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Friday, 19 June 2026

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क्‍यों लगता है इंटिमेसी यानि सेक्‍स संबंधों से डर?.....

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इंटिमेसी यानि सेक्‍स संबंधों से डर लगना सामान्‍य बात है लेकिन कई लोग इसके पीछे के कारण को समझ ही नहीं पाते हैं लेकिन अगर किसी को इस डर से बाहर निकलने में दिक्‍कत आती है तो ऐसे में इसका असर उसके रिश्‍ते पर भी पड़ता है। इंटिमेसी का डर सामान्‍य तौर पर किसी के करीब जाने पर होता है। इंटिमेसी से जुड़ा ये डर पार्टनर से नहीं बल्कि अपने ही अंदर बैठे एक ऐसे इंसान से होता है जिसे किसी के करीब जाने में घबराहट महसूस होती है। इसमें सबसे बड़ी समस्‍या ये है कि हमारा पार्टनर हमें सकारात्‍मक तरीके से देखता है लेकिन हम खुद स्‍वयं को नकारात्‍मक तरीके से देखते हैं।

इंटिमेसी के डर के पीछे छिपा कारण

दिल का टूटना

अगर पहले आपका रिश्‍ता टूट चुका है तो आपको इंटिमेसी से डर लगने लगता है। दिमाग में ऐसे ख्‍याल आते हैं कि अगर आप किसी के करीब जाएंगें तो फिर से आपका दिल टूट जाएगा। इस वजह से मन में किसी के करीब जाने का डर बैठ जाता है।

कोई रोल मॉडल ना रहा हो

कई बार व्यक्ति अपने बचपन में पैरेंट्स को इंटिमेट होते हुए नहीं देखते हैं और इस वजह से वो इसका मतलब ही नहीं समझ पाते हैं। इस वजह से आगे चलकर इंटिमेसी के प्रति डर बैठ जाता है। किसी के करीब जाने में डर और असहज महसूस होने लगता है।

आत्‍मविश्‍वास में कमी

अगर आपको अपने आसपास कुछ अच्‍छा नहीं लगता या आपमें आत्‍मविश्‍वास की कमी है तो आपको इंटिमेट होने से डर लग सकता है। जब कोई खुद को ही स्‍वीकार नहीं कर पाता तो सामने वाले के प्‍यार को कैसे अपनाएगा।

सब दिमाग का खेल है

बचपन में किसी कड़वी याद की वजह से भी ऐसा हो सकता है। शिशु अपनी ज़रूरत को रोकर ही बताते हैं। इसके बाद हम अपनी ज़रूरतों को बोलकर व्‍यक्‍त कर पाते हैं लेकिन अगर माता-पिता इसके बदले गुस्‍सा करें तो बच्‍चे के मन में डर बैठने लगता है। कभी हमारी ज़रूरतें बिल्कुल भी पूरी नहीं होती हैं। खुद की भावनाओं को व्‍यक्‍त करना ऐसे में मुश्किल हो जाता है। इस वजह से दिमाग में कड़वी यादें बन जाती हैं जो कि इंटिमेसी के डर का कारण बनती हैं।

प्रेरक बाध्यकारी विकार (Obsessive Compulsive Disorders)

इस विकार की वजह से भी इंटिमेसी से डर लगने लगता है। कुछ लोगों को लगता है कि रिलेशनशिप में तनाव बहुत होता है। इस विकार से ग्रस्‍त महिलाओं और पुरुषों को रिलेशिनशिप में होने वाली मुश्किलों से डर लगता है। उन्‍हें लगता है कि रिलेशनशिप में आने पर उनकी फीलिंग्‍स उनके कंट्रोल में नहीं रहेंगी। भावनाओं के साथ-साथ शारीरिक संबंध बनाने में भी इन्‍हें डर लगता है।

इंटिमेसी से डर के पीछे ये 5 कारण होते हैं। अगर आपके भी पार्टनर को ऐसा कोई डर है तो उनसे खुलकर बात करें। उन्‍हें बताएं कि उनमें आपको क्‍या दिख रहा है और उन्‍हें बहुत प्‍यार से समझाएं। अगर आप सच में रोमांटिक लाइफ चाहते हैं तो कपल थेरेपी के लिए भी उन्‍हें ले जा सकते हैं। ऐसे महिला और पुरुष ठीक हो सकते हैं लेकिन इसके लिए उन्‍हें खुद से ईमानदार होना पड़ेगा और अपनी रोमांटिक लाइफ को खुशनुमा बनाने के लिए कोशिश करनी होगी।

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माहवारी के दिनों में खुले में नहाती हैं इस गांव की महिलाएं....

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हर महिला के लिए माहवारी एक जैविक और प्राकृतिक क्रिया है। लेकिन क्या पूरे समाज का भी ये ही सोचना है? उत्तर है नहीं। भारत में आज भी माहवारी शब्द को शर्म और गंदगी से जोड़कर देखा जाता है। शहर हो या गांव इस विषय पर हर जगह एक चुप्पी का माहौल है। आज भी बदलते दौर में माहवारी शब्द हमारे जीवन के शब्दकोष का एक सहज हिस्सा नहीं बन पाया हैं। महिला के उन पांच दिनों से जुड़ी उसकी असहजता और तकलीफ पर कहीं कोई चर्चा नहीं होती। उत्तर प्रदेश के बुन्देल खंड के गांव मसोरा कला में महिलाओं के लिए घरों में कोई निजी स्थान नहाने और शौच के लिए नहीं है,पुरुष तो खुले में नहाते ही हैं लेकिन महिलाओं के पास भी कोई निजी आड़ नहीं होती है इसलिए महिलाएं खुले में ही कपड़े पहनकर नहाने के लिए मजबूर हैं। इसका एक सबसे बड़ा कारण महिलाओं की निजी आड़ की अहमियत को नज़रंदाज़ करना है। सबसे ज्यादा दिक्कत माहवारी के दौरान होती है। निजी आड़ नहीं होने के कारण महिलाएं एक ही कपड़ा दिन-भर इस्तेमाल करतीं हैं और उसे बदलने के लिए दिन छिप जाने का इंतज़ार करतीं हैं। माहवारी के कपड़े को शर्म के कारण महिलाएं खुले में नहीं धो पातीं हैं वो दिन ढल जाने के बाद तालाब या कुआं के पास उन्हें धोती हैं। अंधेरे में धुलने के कारण माहवारी की कतरनें ठीक से साफ़ भी नहीं हो पातीं हैं। धूप में न सूखने के कारण ये संक्रमण का कारण भी बनतीं हैं। गांवों में अधिकतर महिलाएं सफ़ेद पानी की शिकायत से ग्रस्त हैं। भारत के कई गांवों में 'गूँज' संस्था महिलाओं की बुनियादी जरूरतों के बारे मे संवाद कर उनकी से जुडी बुनियादी जरूरतों पर काम कर रहा है।

काम के दौरान संस्था ने महसूस किया है की हमारे गांवों में माहवारी को लेकर महिलाओं की जरूरतों पर कभी भी कोई संवाद नहीं हुआ है माहवारी के दौरान ये आड़ और भी जरुरी हो जाती है। महिलाओं के पास कोई निजी आड़ न होने के कारण महिलायें खुद को साफ़ सुथरा नहीं रख पातीं है। जिसका नकारात्मक असर इनके स्वास्थ पर पड़ता है 'गूँज' के क्लॉथ फॉर वर्क (काम के बदले कपड़े) अभियान के तहत गांव वालों ने स्वयं महिलाओं के लिए प्लास्टिक की शीट और बांस की बल्लियों से स्नान-घर व शौचालय बनाए हैं। संस्था का कहना है कि तस्वीर बदलने के लिए संवाद करना बेहद जरुरी है। ये कहानी हमारे बीच किसी भी गांव की हो सकती है।लेकिन करके हम ऐसा होने से रोक सकते हैं। 

 

 

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नये रिश्ते को बनाना है बेहतर तो इन बातों पर करें चर्चा.....

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हर रिश्ता एक नई शुरुआत है और हर शुरुआत अतीत का अंत। प्यार में पड़ना सबसे खूबसूरत एहसास है जहां आप हर वक्त अपने प्यार के साथ बिताना चाहते हैं और एक की पल में अपने प्यार के लिये सब कुछ करना चाहते हैं। यदि आप नए रिश्ते में हैं तो ये कुछ चीज़ें हैं जिन्हें आपको अपने साथी के साथ चर्चा करने की आवश्यकता है। हर नए रिश्ते में लोगों को अपने आसपास की दुनिया बहुत खूबसूरत लगती है, जहां वो एक-दूसरे के साथ रह सकते हैं। लेकिन ईमानदारी से कहा जाए तो ऐसी कुछ चीज़ें हैं, जिन पर हर नए कपल को चर्चा करनी चाहिए। इससे जोड़े के बीच रिश्ता बेहतर होता है और लंबे समय तक चलता है।

अगर किसी जोड़े का रिश्ता नया है तो इन कुछ चीज़ों पर अपने पार्टनर से बात करने की ज़रूरत है। तो चलिये जानें कि नये रिश्ते को और बेहतर बनाने के लिये किन बातों पर चर्चा करनी चाहिए।

1. पिछले संबंध

आप दोनों को अपने पिछले संबंधों के बारे में एक दूसरे को स्पष्ट रूप से बता देना चाहिए। अतीत के बारे में सब कुछ बताकर एक नया रिश्ता बनाना एक अच्छा तरीका है। इस सच्चाई और ईमानदारी से आपके रिश्ते को मज़बूती मिलती है। इससे यह भी साबित होता है कि आप एक-दूसरे के प्रति पूरी तरह वफादार हैं और अपनी हर बात एक-दूसरे से शेयर करना चाहते हैं।

2. सीमाएं

आपको एक-दूसरे से उन चीज़ों पर चर्चा करनी चाहिए जो आप नहीं चाहते कि आपका पार्टनर करे। यानि कुछ ऐसी सीमाएं जो एक पार्टनर के लांघने से दूसरे को तकलीफ हो सकती हो इसलिये बेहतर है कि इन पर पहले ही बात हो जाए। इससे दोनों के बीच समझ बढ़ेगी और रिश्ता मज़बूत होगा। सीमा से मतलब है ऐसी हदें जो रिश्ते में कभी ना टूटे। ये सीमाएं भरोसा, कंफर्ट ज़ोन, पर्सनल स्पेस और इमोशनल सपोर्ट पर आधारित है।

3. परिवार

नये जोड़े को एक-दूसरे को अपने परिवार और हर सदस्य के बारे में बताना चाहिए कि परिवार का कौन सदस्य कैसा और क्या पसंद करता है ताकि परिवार में आप अपनी छवि अच्छी बनाने के लिये पहले से तैयार रहें। रिश्ते में परिवार एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और एक दूसरे के परिवार के बारे में जानने से परिवार में खुद को शामिल करनें में आसानी होती है।

4. पैसा

पैसा एक बहुत ही संवेदनशील विषय है जिस पर दोनों को ही चर्चा करनी चाहिए। रिश्ते की शुरुआत में पैसे के बारे में बात करना बेहद मुश्किल है लेकिन अपने साथी को अपने खर्च और बचत की आदतों के बारे में बताना ज़रूरी है। मनी मैनेजमेंट को लेकर एक दूसरे की राय और योजना के बारे में जानना अच्छा होता है।

5. भविष्य की योजनाएं

ये अच्छा होता है कि रिश्ते की शुरुआत में आप एक-दूसरे से अपने आने वाले कल की प्लानिंग के बारे में चर्चा करें। अगर आपके दिमाग में आने वाले वक्त को लेकर कोई योजना है तो अपने पार्टनर से ज़रूर बात करें, इससे एक-दूसरे को समझना आसान होगा और भविष्य में आप दोनों को एक ही रास्ते पर चलने में कोई परेशानी नहीं होगी।

6. उम्मीदें

रिश्ते में यह जानना ज़रूरी है कि आप क्या चाहते हैं और रिश्ते को लेकर एक-दूसरे से क्या उम्मीदे हैं। इससे रिश्ते में तनाव पैदा होने का खतरा नहीं रहता और आप एक-दूसरे की उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश करते हैं। इस बारे में चर्चा किए बिना रिश्ते में आगे बढ़ने से बाद में परेशानी हो सकती है। इस वजह से ये बेहतर है कि एक दूसरे से और रिश्ते से उम्मीदों के बारे में शुरुआत बात करें।

7. पर्सनल स्पेस

हर इंसान को पर्सनल स्पेस की ज़रूरत होती है और पार्टनर से इस बारे में बात करना महत्वपूर्ण है। रिश्ते को बेहतर बनाने के लिए एक-दूसरे से इस बारे में बात करना अनिवार्य है। जितनी जल्दी आप और आपके साथी इस पर चर्चा करेंगे, आप एक-दूसरे के साथ उतनी जल्दी सहज महसूस करेंगे।

8. शारीरिक अंतरंगता

एक जोड़े के रूप में, आपको एक-दूसरे की शारीरिक ज़रूरतों और इच्छाओं का सम्मान करना चाहिए। आपको एक-दूसरे से इस बारे में चर्चा करनी चाहिए और एक-दूसरे की शारीरिक इच्छाओं के बारे में जानना चाहिए। इससे आपके रिश्ते में घनिष्टता बढ़ती है और आप एक-दूसरे को पूरी तरह संतुष्ट करने की कोशिश करते हैं।

हर जोड़े को इन 8 बातों पर रिश्ते के पहले साल में चर्चा करने की ज़रूरत है क्योंकि नये रिश्ते को मज़बूती देने और बेहतर बनाने के लिये यह ज़रूरी है। रिश्ते को खुशहाल बनाये रखने के लिये भ्रम, शक, और असमंजस की स्थिति को साफ करने की सलाह दी जाती है। जोड़े भले ही स्वर्ग में बनते हों लेकिन इस खूबसूरत रिश्ते को लंबे समय तक बरकरार रखना दोनों की ज़िम्मेदारी है।

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REP KIT : मेनका गांधी ने कहा दो महीने में सभी थानों में मौजूद होगा यह किट....

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नई दिल्ली। महिला एंव बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि सरकार जल्द ही एक रेप किट् (Rape Kit) का इंतजाम करने जा रही है, जिससे रेप पीड़ित के मेडिकल जांच से संबंधित सारे रिकार्ड इसमें तुरंत स्टोर किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि भारत में दो महीने के भीतर सभी थानों में इस तरह का किट मुहैया कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत के लिए यह किट बिलकुल नया है। मेनका गांधी ने बताया कि यह किट फॉरेंसिक लैब ने तैयार किया है। जिसमें ऐसी सुविधाएं मौजूद है, जिससे रेप पीड़ित के मेडिकल जांच में इस्तेमाल सूबतों को सुरक्षित रखा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि जैसे ही कोई रेप पीड़ित थाना पहुंचेगी उसके सभी मेडिकल जांचों को इस किट में तुरंत बंद किया जाएगा। किट में सारी जानकारी और तारीख लिखी जाएगी। इस किट में रेप पीड़िता की कोई जानकारी नहीं लिखी जाएगी। किट को ताला लगाया जाएगा और तुरंत ही उसे फॉरेंसिक लैब में जांच के लिए भेजा जाएगा।

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