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ढाका: बांग्लादेश में हिंदुओंके 66 मकानों में तोड़फोड़ की गई और कम से कम 20 घरों को जला दिया गया. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश में पिछले हफ्ते दुर्गा पूजा के दौरान मंदिरों में तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद एक कथित ईशनिंदा वाली मीडिया पोस्ट को लेकर एक बार फिर हिंसा भड़क उठी. बीडीन्यूज24 डॉट कॉम की रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी ढाका से करीब 255 किलोमीटर दूर एक गांव में रविवार देर रात हमला हुआ.
जिले के पुलिस अधीक्षक मोहम्मद कमरुज्जमां के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि गांव के एक युवा हिंदू व्यक्ति की एक फेसबुक पोस्ट में 'धर्म का अपमान' करने की अफवाह को लेकर तनाव बढ़ने पर पुलिस मछुआरों की एक कॉलोनी में पहुंची. रिपोर्ट में कहा गया कि पुलिस उस व्यक्ति के घर के चारों ओर पहरा दे रही थी, हमलावरों ने आसपास के अन्य घरों में आग लगा दी.
दमकल सेवा नियंत्रण कक्ष ने कहा कि घटनास्थल से उनकी रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि माझीपारा में 29 आवासीय घरों, दो रसोई, दो खलिहान और 15 अलग-अलग लोगों के 20 घास के ढेरों को आग के हवाले कर दिया गया.
रिपोर्ट में कहा गया है कि दमकल सेवा को रात 8ः45 बजे आग लगने की सूचना मिली और सुबह 4ः10 बजे आग पर काबू पा लिया गया. मरने वालों के बारे में तत्काल कोई रिपोर्ट नहीं थी.
आगजनी ऐसे समय में हुई है जब बांग्लादेश के चटगांव डिवीजन के कुमिला में एक दुर्गा पूजा स्थल पर ईशनिंदा की कथित घटना के बाद सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया है, जिसके कारण हिंदू मंदिरों पर हमले हुए और कमिला, चांदपुर, चट्टोग्राम, कॉक्स बाजार, बंदरबन, मौलवी बाजार, गाजीपुर, चपैनवाबगंज, फेनी और अन्य जिलों में में तोड़फोड़ और पुलिस के साथ झड़प हुईं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर हमलों और सांप्रदायिक नफरत फैलाने के आरोप में दर्जनों को गिरफ्तार किया गया है.
नई दिल्ली: पाकिस्तान की अफगानिस्तान में तालिबानको मोहरा बनाकर भारत को घेरने की चाल एक बार फिर नाकाम हो गई. खबरों के मुताबिक, पाकिस्तान चाहता था कि तालिबान की नई सरकार (Taliban ) को दक्षिण एशियाई देशों के संगठन सार्क (SAARC Meet) में शामिल कराया जाए ताकि उसे सहयोगी मिल सके, लेकिन उसे मुंह की खानी पड़ी. सूत्रों का कहना है कि भारत ही नहीं कई अन्य देशों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया और आखिरकार यह बैठक ही कैंसल कर दी गई. तालिबान की नई सरकार को ज्यादातर देशों ने मान्यता नहीं दी है.
खबरों के अनुसार, सार्क की यह बैठक न्यूयॉर्क में शनिवार को प्रस्तावित थी, जिसे अब रद्द कर दिया गया है. विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान ने चालबाजी करते हुए बैठक में तालिबान को भी प्रतिनिधित्व देने की मांग उठा दी. भारत औऱ सार्क के कई अन्य सदस्य देशों ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई. ऐसे में कोई सहमति न बन पाने के बाद यह मीटिंग ही रद्द कर दी गई.
ऐसा कहा जाता है कि ज्यादातर देश इस बात पर राजी थी कि अफगानिस्तान की कुर्सी मीटिंग के दौरान खाली रखी जाए, लेकिन पाकिस्तान अड़ा रहा, जिसके बाद मीटिंग ही रद्द कर दी गई. नेपाल को सार्क की इस बैठक की अध्यक्षता करनी थी. यह बैठक संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) के दौरान ही सालाना तौर पर आयोजित की जाती है. दरअसल, तालिबान को अभी तक भारत ने मान्यता नहीं दी है
दुनिया के ज्यादातर देशों ने भी अभी तक उसे स्वीकार नहीं किया है. तालिबान की नई सरकार में कई यूएन द्वारा घोषित आतंकी शामिल हैं. अमीर खान मुत्ताकी तालिबान की मौजूदा सरकार में कार्यवाहक विदेश मंत्री हैं, लेकिन यूएन और उससे जुड़ी बैठकों मे उनके भाग लेने की कोई संभावना नहीं है.
पिछले महीने शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी तालिबान के प्रति कड़े रुख का इजहार किया था. उन्होंने एससीओ मीट ((SCO meet) में कहा था कि नई सरकार समावेशी नहीं है और अफगानिस्तान में नई सरकार को मान्यता देने के पहले दुनिया भर को इस बारे में सोचना चाहिए.
पीएम मोदी ने याद दिलाया था कि नई सरकार में महिलाओं और अल्पसंख्यकों को कोई भी स्थान नहीं दिया गया है. सार्क में भारत के अलावा बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका सदस्य देश हैं.
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने सोमवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 76वें सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण दुनियाभर के नेताओं के बीच सबसे बहुप्रतीक्षित स्पीच में से एक है. संयुक्त राष्ट्र महासभा में पीएम मोदी के एजेंडे में कौन-कैसे मुद्दे होंगे इस पर तिरुमूर्ति ने न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा, "पीएम मोदी का भाषण दुनिया के नेताओं में सबसे बहुप्रतीक्षित है. उन्होंने (प्रधानमंत्री मोदी ने) हमेशा दुनिया के सामने कुछ प्रमुख मुद्दों को उठाया है, जो मुद्दे हमारे लिए महत्वपूर्ण और चिंता का विषय हैं. साथ ही घरेलू मोर्चे पर भारत कुछ उपलब्धियों को रेखांकित किया है."
तिरुमूर्ति ने कहा कि 76वें सत्र में कोविड-19 महामारी और अफगानिस्तान का मुद्दा हावी रहने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी और इसके मानवीय प्रभाव के अलावा बैठक में वैश्विक आर्थिक नरमी, विकास के लिए वित्तपोषण, आतंकवाद और उससे जुड़े मुद्दे, जलवायु परिवर्तन, अफगानिस्तान समेत वैश्विक स्तर पर चल रहे संघर्षों का मुद्दा हावी रहने की संभावना है.
महत्वपूर्ण समय में भारत के UNGA को संबोधित करने महत्व के बारे में तिरुमूर्ति ने कहा, "भारत विकासशील दुनिया के लिए अग्रणी आवाज होने के साथ-साथ सुरक्षा परिषद का सदस्य होने के नाते वैश्विक मुद्दों को उठाने के लिए अपनी आवाज का इस्तेमाल करेगा. इनमें जलवायु परिवर्तन, सतत विकास लक्ष्य, टीकों के लिए न्यायसंगत और किफायती पहुंच, गरीबी उन्मूलन एवं आर्थिक सुधार, महिला सशक्तिकरण और सरकारी संरचनाओं में उनकी भागीदारी, आतंकवाद का मुकाबला, शांति स्थापना एवं शांति निर्माण, यूएनएससी सुधार आदि शामिल हैं."
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सप्ताह अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान क्वाड समूह के नेताओं के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. इसके बाद 25 सितंबर को वे न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 76वें सत्र के एक उच्च स्तरीय खंड को भी संबोधित करेंगे.