Owner/Director : Anita Khare
Contact No. : 9009991052
Sampadak : Shashank Khare
Contact No. : 7987354738
Raipur C.G. 492007
City Office : In Front of Raj Talkies, Block B1, 2nd Floor, Bombey Market GE Road, Raipur C.G. 492001
वाशिंगटन: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कोरोनावायरस महामारी और इसके आर्थिक परिणामों से निपटने के लिए भारत द्वारा उठाए गए निर्णायक कदमों की सराहना की है और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए इस साल और अधिक प्रयास करने के लिए कहा है.
आईएमएफ की प्रबंध निदेशक ने गुरुवार को एक वैश्विक मीडिया राउंडटेबल डिस्कशन के दौरान आगामी वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में भारत के लिए कम खराब दृष्टिकोण की भविष्यवाणी की और कहा कि ऐसा भारत द्वारा उठाए गए आर्थिक सुधार के कदमों के कारण है.
IMF प्रमुख ने कहा, “जब मैंने सभी को 26 जनवरी तक स्थिति बरकरार रखने का आह्वान किया, जो भारत के लिए बहुत मायने रखता है. आपको हमारे अपडेट में एक तस्वीर दिखाई देगी जो कम खराब है. क्यों? क्योंकि इस देश ने वास्तव में महामारी से निपटने के लिए और इसके आर्थिक परिणामों से निपटने के लिए बहुत ही निर्णायक कदम उठाए हैं.
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष 26 जनवरी को अपना विश्व आर्थिक अपडेट रिपोर्ट जारी करने वाला है. भारत के बारे में बात करते हुए, उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी आबादी के लिए लॉकडाउन लागू करना बेहद नाटकीय था, जहां लोग एक साथ इतने करीब से जुड़े थे.
उन्होंने कहा, "सरकार ने मौद्रिक नीति और राजकोषीय नीति के लिए जो किया है वह सराहनीय है. यह वास्तव में उभरते बाजारों के लिए औसत से थोड़ा अधिक है. उभरते बाजारों ने औसतन जीडीपी का छह प्रतिशत योगदान दिया है. भारत में, यह थोड़ा ऊपर है. यह भारत के लिए अच्छा है और वहां अभी भी बेहतर करने की गुंजाइश है- CHECK - यदि आप अधिक कर सकते हैं, तो कृपया जरूर करें."
बीते हफ़्ते कैपिटल बिल्डिंग की हिंसा में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के किरदार को लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी संसद में थोड़ी देर पहले उनके ख़िलाफ़ दो महाभियोग प्रस्ताव पेश किये हैं.
इसमें ट्रंप पर विद्रोह को भड़काने का आरोप लगाया गया है और दावा किया गया है कि अमेरिकी संसद में हिंसा को ट्रंप ने सक्रिय रूप से प्रोत्साहित किया. सीनेट की स्पीकर नैंसी पेलोसी सहित उनकी डेमोक्रेटिक पार्टी के कई दूसरे नेता राष्ट्रपति ट्रंप को इससे पहले व्हाइट हाउस से बाहर करना चाहते हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप को सत्ता से हटाने का एक तरीक़ा महाभियोग का इस्तेमाल है, जिस पर सीनेट की स्पीकर नैंसी पेलोसी का ज़ोर अधिक है. डेमोक्रेट बुधवार को अमरीकी संसद में हमले और इसके अंदर ज़बरदस्ती घुसने वाले दंगाइयों को कथित रूप से उकसाने पर राष्ट्रपति के विरोध में महाभियोग या 25वें संशोधन के इस्तेमाल से उन्हें उनके पद से हटाना चाहते हैं.
महाभियोग कैसे होगा?
क्या राष्ट्रपति ट्रंप इतिहास में दो बार महाभियोग के दायरे में आने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति हो सकते हैं? अमेरिकी कांग्रेस के निचले सदन हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्ज़ में डेमोक्रेटिक पार्टी को बहुमत हासिल है. पार्टी के सदस्य इसी पर काम कर रहे हैं. जो दो महाभियोग प्रस्ताव पेश किए गए हैं उनमें से एक डेमोक्रेटिक पार्टी की सदस्य इलहान उमर द्वारा तैयार किया गया है. तो दूसरा इसी पार्टी के जेमी रस्किन ने तैयार किया है.
अगर हाउस में वोट हुआ तो?
राष्ट्रपति को हाउस में महाभियोग करने के लिए बहुमत चाहिए. हाउस में बहुमत डेमोक्रेटिक पार्टी को हासिल है. इस लिए इसमें कोई बाधा नहीं होनी चाहिए. ऐसा संभव है कि ट्रंप की रिपब्लिक पार्टी के कुछ सदस्य भी इस मोशन के पक्ष में वोट दें.
पिछली बार जब राष्ट्रपति ट्रंप को महाभियोग का सामना करना पड़ा था तो पूरी प्रक्रिया में महीनों का समय लग गया था. इस बार समय कुछ दिनों का है, बल्कि इसी हफ्ते करना होगा. अब जबकि प्रस्ताव पेश किया जा चुका है, लिहाजा जल्द ही इस पर चर्चा और वोटिंग की उम्मीद है.
सीनेट का दो तिहाई बहुमत ज़रूरी
अमेरिकी संविधान के मुताबिक़ सीनेट को राष्ट्रपति को उनके पद से हटाने के लिए मुक़दमा चलाने और दोषी ठहराने के लिए वोटिंग कराना आवश्यक है. और राष्ट्रपति दोषी ठहराने के लिए और उन्हें उनके पद से हटाने के लिए दो-तिहाई सीनेटरों की सहमति ज़रूरी होगी.
इसका मतलब ये हुआ कि रिपब्लिकन पार्टी के सदस्यों की अच्छी खासी संख्या को राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ वोट देने की ज़रूरत पड़ेगी. इस समय सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी को बहुमत हासिल है लेकिन केवल दो सीटें की. सवाल ये है कि क्या रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर्स राष्ट्रपति ट्रंप के ख़िलाफ़ वोट देंगे? फ़िलहाल इसकी उम्मीद कम है.
ट्रंप के ख़िलाफ़ वोट
राष्ट्रपति ट्रंप के सहयोगी और रिपब्लिकन पार्टी के एक अहम नेता सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने राष्ट्रपति से नाता तोड़ लिया है. लेकिन इसके बावजूद उनका कहना है कि वो उन्हें पद से हटाने का समर्थन नहीं करेंगे. साल 2012 में राष्ट्रपति चुनाव के हारे उम्मीदवार सीनेटर मिट रोमनी पिछली बार रिपब्लिकन पार्टी के ऐसे अकेले सदस्य थे जिन्होंने ट्रंप के ख़िलाफ़ वोट दिया था.
लेकिन इस बार उनका कहना है कि महाभियोग से कोई फ़ायदा नहीं क्योंकि समय बहुत कम है. लेकिन एक ओर उनकी पार्टी के ही एक और सीनेटर ने कहा है कि वो ट्रंप के ख़िलाफ़ वोट देंगे. हकीक़त तो ये है कि रिपब्लिकन पार्टी के अधिकतर सीनेटर्स ने अब तक अपनी राय सामने नहीं रखी है.
शिकागो यूनिवर्सिटी में अमेरिकी कानून और संविधान के विशेषज्ञ डॉक्टर इब्राहिम गिंसबर्ग बीबीसी से एक बातचीत में कहते हैं, "इसका मतलब ये है कि महाभियोग पिछली बार की तरह ही नाकाम हो सकता है. पिछली बार की तुलना में इस बार ट्रंप के ख़िलाफ़ कुछ रिपब्लिकन सिनेटर्स खुलकर सामने आए हैं लेकिन अधिकतर लोग उनके ख़िलाफ़ अब भी जाने को तैयार नहीं हैं."
पद से हटने के बाद भी ट्रंप पर शामत आ सकती है
प्रोफ़ेसर गिंसबर्ग के अनुसार संविधान के हिसाब से ट्रंप के राष्ट्रपति पद से हटने के बाद भी उन्हें महाभियोग के लिए दोषी ठहराया जा सकता है और उन्हें राष्ट्रपति के पद के लिए चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है. जब बाइडन शपथ लेंगे तो डेमोक्रेट सीनेटर्स सीनेट में बहुमत में होंगे. उस समय ये काम शायद थोड़ा आसान हो.
लेकिन प्रो गिंसबर्ग पूछते हैं कि बाइडन सीनेट में ट्रायल आयोजित करवाना पसंद करेंगे या अपने चुनावी वादों पर अमल करना?
वो कहते हैं कि महामारी से लड़ना उनकी प्राथमिकता होगी.
दूसरी तरफ़, सीनेट में बहुमत हासिल करने के बाद भी, डेमोक्रेटिक पार्टी को कम से कम 16 रिपब्लिकन सीनेटर्स का समर्थन चाहिए. क्या ये हो सकता है? इस समय ये कहना मुश्किल है.
25वाँ संशोधन
लेकिन स्पीकर नैंसी पेलोसी की कोशिश होगी कि महाभियोग तक नौबत ही न पहुंचे और उपराष्ट्रपति माइक पेंस 25वाँ संशोधन का इस्तेमाल करके ट्रंप को 20 जनवरी से पहले उन्हें उनके पद से हटा दें और खुद कार्यवाहक राष्ट्रपति बन जाएँ.
स्पीकर पेलोसी और सीनेट और डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ नेता चक शूमर ने उपराष्ट्रपति माइक पेंस और ट्रंप की कैबिनेट से आग्रह किया है कि राष्ट्रपति को 'विद्रोह के लिए उकसाने' के लिए उनके पद से हटाया जाए. ऐसा करने के लिए माइक पेंस को 25वें संशोधन का इस्तेमाल करना होगा.
25वाँ संशोधन उपराष्ट्रपति को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनने की उस समय अनुमति देता है जब एक राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों को जारी रखने में असमर्थ होता है, जब वो शारीरिक या मानसिक बीमारी के कारण अपने काम से असमर्थ हो जाता है. लेकिन इसके लिए उपराष्ट्रपति पेंस और कम से कम आठ कैबिनेट सदस्यों की रज़ामंदी की ज़रूरत होगी, जिसकी फ़िलहाल संभावना कम है.
प्रोफ़ेसर गिंसबर्ग के अनुसार डेमोक्रेटिक पार्टी की इस बात का ख्याल रखना पड़ेगा कि सार्वजनिक रूप से ट्रंप के समर्थकों और अमेरिकी नागरिकों को ऐसा न लगे कि सब राष्ट्रपति के पीछे पड़े हैं. वे कहते हैं, "अगर ऐसा हुआ तो ट्रंप के प्रति हमदर्दी बढ़ सकती है जिसका फायदा वो अगले चुनाव में उठाना चाहेंगे."
Twitter permanently suspends outgoing US President Donald Trump's account "due to the risk of further incitement of violence". pic.twitter.com/zEC7STxQjs
— ANI (@ANI) January 8, 2021
अमेरिका में डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों पार्टियों के सांसद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हटाने की मांग कर रहे हैं। प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी ने कहा कि अगर ट्रंप को नहीं हटाया गया तो प्रतिनिधि सभा उनके खिलाफ दूसरा महाभियोग प्रस्ताव लाने पर विचार करेगी।
ट्रंप का कार्यकाल पूरा होने में 2 सप्ताह से भी कम समय रह गया है, फिर भी सांसद और यहां तक कि उनके प्रशासन के कुछ लोग भी बुधवार की हिंसा को लेकर यह चर्चा कर रहे हैं, क्योंकि पहले तो ट्रंप ने यूएस कैपिटोल (अमेरिकी संसद भवन) में अपने समर्थकों के हिंसक हंगामे की निंदा करने से इंकार किया और बाद में इस पर सफाई देते दिखे।
नई दिल्ली: अमेरिका में कैपिटॉल परिसर के बाहर निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसके बाद परिसर को ‘‘लॉकडाउन'' (प्रवेश एवं निकास बंद) कर दिया गया. कैपिटल के भीतर यह घोषणा की गई कि ‘‘बाहरी सुरक्षा खतरे'' के कारण कोई व्यक्ति कैपिटॉल परिसर से बाहर या उसके भीतर नहीं जा सकता. जब नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन की जीत को प्रमाणित करने के लिए सांसद संसद के संयुक्त सत्र के लिए कैपिटॉल के भीतर बैठे थे, तभी यूएस (अमेरिका) कैपिटॉल पुलिस ने इसके भीतर सुरक्षा के उल्लंघन की घोषणा की. पुलिस के साथ झड़प में अब तक चार लोगों की मौत होने की खबर है.
कैपिटॉल के बाहर पुलिस और ट्रंप समर्थकों के बीच झड़प हुई. प्रदर्शनकारियों ने कैपिटॉल की सीढ़ियों के नीचे लगे अवरोधक तोड़ दिए. कैपिटल पुलिस ने बताया कि इलाके में एक संदिग्ध पैकेट भी मिला है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संसद का संयुक्त सत्र शुरू होने से ठीक पहले कहा कि वह चुनाव में हार को स्वीकार नहीं करेंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें धांधली हुई है और यह धांधली उनके डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी जो बाइडन के लिए की गई, जो नवनिर्वाचित राष्ट्रपति हैं. ट्रंप ने वाशिंगटन डीसी में अपने हजारों समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा , ‘‘जब धांधली हुई हो तब आपको अपनी हार स्वीकार नहीं करनी चाहिए. '' ट्रंप ने एक घंटे से अधिक के अपने भाषण में दावा किया कि उन्होंने इस चुनाव में शानदार जीत हासिल की है.
कांग्रेस के ज्वाइंट सेशन में एलेक्टोरल वोट्स की गिनती शुरू हो रही है जिसकी अध्यक्षता उप राष्ट्रपति माइक पेंस (Mike Pence) कर रहे हैं.उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने संविधान का हवाला देते हुए वोट काउंटिंग में दखल देने से मना किया है राष्ट्रपति ने अपने उप राष्ट्रपति पर इसके लिए बहुत दबाव बनाया था.
वोटोें की गिनती के बाद जो जीतेगा उसके नाम की अधिकारिक घोषणा कि जाएगी चुनाव नतीजों में बाइडन का जीतना सुनिश्चित हो चुका है.लेकिन क्यूंकि लगभग एक दर्जन सांसदों ने कहा है कि वह विरोध करेंगे इसलिए वह लोग लिखित में अपना विरोध देंगे.दो घंटे उनके विरोध पर चर्चा की जाएगी. बताते चले कि बाइडन चुनाव जीत चुके हैं लेकिन ट्रंप लगातार अड़ंगा लगाने की कोशिश में हैं. उन्होेंने ‘लिबरल' डेमोक्रेट्स सांसदों से भी चुनाव नतीजा पलटने में साथ देने की अपील कर रहे हैं जबकि कई वरिष्ठ रिपब्लिकन सीनेटर भी ट्रंप की कोशिशों को ग़लत और हठधर्मिता बता चुके हैं.
गौरतलब है कि ट्रम्प व्हाइट हाउस न छोड़ने की धमकी भी दे चुके हैं. 20 जनवरी को बाइडन की शपथ होगी और ट्रम्प को व्हाइट हाउस छोड़ना होगा नहीं तो फिर नए राष्ट्रपति बायडन को आदेश देना पड़ेगा और ट्रम्प से व्हाइट हाउस ख़ाली कराने की नौबत आ जाएगी.