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नई दिल्ली: अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी ने देश छोड़ दिया था. उन्हें संयुक्त अरब अमीरात शरण दी है. संयुक्त अरब अमीरात ने बुधवार को कहा कि वह तालिबान के अधिग्रहण के बीच अफगानिस्तान से भागे राष्ट्रपति अशरफ गनी की "मानवीय आधार पर" मेजबानी कर रहा है. यूएई द्वारा एक संक्षिप्त बयान में कहा गया, "यूएई विदेश मामलों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्रालय इस बात की पुष्टि कर सकता है कि यूएई ने राष्ट्रपति अशरफ गनी और उनके परिवार का मानवीय आधार पर देश में स्वागत किया है."
तालिबान के कब्जे के बाद काबुल के बंद होने से पहले गनी रविवार को अफगानिस्तान से भाग निकल थे. तालिबानी विद्रोही अफगान की राजधानी में निर्विरोध बढ़ते चले गए थे. एक फेसबुक पोस्ट में अशरफ गनी ने कहा था कि "तालिबान जीत गया" और उन्हें "रक्तपात की बाढ़" को रोकने के लिए अफगानिस्तान को छोड़ना पड़ा.
बुधवार तक अशरफ गनी के ठिकाने की कोई खबर नहीं थी. अटकलें लगाई जा रही थी कि वह ताजिक्टन, उज्बेजिस्तान या ओमान भाग गए हैं.
यह पहली बार नहीं होगा जब तेल समृद्ध खाड़ी देश ने पूर्व नेताओं और उनके रिश्तेदारों के लिए अपनी बाहें खोली हैं, जो अब उनके देश में व्यक्तित्वहीन हैं. 2017 में, दुबई के अमीरात ने थाईलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री यिंगलक शिनावात्रा की मेजबानी की, जिन्हें अनुपस्थिति में पांच साल जेल की सजा सुनाई गई थी.
स्पेन के राजा जुआन कार्लोस पिछले साल अगस्त में संयुक्त अरब अमीरात में आत्म-निर्वासन में चले गए क्योंकि उनके भाग्य की उत्पत्ति पर सवाल खड़े हो गए थे. पाकिस्तानी विपक्षी नेता बेनजीर भुट्टो के आठ साल के निर्वासन के दौरान और पाकिस्तान में उनकी हत्या से पहले संयुक्त अरब अमीरात ही उनका घर था.
यूएई सऊदी अरब और पाकिस्तान सहित तीन देशों में से एक है, जिसने पिछले तालिबान शासन को मान्यता दी थी, जिसने 1996 से 2001 तक शासन किया था.
नई दिल्ली : तालिबान के अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर कब्जेऔर राष्ट्रपति अशरफ गनी के विदेश भाग जाने के बाद देश के नए मुखिया को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं. कहा जा रहा है कि कट्टरपंथी इस्लामिक समूह तालिबान का नेता मुल्ला अब्दुल गनी बरादर देश का राष्ट्रपति बन सकता है. ANI के मुताबिक, मुल्ला बरादर ने एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है, जिसमें अफगानिस्तान पर बेहद कम वक्त में तालिबान का नियंत्रण स्थापित होने को लेकर खुशी का इजहार किया गया है.
अलजजीरा के मुताबिक, मुल्ला बरादर ने वीडियो पोस्ट में कहा है, इतने कम वक्त में किसी भी मुल्क को जंग में जीत नसीब नहीं हुई यह अप्रत्याशित है. लेकिन अब हमारे सबसे बड़ी चुनौती अफगानिस्तान की जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने और अफगान जनता की समस्याओं को दूर करना हमारे लिए चुनौती होगी. यह संदेश मुल्ला बरादर अफगानिस्तान की कमान संभालने की तैयारी का संकेत भी देता है.
मुल्ला बरादर 1990 के दशक में इस्लामिक शरिया कानून के मुताबिक शासन चलाने वाले तालिबान की नींव रखने वालों में से एक था. उससे पहले 1980 के दशक में जब सोवियत संघ ने अफगानिस्तान पर नियंत्रण स्थापित करना चाहा तो मुल्ला बरादर ने कंधार से सोवियत फौजों के खिलाफ जेहाद का ऐलान किया. मुल्ला बरादर अफगानिस्तान के उरुजगान प्रांतके देहराऊद जिले का रहने वाला और पख्तून है.
कहा जाता है कि 1980 के दशक में जब सोवियत संघ ने अफगानिस्तान पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश की तो मुल्ला बरादर ने कंधार में सोवियत फौज के खिलाफ जेहाद का ऐलान किया. अमेरिका में 9/11 हमले के बाद जब 2001 में तालिबान को सत्ता से उखाड़ फेंका गया तो मुल्ला बरादर अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ हमलों में शामिल रहा. वर्ष 2001 के पहले जब अफगानिस्तान में तालिबान शासन कर रहा था तो उस सरकार में मुल्ला बरादर उप रक्षा मंत्री की हैसियत से काम कर रहा था.
तालिबान के लिए फंडिंग जुटाने और नए रंगरूटों की भर्ती के काम में भी उसे महारत हासिल रही है. अमेरिकी हमले के बाद मुल्ला बरादर भूमिगत हो गया और दस साल बाद पाकिस्तान के कराची शहर में उसे पकड़ा गया. कहा यह भी जाता है कि पाकिस्तान को बरादर के उसके देश में छिपे होने की पूरी जानकारी थी. बरादर तालिबान के सबसे बड़े नेता मुल्ला उमर का सबसे भरोसेमंद था.
बेहद कम समय में ही मुल्ला बरादर तालिबान का दूसरा सबसे बड़े नेता बनकर उभरा. जब कतर में तालिबान और अफगान सरकार के बीच शांति वार्ता शुरू हुई तो मुल्ला बरादर को रिहा कर दिया गया. तभी से वो पर्दे के पीछे से अफगानिस्तान में तालिबान की दोबारा हुकूमत कायम करने के मिशन को अंजाम देने में जुटा था.
वॉशिंगटन: कोरोनावायरस के डेल्टा वेरिएंट (Delta variant) का सामना कर रहे अमेरिका ने गुरुवार को कमजोर इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) वाले लोगों के लिए कोविड वैक्सीन की एक अतिरिक्त डोज की इजाजत दी है. कार्यकारी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कमिश्नर जेनेट वुडकॉक की ओर से एक बयान में कहा गया है, 'देश कोविड-19 महामारी की एक और लहर का सामना कर रहा है और FDA के संज्ञान में यह बात है कि कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों के लिए गंभीर बीमारी का खतरा है.'