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Wednesday, 17 June 2026

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क्या सही पॉश्चर में न बैठने की वजह से होता है कमर में दर्द?......

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क्लास में सीधे न बैठना, घर पर टीवी देखते हुए सुस्ताना या फिर आॅफिस में काम करते हुए पैर फैला कर बैठना इन तमाम केसस में ही हमारा पॉश्चर बिगड़ता है। ऐसे में यह मान्यता है कि इन सभी कारणों से पीठ के नीचले हिस्से में दर्द होता है। क्योंकि यह सच है कि, हमारा पॉश्चर पूरे स्वास्थ्य पर प्रत्यक्ष रूप से प्रभाव डालता है और लंबे समय तक गलत पॉश्चर में बैठें रहने की आदत हो जाए तो हैल्थ से जुड़ी बहुत सी समस्याएं हो सकती हैं। देखा जाए तो हम में से बहुत से लोगों को अक्सर बैक पैन की शिकायत रहती है। हालांकि यह दर्द कि समस्या हर इंसान में अलग-अलग स्तर पर और अलग-अलग कराणों से होती है। जैसे कि मान लीजिए कि कभी किसी के काम करते हुए मोच आ जाए, तो इसका दर्द कुछ समय बाद अपने आप छूमंतर हो जाएगा। जबकि यही दर्द अगर गठिया या ऑस्टियोपोरोसिस के कारण होता है, तो दर्द परेशान करता है और यह लम्बें समय तक रहता है।

 इसी तरह कुछ लोगों के केस में पीठ दर्द बेजह भी होता है, जबकि न तो उन्हें कोई बीमारी है और ना ही उन्हें कोई चोट लगी है यहां तक कि न उनकी कोई सर्जरी हुई। ऐसे में दर्द से परेशान लोगों को वाकई बैठने पर सही पॉश्चर, सही से खड़े होना और यहां तक कि चलने में भी सही पॉश्चर का बहुत ध्यान रखना पड़ता है? और क्या सही में परफेक्ट पॉश्चर जैसा कोई सिद्धांत है,जिसकी मदद से पीठ दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है?

पॉश्चर व पीठ दर्द के बीच तालमेल

अमुमन माना जाता है कि 6-7 घंटे लगातार बैठकर, कम्प्यूटर पर काम करने की वजह से बहुत से हैल्थ प्रॉब्लम होने लगे है। जैसे कि सिर दर्द, कमर दर्द, आंखों में जलन इत्यादि, जबकि, इस मुद्दे पर हुए कई सर्वेक्षणों के मुताबिक, जिन लोगों का पॉश्चर भी सही था, या फिर आरामदायक चेयर पर बैठने वालें लोगों को भी पीठ दर्द की शिकायत रही है! ऐसे में यहां यह बात बिलकुल गलत साबित हो जाती है कि सीधे पॉश्चर में बैठने से किसी तरह की परेशानी नहीं होती। इतना ही नहीं, चार्टर्ड सोसाइटी फॉर फिजियोथेरेपी में पीठ दर्द से संबंधित व्यावसायिक खतरों और कार्यस्थल के कारणों पर शोध करने वाले एशले जेम्स भी, इस बात से सहमत नहीं हैं कि बैठने का पॉश्चर का कोई भी लिंग पीठ दर्द से है। एश्ले का कहना है कि हर इंसान का अपना अलग पॉश्चर होता है और सही पॉश्चर जैसी कोई चीज होती ही नहीं है, इसलिए यह कहना गलत है होगा कि हर कोई पीठ दर्द से पीड़ित है। इसके साथ ही इस विषय पर हुई बहुत से अध्ययनों में भी साबित हो चुका है कि सही पॉश्चर और पीठ दर्द के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है।

ढंग से बैठना व पीठ दर्द

बैकपैन के लिए अगर सही पॉश्चर जिम्मेदार नहीं है तो आखिर फिर क्यूं इन दिनों बैकपैन की समस्या बढ़ने लगी है? तो इसका कारण लम्बें टाइम के लिए एक ही जगह पर बैठें रहना। जी हां जो लोग, कम्प्यूटर के सामने, टीवी के सामने व किताबें पढ़ने जैसे तमाम कामों के लिए बहुत देर तक एक ही जगह एक ही मुद्रा में बिना किसी ब्रेक के बैठें रहते है उन्हें ही पीठ दर्द की शिकायत रहती है। अब यह सवाल उठना भी वाजिब है कि आखिर ऐसा होता क्यो है? इसका जवाब देते हुए एशले जेम्स कहते हैं कि, असल में हमारे शरीर के तंत्र को लगातार काम करने, यहां कहे तो मूव करते रहने के लिए डिजाइन किया गया है।

इसलिए, जब कोई व्यक्ति बहुत लंबे समय तक बैठा रहता है तो, शरीर में नोकिसिप्टर नामक तंत्रिका पर दबाव पड़ने लगता है और इसी वजह से लंबे समय तक पीठ दर्द बना रहता है। इसलिए, यह सही है कि पीठ दर्द की असल वजह सही पॉश्चर नही, बल्कि लम्बें समय तक बिना ब्रेक लिए बैठें रहना है। इसलिए, यदि आप भी बहुत लम्बे टाइम के लिए एक ही जगह पर बैठे रहते हैं तो यह आदत बदले और थोड़ा-थोड़ा ब्रेक लेकर अपने काम को पूरा कर, पीठ दर्द से छुटारा पाए।  हालांकि, जबकि देखा जाए तो, उम्र और सही पॉश्चर में भी तालमेल बैठता है। जैसे कि यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स में मस्कुलोस्केलेटल के प्रोफेसर फिलिप कोनागान कहते हैं कि, जब हम बड़े होकर 60 साल की उम्र तक पहुंचते है, तब खराब पॉश्चर और आसल की वजह से पीठ दर्द की समस्या हो सकती है। क्योंकि इस उम्र में हमारी मांसपेशिया कमजोर होने लगती है।

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ये मशहूर एक्ट्रेस प्राइवेट रिसोर्ट में चला रही थी सेक्स रैकेट, कई एक्ट्रेस गिरफ्तार.....

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चेन्नई. तमिल सीरियल्स में अपनी खास पहचान बना चुकी संगीता बालन चेन्नई पुलिस ने जिस्मफरोशी के लिए गिरफ्तार किया है. शो ‘वानी रानी’ में अपने किरदार को लेकर संगीता इंडस्ट्री में खासी अच्छी पहचान बना चुकी है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चेन्नई के निजी रिसॉर्ट से पुलिस ने उन्हें प्रोस्टिट्यूशन के आरोप में गिरफ्तार किया. सिर्फ संगीता ही नहीं बल्कि शुरुआती दौर में और कई एक्ट्रेस के नाम सामने आए हैं. छापेमारी के दौरान पुलिस ने संगीता समेत एक शख्स और कई एक्ट्रेस को हिरासत में लिया है. बता दें कि चेन्नई पुलिस को खुफिया सुत्रों के यह जानकारी मिली थी, जिसके बाद ये छापेमारी की गई. बता दें कि छापेमारी के दौरान संगीता और सुरेश नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया गया है. कहा जा रहा है कि इस रैकेट से जुड़े कई और लोगों के नाम सामने आने की संभावना है. साथ ही कई एक्ट्रेस के नाम भी प्रोस्टिट्यूशन में जुड़े रहने की संभावना जताई जा रही है. अभी फिलहाल पकड़े गए लोगों में संगीता का नाम पॉपूलर है. संगीता कई टीवी शोज में काम कर चुकी हैं. वहीं कई तमिल फिल्मों में भी नजर आ चुकी हैं.

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एक्टोपिक प्रेगनेंसी क्या है, जानें इसके लक्षण और इलाज के बारे में ?.....

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गर्भवती होना और इस दुनिया में एक नये जीवन को लाने में सक्षम होना निश्चित रूप से सबसे बड़ा सुख है। हालांकि, प्रेगनेंसी की ऐसी भी कई स्थितियां होती हैं, जिनमें कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। खासकर जब आपका डॉक्टर यह बतता है कि आप एक्टोपिक प्रेगनेंसी से जुझ रही हैं।

क्या है एक्टोपिक प्रेगनेंसी?

माना जाता है कि फर्टिलाइज्ड एग (अण्डाणु) के लिये खुद को जोड़ने की सबसे बेहतर जगह गर्भाशय के अंदर होती है और अगर यह गर्भाशय के बाहर कहीं भी जुड़ता है, तो गर्भावस्था के इस रूप को एक्टोपिक प्रेगनेंसी कहते हैं। इस तरह की ज़्यादातर स्थितियों में फर्टिलाइज्ड एग (अण्डाणु) खुद को फैलोपियन ट्यूब से जोड़ता है इसलिये प्रेगनेंसी की इस अवस्था को ट्यूबल प्रेगनेंसी के नाम से भी जाना जाता है। फैलोपियन ट्यूब्स को इस तरीके से डिजाइन नहीं किया गया है कि वो गर्भाशय की तरह विकसित हो रहे भ्रूण को सपोर्ट कर सके इसलिए प्रेगनेंसी की इस स्थिति में तत्काल ध्यान देने और इलाज की ज़रूरत होती है। हालांकि इस तरह की प्रेगनेंसी असामान्य नहीं है लेकिन फिर भी इनकी संख्या कम हैं। प्रेगनेंसी के लगभग 50 केस में से ऐसा एक केस में दिख जाता है। एक्टोपिक प्रेगनेंसी क्यों होता है? इसके पीछे क्या वजहें हो सकती हैं? चलिए जानें एक्टोपिक प्रेगनेंसी की स्थिति पैदा होने की कुछ वजह के बारे में।

• फैलोपियन ट्यूब में सूजन या संक्रमण, जिससे ब्लॉकेज की संभावना होती है।

• अगर फैलोपियन ट्यूबों पर कोई सर्जिकल प्रक्रिया की गई है, तो यह अण्डाणु के मूवमेंट में बाधा डाल सकती है।

• फैलोपियन ट्यूब में पहले कभी इंफेक्शन होने की स्थिति में भी अण्डाणु के मूवमेंट में दिक्कत आ सकती है।

• पेल्विक क्षेत्र या फैलोपियन ट्यूब के आसपास हुई सर्जरी भी इसकी एक वजह बन सकती है।

जानें एक्टोपिक प्रेगनेंसी के कुछ संभावित कारण

• अतीत में एक्टोपिक प्रेगनेंसी से जुझ चुकी महिलाओं में दोबारा इस तरह की प्रेगनेंसी की संभावना बढ़ जाती है।

• 35 साल या उससे ज़्यादा की उम्र में प्रेगनेंट होने पर एक्टोपिक प्रेगनेंसी का खतरा रहता है।

• जिन महिलाओं की पहले कभी पेल्विक या अब्डॉमिनल सर्जरी हुई है, उनमें भी एक्टोपिक प्रेगनेंसी की संभावना बढ़ जाती है।

• पेल्विक में सूजन संबंधी बीमारियों से जुझ रही महिलाएं।

• कई बार गर्भपात होना भी इसकी वजह बन सकती है।

• धूम्रपान करने वाली महिलाएं।

• ट्यूब्ल से जुड़ने के बाद गर्भ गिरना।

• आईयूडी (IUD) के प्लेस होने के बाद गर्भ का गिरना।

एक्टोपिक गर्भावस्था के लक्षण

एक्टोपिक प्रेगनेंसी में आमतौर पर गर्भवती महिलाओं में जो लक्षण दिखाई देते हैं, उसके अलावा कुछ विशिष्ट लक्षण भी देखने को मिलते हैं। हम इन विशेष लक्षणों के बारे में बता रहे हैं। अगर प्रेगनेंसी के दौरान आपको भी ये लक्षण दिखते हैं, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

• अचानक तेज़ दर्द होना और फिर दर्द खत्म हो जाना, हर बार दर्द की तीव्रता में अंतर हो सकता है। ज़्यादातर ये दर्द पेल्विक और पेट के आस-पास होता है। हालांकि, कभी-कभी दर्द कंधे और गर्दन के आसपास भी महसूस होता है। यह तब होता है जब रप्चर एक्टोपिक प्रेगनेंसी होती है और इसका रक्त डायाफ्रम के नीचे जमा होता है।

• योनि से रक्तस्राव, जो आपकी सामान्य पीरियड्स के मुकाबले ज़्यादा या कम हो सकता है।

• अचानक गैस संबंधी परेशानी का होना।

• हर समय थकान और कमज़ोरी महसूस होना, बहुत ज़्यादा चक्कर आना। जब तेज़ रक्तस्राव के साथ पेल्विक क्षेत्र के चारों ओर दर्द महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की ज़रूरत है। ऊपर दिये गए किसी भी लक्षण का संकेत मिलने पर जब आप अपने डॉक्टर से संपर्क करते हैं, तो वह एक्टोपिक प्रेगनेंसी की जांच करने के लिये कुछ टेस्ट करवाते हैं। यह दर्द के जगह की पहचान करने के लिए एक सामान्य पेल्विक टेस्ट से शुरू होता है। इसके अलावा, पेट संबंधी दूसरे टेस्ट भी किये जाते हैं। यह जांचने के लिए कि गर्भाशय में विकासशील भ्रूण है या नहीं, स्कैन किया जाता है। एचसीजी (HCG) और प्रोजेस्टेरोन के लेवल को मापा जाता है और अपेक्षित से कम होने पर एक्टोपिक प्रेगनेंसी की संभावना हो सकती है। कलडोसेंटिस नामक एक प्रक्रिया भी की जाती है, इस प्रक्रिया में योनि (वजाइना) के शीर्ष पर एक सुई डाली जाती है, जो गर्भाशय के पीछे और रेक्टम के आगे की जगह है। यदि इस जगह में रक्त पाया जाता है, तो यह एक टूटने वाली फैलोपियन ट्यूब को इंगित कर सकता है।

इलाज

एक्टोपिक प्रेगनेंसी के निम्नलिखित इलाज हैं:

• अगर प्रेगनेंसी को बहुत समय नहीं हुआ है, तो ज़्यादातर मामलों में मेथोट्रैक्सेट दिया जाता है जो बॉडी को प्रेगनेंसी टिशू को अवशोषित करने की अनुमति देकर फैलोपियन ट्यूब को बचाता है।

• यदि फैलोपियन ट्यूब ज़्यादा फैली हुई है या रक्तस्राव के कारण टूट गई है, तो ऐसे मामलों में, इसे पूरी तरह से या आंशिक रूप से हटाने की ज़रूरत हो सकती है। ऐसे में इमरजेंसी सर्जरी की ज़रूरत होती है।

• लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की जाती है, जिसमें सर्जन एक्टोपिक प्रेगनेंसी को बाहर निकालने के लिये लैप्रोस्कोप का उपयोग कर सकता है। यह जनरल एनेस्थीसिया के तहत किया जाता है। इस प्रक्रिया में प्रभावित फैलोपियन ट्यूब का इलाज या उसे निकालना भी शामिल है। अगर किसी केस में लैप्रोस्कोपी सफल नहीं होता है, तो लैप्रोटोमी किया जाता है।

कुछ मामलों में, एक्टोपिक प्रेगनेंसी के बाद नॉर्मल प्रेगनेंसी की संभावना कम हो जाती है। हालांकि, अपने डॉक्टर के साथ इस बारें में चर्चा कर आप फर्टिलिटी ट्रीटमेंट का रास्ता निकाल सकते हैं, जो सामान्य रूप से गर्भ धारण करने के लिए अनुकूल हो सकता है।

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