिबंधों में हैं, यह स्पष्ट है कि हमें इस नए संस्करण को नियंत्रण में लाने के लिए और अधिक मेहनत करने की जरूरत है.साथ ही उन्होंने कहा कि यह लॉकडाउन भी पिछले लॉकडाउन की तरह ही है. जैसा मार्च के अंत से लेकर पिछले साल के जून तक लगाया गया था.
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि लोग ज़रूरी कामों के लिए घर से बाहर निकल सकते हैं. जैसे- ज़रूरी सामान, ऑफ़िस जाने के लिए, अगर वर्क फ़्रॉम होम नहीं कर पा रहे हैं तो, एक्सरसाइज़, मेडिकल सहायता और घरेलू हिंसा से बचने के लिए बाहर निकल सकते हैं.
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की सर्वोच्च इस्लामिक संस्था यूएई फतवा काउंसिल ने कहा है कि अगर कोरोना वायरस की वैक्सीन में सुअर से बनने वाला जिलेटिन भी मौजूद हो तो भी मुसलमान उसका इस्तेमाल कर सकते हैं. अधिकतर वैक्सीन में पोर्क जिलेटिन होता है और इस वजह से कहा जा रहा था कि तमाम मुस्लिम धार्मिक मान्यताओं की वजह से कोरोना वैक्सीन से दूरी बना सकते हैं. इस्लाम में सुअर के मांस से बने उत्पादों का उपभोग करना हराम माना गया है.

न्यूज एजेंसी एसोसिएट प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, काउंसिल के चेयरमैन शेख अब्दुल्ला बिन बय्या ने कहा, अगर कोई और विकल्प नहीं है तो कोरोना की वैक्सीन को लेकर इस्लाम में सुअर को लेकर लगाए गए प्रतिबंध लागू नहीं होंगे. उन्होंने कहा कि मानव शरीर को सुरक्षित करने के लिए इसकी सख्त जरूरत है. काउंसिल ने कहा कि वैक्सीन के मामले में पोर्क जिलेटिन मेडिसिन की कैटिगरी में आता है ना कि खाने की श्रेणी में. कोरोना वायरस पूरे समाज के लिए ही बहुत बड़ा खतरा बनकर आया है, ऐसे में वैक्सीन बेहद जरूरी है.

कई मुस्लिम देशों में कोरोना की वैक्सीन को लेकर ऐसी चिंताएं जाहिर की जा रही हैं. अक्टूबर महीने में इंडोनेशिया के कुछ डिप्लोमैट और मुस्लिम स्कॉलर्स चीन में एक प्लेन से अचानक उतर गए. मुस्लिम स्कॉलर्स की चिंता थी कि इस्लामिक कानून के तहत कोरोना की वैक्सीन लगवाने की इजाजत नहीं है.

पोर्क से मिलने वाला जिलेटिन का इस्तेमाल वैक्सीन को स्टोरेज और एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के दौरान सुरक्षित और प्रभावी रखने के लिए किया जाता है. सऊदी अरब और मलेशिया की एजे फार्मा बिना जिलेटिन वाली वैक्सीन पर काम भी कर रही हैं. फाइजर, मॉडर्ना और एस्ट्राजेनेका ने कहा है कि उनकी कोरोना वैक्सीन में पोर्क उत्पादों का इस्तेमाल नहीं किया गया है. हालांकि, वैक्सीन की सीमित उपलब्धता के चलते कई मुस्लिम देश जिलेटिन वाली वैक्सीन का इस्तेमाल करेंगे.

हालांकि, दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया को लेकर चिंता जाहिर की जा रही है. साल 2018 में, इंडोनेशिया उलेमा काउंसिल ने कहा था कि चेचक और रूबेला वैक्सीन में जिलेटिन मौजूद है इसलिए ये हराम हैं. धार्मिक नेताओं ने इसके बाद अभिभावकों से बच्चों को वैक्सीन ना लगाने की अपील करनी शुरू कर दी थी. हालांकि, काउंसिल ने बाद में वैक्सीन लगवाने की इजाजत दे दी थी. लेकिन टैबू के चलते वैक्सीनेशन रेट काफी कम रही. इंडोनेशिया की सरकार ने कहा है कि कोरोना वैक्सीन की खरीदारी में वह मुस्लिम संगठनों को भी शामिल करेगी ताकि वैक्सीनेशन की प्रक्रिया में बाद में कोई समस्या ना हो.

यहूदियों में भी पोर्क खाने पर प्रतिबंध है लेकिन ये केवल प्राकृतिक रूप से सेवन को लेकर है. कुछ संगठनों का कहना है कि अगर आपके शरीर में इसे इंजेक्ट किया जाता है तो फिर इसमें कोई समस्या नहीं है, खासकर जब ये कोरोना जैसी महामारी के नियंत्रण को लेकर है.
स्टोरी हाइलाइट्स
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिनों में अमेरिका में रह रहे भारतीय कामगारों को झटका दिया है. ट्रंप ने ग्रीन कार्ड और वर्क वीजा पर पहले से जारी प्रतिबंधों को 31 मार्च तक के लिए बढ़ा दिया है. गुरुवार को प्रेसिडेंट ट्रंप ने इससे संबंधित एक आदेश पर अपने हस्ताक्षर कर दिए.
राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने आदेश में कहा है कि संयुक्त राज्य अमेरिका के श्रम बाजार और अमेरिकी जनता के स्वास्थ्य पर कोरोना का प्रभाव व्यापक स्तर पर चल रहा है. ट्रप के आदेश में बेरोजगारी की दर, राज्यों द्वारा जारी व्यवसायों पर महामारी संबंधी प्रतिबंध और पिछले साल की मध्य अवधि से कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ने का हवाला भी दिया गया है.
ट्रम्प ने कहा है कि यह उद्घोषणा 31 मार्च, 2021 को समाप्त होगी, और आवश्यकतानुसार इसे जारी भी रखा जा सकता है. इसका आशय यह है ग्रीन कार्ड और वर्ज वीजा पर प्रतिबंध खत्म होने की गुंजाइश कोरोना संक्रमण पर निर्भर करेगा.
बता दें कि अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बिडेन 20 जनवरी को पदभार ग्रहण करने वाले हैं. इसके बाद उन्होंने ट्रंप के कई फैसलों को बदलने की घोषणा की है, हालांकि इस फैसले पर उनकी क्या प्रतिक्रिया होगी ये अभी जाहिर नहीं है. हालांकि बाइडेन ने इन प्रतिबंधों की आलोचना की है. लेकिन इसकी प्रतिक्रिया में वे ट्रंप के फैसले को कितना बदलेंगे ये स्पष्ट नहीं है.
बता दें कि अप्रैल में ट्रंप ने ग्रीन कार्ड धारकों पर प्रतिबंध की घोषणा कर दी थी. जून में ट्रंप ने H-1B वीजा पर भी प्रतिबंध लगाया था. इस प्रतिबंध का असर अमेरिका में सूचना तकनीक के क्षेत्र में काम करने वाले भारतीयों पर पड़ा है.