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शादी के बाद ज्यादातर लोग मोटे क्यों हो जाते हैं? बहुत से लोगों के लिए यह बात एक राज की तरह है। अगर आपके दिमाग में भी यही सवाल है, कि लोग शादी के बाद मोटे क्यों हो जाते हैं, तो जानिए वजह - 2011 में ओहियो स्टेट में की गई एक स्टडी में पाया गया कि शादी के बाद लोगों के शारीरिक वजन में 9 से 10 किलो ग्राम तक का अंतर आ जाता है।
नवजात शिशुओं में पीलिया की समस्या एक आम बात है और ये माता पिता के लिए चिंता का विषय बन जाता है। बेहतर होगा आप इस बात को भलीभांति जान लें कि अधिकांश बच्चों को जन्म के बाद इस समस्या से गुज़रना पड़ता है। हालांकि अगर इसका इलाज सही समय पर और ठीक तरह से किया जाए तो यह बीमारी पूरी तरीके से ठीक हो जाती है और आपका बच्चा एकदम स्वस्थ हो जाता है। अपने इस लेख में आज हम नवजात शिशुओं में पीलिया की समस्या पर चर्चा करेंगे जिसमें इसके लक्षण, कारण और इससे जुड़ी अन्य कई महत्वपूर्ण जानकारियां आपको देंगे। तो आइए विस्तार से जानते हैं इस बीमारी के बारे में।
नवजात बच्चों में पीलिया
पीलिया की स्थिति में शरीर और आँखों का रंग पीला पड़ने लगता है। इसकी शुरुआत बच्चे के जन्म के कुछ दिन बाद होने लगती है। कई अध्ययनों के अनुसार अधिकतर बच्चों को जन्म के कुछ हफ्ते बात हल्के स्तर पर पीलिया हो जाता है। हालांकि समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों में इस बीमारी का खतरा ज़्यादा रहता है। अगर वे पीलिया की चपेट में आ गए तो ये जल्दी उनका पीछा नहीं छोड़ती है। याद रखिये अगर नवजात शिशु में बिलीरुबिन (bilirubin) का स्तर बहुत अधिक है तो इसके कारण उसे अन्य कई बीमारियां हो सकती हैं जैसे ब्रेन डैमेज, बहरापन और सेरेब्रल पाल्सी। सेरेब्रल पाल्सी, बच्चों में होने वाला मस्तिष्क विकार है।
नवजात बच्चों में पीलिया होने के कारण
बड़ों में पीलिया लीवर की समस्या के कारण होता है, वहीं बच्चों में इसका कारण दूसरा होता है। आमतौर पर नवजात शिशु में बिलीरुबिन का स्तर ज़्यादा होता है, क्योंकि उनके शरीर में अतिरिक्त ऑक्सीजन वहन करने वाली लाल रक्त कोशिकाएं होती हैं। बिलिरुबिन एक केमिकल होता है, जो कि शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के सामान्य रूप से टूटने पर बनता है। शरीर से बिलिरुबिन को हटाने का काम लीवर करता है। नवजात शिशु का लीवर अभी पूरी तरह परिपक्व नहीं हुआ होता है इसलिए यह अतिरिक्त बिलिरुबीन का अपचय नहीं कर पाता।
नवजात शिशु में पीलिया को समझना
शारीरिक तौर पर देखें तो पीलिया बच्चों में सामान्य है। इसके लक्षण शिशु के जन्म के कम से कम सात दिन बाद दिखायी देते हैं। सही से स्तनपान कराने से यह बिना उपचार के अपने आप ही ठीक हो जाता है। नवजात बच्चों में जॉन्डिस के अन्य कई कारण हो सकते हैं, जैसे स्तनपान से जुड़ी कोई समस्या, बच्चे और माँ के खून में असामान्यता, इन्फेक्शन या फिर अन्य प्रकार के लिवर और खून से सम्बंधित बीमारी। कई बार बच्चे को पीलिया, अस्पताल से छुट्टी लेकर घर जाने के बाद होती है इसलिए शिशु के जन्म के हफ्ते भर के अंदर ही डॉक्टर उसका नियमित चेकअप कराने की सलाह देते हैं ताकि वे इस बात की जानकारी हासिल कर सकें कि आपका नन्हा शिशु कहीं पीलिया की चपेट में तो नहीं आ गया है। हालांकि एक माता पिता होने के नाते अगर आपको अपने बच्चे में पीलिया का कोई भी लक्षण दिखाई दे तो फौरन अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
नवजात बच्चों में पीलिया के लक्षण
पीलिया के लक्षणों में सबसे पहले आंखों और शरीर का रंग धीरे धीरे पीला होने लगता है। आमतौर पर बच्चे के जन्म के दूसरे या चौथे दिन आपको यह लक्षण देखने को मिल सकता है। इस बात की पुष्टि करने के लिए कि आपके नन्हे शिशु को पीलिया है या नहीं आप हल्के से उसकी नाक या फिर माथे को दबाकर देख सकते है दबाने से अगर बच्चे की चमड़ी पीली पड़ जाए तो समझ लीजिये उसे हल्के स्तर पर पीलिया हो गया है। अगर उसे पीलिया नहीं होगा तो दबाने के बाद उसके शरीर का रंग सामान्य रंग से थोड़ा हल्का हो जाएगा। दिन के उजाले में आप ऐसा करके इस बात का पता आसानी से लगा सकते हैं कि आपके बच्चे को पीलिया है या नहीं।
कब संपर्क करें अपने डॉक्टर से
कई अस्पताल बच्चों को डिस्चार्ज करने से पहले उनका अच्छी तरह चेकअप कर लेते हैं। हालांकि यह ज़रूरी नहीं है कि आपके बच्चे को पहले ही यह बीमारी हो जाए, अस्पताल से घर जाने के चार पांच दिन बाद भी आपका शिशु इस बीमारी से प्रभावित हो सकता है। अमेरिकन अकादमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार अस्पताल में नवजात बच्चे का पीलिया के लिए चेकअप हर 8 से 12 घंटे में होना चाहिए। घर आने के पश्चात भी आपके डॉक्टर आपको बच्चे के रूटीन चेकअप की सलाह देते हैं। आमतौर पर जन्म के तीसरे और सातवें हफ्ते में एहतियात बरतने के लिए कहा जाता है क्योंकि इस दौरान बिलिरुबिन का स्तर बढ़ता है। इसके अलावा पीलिया के कुछ लक्षणों के बारे में भी आपको जानकारी होनी चाहिए ताकि ऐसे में आप फौरन अपने डॉक्टर से सलाह लें। अगर आपको अपने नवजात शिशु में इनमें से एक भी लक्षण आपको दिखाई दे तो तुरंत अपने डॉक्टर के पास जाएं और अपने बच्चे का इलाज करवाएं। 1. अगर बच्चे के शरीर का रंग अधिक पीले पड़ने लगे। 2. अगर बच्चे के पैर, पेट या कंधे पीले पड़ने लगे। 3. जब बच्चों के आंखों का सफेद हिस्सा पीला हो जाए। 4. बच्चे का वज़न न बढ़े। 5. बच्चा सुस्त रहने लगे। 6. बच्चा ज़ोर ज़ोर से रोये। 7. अगर जन्म के तुरंत बाद आपके बच्चे को पीलिया हो गया है और वह तीन हफ़्तों के बाद भी ठीक नहीं हो रहा है तो फौरन अपने डॉक्टर से बच्चे की जांच करवाएं। 8. अगर आपको कुछ असामान्य लक्षण अपने बच्चे में दिखायी दे।
::/fulltext::चेहरे की त्वचा के रोम छिद्र बताते हैं कि आपकी त्वचा कितनी स्वस्थ है। चेहरे के रोम छिद्र उम्र के साथ बड़े होते जाते हैं क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ त्वचा की रौनक कम होती जाती है। ये बड़े खुले रोम छिद्र भद्दे लगते हैं और परेशान करते हैं। यह समस्या आमतौर पर तैलीय त्वचा में अधिक होती है। विशेषज्ञों के अनुसार कई बार गलत मसाज करने से भी रोम-छिद्र गैरजरूरी तौर पर खुल जाते हैं। इन पोर्स को छोटा तो नहीं किया जा सकता लेकिन इसे साफ करके हल्का जरूर किया जा सकता है। अगर आपकी स्किन भी पोर्स में गंदगी जमा होने के कारण खुरदरी और कठोर नजर आती है तो इन घरेलू तरीकों से आप इसे बड़ी आसानी साफ करके चेहरे की स्किन को कोमल और चमकदार बना सकती है।
पोर्स में फसी गंदगी को आराम से निकालने के लिए भाप लेना बहुत बढ़िया ऑप्शन है। इससे स्किन बिल्कुल साफ और ब्राइट दिखने लगेगी। इस उपाय को आप सप्ताह में 2 बार कर सकते हैं। इससे पोर्स साफ होने के साथ ही मुंहासे आने भी कम हो जाएंगे।
यह उपाय पोर्स की सफाई गहराई से साफ करता है। इसके लिए 1 चम्मच बेकिंग सोडा को पानी में साथ मिला कर पेस्ट बना लें। फिर इसे पूरे चेहरे पर 10 मिनट के लिए लगाएं और फिर बाद में गुनगुने पानी से धो लें।
अंडे में प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है, इससे स्किन की खराब परत अपने आप ही हट जाती है और नींबू में मौजूद विटामिन सी चेहरे पर ग्लो लाने में मदद करता है। इसके लिए कटोरी में अंडे का सफेद भाग और नींबू का रंस लेकर अच्छी तरह मिक्स कर लें। फिर इसे चेहरे पर कुछ देर के लिए लगाएं और फिर इसे ठंडे पानी से धो लें।
पोर्स को बंद और साफ करने के लिये रोज वॉटर को चेहरे पर लगाकर उसे साफ करें। यदि आपकी त्वचा तैलीय है तो कत्था लें और इसे गुलाब जल में और यदि त्वचा रूखी है तो दूध में धो लें। ध्यान रहे कि कत्थे की मात्रा मसूर के दाने जितनी ही होनी चाहिए। अब इसमें आधा चम्मच चंदन पाउडर और एक चम्मच लेमन पाउडर मिलाकर चेहरे पर लगाएं।
चीनी पोर्स की सफाई के लिए बहुत बढ़िया उपाय है। इसके लिए चीनी में 1 चम्मच नींबू का रस मिला कर इससे चेहरे पर स्क्रब करें। इसके बाद चेहरे को गुनगुने पानी से धो लें।
ग्रीन से पोर्स की सफाई होने के साथ स्किन टाइट होती है और ऑयली स्किन से राहत मिलती है। इस उपाय के लिए 1 ग्रीन टी पाउडर, 1 अंडा, 2 चम्मच बेसन और थोड़ा-सा गुलाबजल डाल कर पेस्ट तैयार कर लें। इसे चेहरे पर 20 मिनट के लिए लगाएं और बाद में सिंपल पानी से धो लें।
आइस क्यूब चेहरे पर हल्के-हल्के लगाने से चेहरे के खुले पोर्स बंद होने लगते हैं। इससे त्वचा खूबसूरत भी दिखने लगती है। लेकिन ऐसा दिन में केवल 15 से 20 सेकंड ही करें। रात को सोने से पहले आइस क्यूब चेहरे पर लगाना सबसे बेहतर रहता है।
::/fulltext::पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी दिल्ली के एम्स में भर्ती हैं। एम्स का कहना है कि धीरे धीरे उनकी तबीयत ठीक हो रही है।अटल जी को मंगलवार के दिन यूरिन इंफेक्शन की शिकायत के बाद एम्स लाया गया था। इसके अलावा उन्हें किडनी संबंधी समस्या और लोअर रेस्पिरेटरी ट्रेक्ट इंफेक्शन की शिकायत बताई जा रही है। हालांकि अटल बिहारी की हालत में पहले से कई ज्यादा सुधार आया है लेकिन उन्हें कुछ और दिन अस्पताल में रहना पड़ेगा। यूरिन इंफेक्शन फंक्शन या बैक्टीरिया के अलावा ज्यादा देर तक पेशाब रोकने से भी मूत्राशय में बैक्टीरिया पनपने से होता है। यूटीआई का संक्रमण अपर यूरिनरी ट्रैक्ट और लोअर यूरेनरी ट्रैक्ट होता है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक यूरिनरी इंफेक्शन (मूत्राशय संक्रमण) सभी आयु वर्ग के लोगों को हो सकता है। महिलाओं में यूआईटी की समस्या सबसे ज्यादा होती है। इसमें ब्लैडर में सूजन हो जाती है। भाशरीर की स्वच्छता पर ध्यान न देना, इम्यूनिटी कमजोर होना, मूत्र मार्ग में सर्जरी और पानी कम पीना ब्लैडर इंफेक्शन या एक्यूट यूटीआई के लिए जिम्मेदार कुछ प्रमुख कारक हैं। एक बार यूरिन इंफेक्शन होने के बाद शरीर में बैक्टीरिया प्रवेश करने के बाद इन जीवाणुओं की संख्या बढ़ने की वजह से भविष्य के लिए काफी घातक साबित हो सकते है। आइए जानते है कि यूरिन इंफेक्शन की वजह से क्या क्या समस्याएं हो सकती है।
इन्टर्स्टिशल सिस्टाइटिस सिंड्रोम
यह एक बेहद खतरनाक ब्लैडर सिंड्रोम है, जिसकी वजह से यूरीन भंडार, जिसे ब्लैडर कहा जाता है, में सूजन होने लगती है। इस दौरान बहुत ही ज्यादा यूरिन आता है। लेकिन यूरिन बहुत ही कम मात्रा में आता है।
ब्लैडर की मांसपेशियां हो सकती है कमजोर
यूरिन को बार-बार रोकने से ब्लैडर की मांसपेशियां बहुत कमजोर भी हो जाती हैं। ऐसा होने पर यूरीन की क्षमता पर भी असर पड़ता है। यूरिन इंफेक्शन के दौरान ब्लैडर की मांसपेशियां बहुत ही कमजोर हो जाती है जिस वजह से आपको कितना ही तेज यूरिन क्यों नहीं आ रहा हो लेकिन आप इसे शरीर से बाहर निकाल नहीं पाते है।
यौन संबंध बनाने से भी
यौन सम्बन्ध के समय साफ सफाई का ध्यान नहीं रखना यूरिन इन्फेक्शन होने का एक बड़ा कारण है। यूरिन में इन्फेक्शन 16 से 35 वर्ष की महिलाओं को अधिक होता है।
गर्भावस्था में होती है ज्यादा समस्या
गर्भावस्था में प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन के बढ़ने के कारण मूत्राशय और मूत्र नली की संकुचन की क्षमता कम हो जाती है। इस वजह से मूत्राशय के सही प्रकार से काम न कर पाने के कारण यूरिन इन्फेक्शन हो जाता है।
किडनी की समस्या
रक्त में मौजूद टॉक्सिन को फिल्टर ना कर पाने की वजह से किडनी में समस्याएं होने लगती है, जो आगे चलकर किडनी फेलियर तक पहुंच सकती है। यूरीन में किसी भी तरह का इंफेक्शन सीधे किडनी पर असर डालता है। किडनी फेल हो जाने की वजह से बॉडी में विषैले पदार्थ घुलने लगते हैं और वे यूरीन के साथ भी बाहर नहीं निकल पाते।
यूरिन इंफेक्शन के लक्षण
अगर लगातार आपका यूरिन का रंग गहरा हो रहा है तो इसका मतलब है कि आपका शरीर संक्रमण के घेरे में आ रहा है। यूरिन का रंग डार्क या खूनी होना। यूरिन से बहुत ज्यादा गंदी बदबू आना और इसे रोकना मुश्किल होना। पेट के निचले हिस्से में दर्द और प्राइवेट पार्ट में खुजली होना। यूरिन के दौरान जलन होना।
पुरुषों में यूरिन इंफेक्शन
पुरुषों में डायबिटीज या प्रोस्टेट के बढ़ने के कारण यूरिन में इन्फेक्शन हो सकता है।
इन बातों का ध्यान रखें
पानी का अधिक से अधिक सेवन करें। इसके अलावा नारियल पानी या जूस आदि तरल पदार्थ पीएं। यूरिन को रोक कर न रखें। इससे संक्रमण का खतरा और भी बढ़ सकता है। प्राइवेट पार्ट की सफाई रखें। उसे सूखा रखें और टिशू का इस्तेमाल करें। मसालेदार चीजों का सेवन करने से बचें और कैफीन की अधिक मात्रा न लें। आधा गिलास चावल के पानी में चीनी मिलाकर पीने से यूरिन में होने वाली जलन से छुटकारा मिलता है। बादाम की 5 गिरी में 7 छोटी इलायची और मिसरी डालकर पीस लें। फिर इसे पानी में घोलकर पीएं। इससे दर्द और जलन कम होती है।