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वाशिंगटन: अमेरिका में कोरोना का टीका ले चुके लोगों को अब मास्क लगाने की जरूरत नहीं है. टीका लगा चुके लोग अब एक दूसरे से मिल भी सकते हैं. टीका लगा चुके लोग घर के अंदर हों या फिर लोगों के बीच उन्हें मास्क की जरूरत नहीं है. अधिकारियों ने गुरुवार को सामाजिक जीवन पर लगी बंदिशों को खोलने का मार्ग प्रशस्त हो रहा है. लाखों अमेरिकियों ने एक साल से अधिक वक्त महामारी की वजह से घरों में बिता दिया. टीकाकरण के बाद आया है यह परिवर्तन लोगों के जीवन में एक बार फिर नयापन लेकर आएगा.
सीडीसी के अधिकारियों ने कहा कि दुनिया भर में कोरोनो वायरस टीकों की प्रभावकारिता के आंकड़े सबूत हैं कि टीका लेने के बाद लोग महामारी से सुरक्षित हो रहे हैं. सीडीसी ने यह भी कहा कि वैक्सीन अमेरिका में कोरोना के घातक म्यूटेंट के खिलाफ असरदार है और लोगों को सुरक्षा प्रदान करती है. देश के घटते मामलों और पूरी तरह से टीकाकरण करा चुके लोगों में संक्रमण ना के बराबर पाया गया है. इसके बावजूद भी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि महामारी फिर से भयावह रूप लेती है तो दिशानिर्देश बदले जा सकते हैं.
प्रतिबंधों में दी गई यह छूट हवाई यात्राओं पर और स्वास्थ्य क्षेत्र में लगे लोगों पर लागू नहीं होती है. अधिकारियों ने यह भी कहा कुछ व्यवसायों से जुड़े लोगों को अभी भी मास्क की आवश्यकता हो सकती है.
अमेरिका में आठ महीनों में सबसे कम नए मामलों की संख्या देखी जा रही है. वहीं, जनवरी में प्रति दिन लगभग 3,000 लोगों की हो रही मौत की संख्या घटकर अब लगभग 600 प्रति दिन हो गई है।
सीडीसी के पूर्व कार्यवाहक निदेशक और रॉबर्ट वुड जॉनसन फाउंडेशन के अध्यक्ष व मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिचर्ड बेसर ने कहा, "यह एक ऐसा दिन है जो मुझे लगता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में महामारी में एक टर्निंग प्वाइंट के रूप में दर्ज किया जाएगा." वे लोग जो पूरी तरह से वैक्सीन से सुरक्षित हैं, अपने मास्क उतार सकते हैं, बाहर जा सकते हैं, अंदर जा सकते हैं, लोगों के आसपास हो सकते हैं और अब कोविड के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, यह सच में अकल्पनीय है.”
जेनेवा: भारत में कोरोनावायरस लगातार कहर बरपा रहा है. तमाम प्रतिबंधों और लॉकडाउन जैसे सख्त कदमों के बावजूद कोरोना के नए मामलों में कोई खास कमी आते हुए नहीं दिख रही है. ऐसे में सवाल यह है कि कोरोना के बेलगाम मामले आने के पीछे की वजह क्या है? इस बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की मुख्य वैज्ञानिक ने भारत में कोरोना विस्फोट के कारणों को लेकर कहा कि भारत में COVID-19 का एक वेरिएंट बहुत अधिक संक्रामक है और तेजी से लोगों को शिकार बना रहा है. यह वैक्सीन से होने वाली प्रोटेक्शन को भी रोक सकता है.
डब्ल्यूएचओ की चीफ साइंटिस्ट सौम्या स्वामीनाथन ने एएफपी को दिए इंटरव्यू में चेताया है कि भारत में हम जो स्थिति देख रहे हैं वह संकेत देते हैं कि यह वेरिएंट बहुत तेजी से फैल रहा है. बता दें कि शनिवार को भारत में पिछले 24 घंटे में कोरोना से 4,000 से ज्यादा मौतें हुई हैं. यह एक दिन में कोरोना से मौतों का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. यही नहीं इस दौरान चार लाख से ज्यादा नए केस दर्ज किए गए हैं.
स्वामीनाथन ने कहा कि कोविड-19 का B.1.617 वेरिएंट स्पष्ट रूप से भारत में कोरोना विस्फोट का महत्वपूर्ण कारक है. वायरस का यह प्रकार पिछले साल अक्टूबर में पहली बार पाया गया था. उन्होंने कहा, "कोरोना के मामलों में उछाल के पीछे कई चीजें हैं और तेजी से फैलाने वाला वायरस का प्रकार उनमें से एक है."
उन्होंने कहा कि अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों के अलावा कई राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण B.1.617 वेरिएंट को गंभीरता से ले रहे हैं और मुझे उम्मीद है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन भी जल्द ही इस पर कोई कदम उठाएगा.
डब्ल्यूएचओ की शीर्ष अधिकारी ने कहा, "B 1.617 वेरिएंट चिंता का विषय है क्योंकि इसमें कुछ म्यूटेशन है, जो ट्रांसमिशन को बढ़ा देता है और वैक्सीन या फिर प्राकृतिक संक्रमण द्वारा शरीर में पैदा होने वाले एंटीबॉडी को बनने से रोक सकता है."
हालांकि, उन्होंने जोर दिया है कि भारत में कोरोना के मामलों में बेतरतीब उछाल के लिए सिर्फ कोविड-19 का यह संस्करण जिम्मेदार नहीं है बल्कि ऐसा लगता है कि भारत में लोगों की लापरवाही भी इसके लिए जिम्मेदार है. लोगों ने कोरोना के खिलाफ सुरक्षात्मक उपायों को गंभीरता से नहीं लिया. उन्होंने कहा कि भारत में कई लोगों को ऐसा लगा कि संकट खत्म हो गया. लोगों ने मास्क लगाना और अन्य उपायों का पालन करना छोड़ दिया.
जिनेवा (स्विटजरलैंड): विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टैड्रोस ऐडरेनॉम ग़ैबरेयेसस ने सोमवार को भारत में कोविड-19 (COVID-19) के मामलों और मौतों की रिकॉर्ड-ब्रेकिंग लहर को लेकर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि संगठन संकट को दूर करने में मदद कर रहा है. टैड्रोस ऐडरेनॉम ग़ैबरेयेसस ने संवाददाताओं से कहा कि "भारत में स्थिति हृदय विदारक है."
उनकी टिप्पणी भारत में भयावह कोरोनो वायरस लहर को लेकर आई है, जब देश के अस्पताल और श्मशानघाट पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं.
हाल के दिनों में संक्रमण में वृद्धि से मरीजों के परिवारों को ऑक्सीजन की आपूर्ति और अस्पतालों में बिस्तर के लिए सोशल मीडिया पर गुहार लगाते देखा जा रहा है. राजधानी नई दिल्ली एक सप्ताह के लॉकडाउन का विस्तार करने के लिए मजबूर हुई है.
टेड्रोस ने कहा कि "डब्ल्यूएचओ वह सब कुछ कर रहा है जो हम कर सकते हैं. महत्वपूर्ण उपकरण और आपूर्ति की जा रही है." उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी अन्य चीजों में "हजारों ऑक्सीजन कॉन्सट्रेटर, प्री फेब्रिकेटेड मोबाइल फील्ड ऑस्पिटल और प्रयोगशाला की आपूर्ति कर रही है."
WHO ने यह भी कहा कि इसने पोलियो और टीबी सहित विभिन्न कार्यक्रमों के 2,600 से अधिक विशेषज्ञों को भारतीय स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ काम करने के लिए और महामारी से लड़ने में मदद करने के लिए भेजा है.