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लंदन: ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने मंगलवार को अपने पोते प्रिंस हैरी (Harry) और उनकी पत्नी मेगन (Meghan) के नस्लवाद के विस्फोटक दावों का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की और शाही जीवन के साथ उनकी परेशानियों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की. एक बयान में कहा गया है कि "हैरी और मेगन के लिए पिछले कुछ वर्ष कितने चुनौतीपूर्ण रहे हैं, यह जानने के बाद पूरा परिवार दुखी है."
कहा गया है कि, उठाए गए मुद्दे, विशेष रूप से नस्ल के विषय हैं. हालांकि कुछ भिन्नता हो सकती है, लेकिन उन्हें बहुत गंभीरता से लिया जाता है. इस मामले को परिवार द्वारा निजी तौर पर देखा जाएगा. "हैरी, मेगन और आर्ची हमेशा परिवार के हमेशा बहुत ज्यादा प्यारे सदस्य बने रहेंगे."
बकिंघम पैलेस रविवार को पहली बार प्रसारित ओपरा विन्फ्रे के साक्षात्कार में किए गए दावों का जवाब देने के लिए बढ़ते दबाव में आ गया है. साल 1990 के दशक में हैरी की दिवंगत मां डायना की पीड़ा के दिनों के बाद शाही परिवार एक बार फिर नए संकट से घिर गया है.
लंदन/नई दिल्ली: सोमवार को ब्रिटिश संसद में भारत में 'किसानों की सुरक्षा' और 'प्रेस की आजादी' के मुद्दों को लेकर सांसदों ने एक चर्चा की, जिसे लेकर लंदन स्थित भारत के उच्चायोग ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उच्चायोग ने एक बयान जारी कर आरोप लगाया है कि इस चर्चा में संतुलित बहस की बजाय आधारहीन बातें की गई हैं. बयान में कहा गया है, 'अफसोस है कि एक संतुलित बहस की बजाय बिना तथ्यों और पुष्टि के आधारहीन बातें सामने रखी गई हैं और दुनिया के सबसे लोकतंत्र और इसकी संस्था की अखंडता पर हमला किया गया है.'
बयान में कहा गया है, 'ब्रिटिश मीडिया सहित कई विदेशी मीडिया संस्थान भारत में मौजूद हैं और उन्होंने इस मुद्दे को खुद देखा है. भारत में मीडिया की आजादी के अभाव का कोई मुद्दा ही नहीं है.' भारतीय उच्चायोग ने कहा कि उसे बहस पर प्रतिक्रिया देनी पड़ी क्योंकि उसमें भारत को लेकर आशंकाएं व्यक्त की गई थीं.
सोमवार को ब्रिटिश संसद में भारत में 'किसानों की सुरक्षा' और 'प्रेस की आजादी' के मुद्दों पर बहस के लिए 90 मिनट का वक्त दिया गया था. भारत में चल रहे किसान आंदोलन पर भारत सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर लेबर पार्टी, लिबरल डेमोक्रेट्स और स्कॉटिश नेशनल पार्टी के कई सांसदों ने यह मुद्दा उठाया था. भारतीय मूल के लिबरल डेमोक्रेट नेता गुर्च सिंह ने इन मुद्दों पर एक पीटिशन शुरू किया था, जिसपर कुछ ही हफ्तों के भीतर एक लाख से ज्यादा यूके निवासियों के हस्ताक्षर आ गए थे. इसके बाद इस बहस के लिए संसद में वक्त रखा गया था.
यूके की बोरिस जॉनसन की सरकार ने इसपर कहा है कि 'यह मुद्दा दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मुलाकात के दौरान उठाया जाएगा.' हालांकि, ब्रिटेन की सरकार पहले ही भारत के तीन नए कृषि कानूनों के मुद्दे को उसका ‘घरेलू मामला' बता चुकी है.
ब्रिटिश सरकार ने भारत की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा, ‘भारत और ब्रिटेन, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बेहतरी के लिए एक बल के रूप में काम करते हैं और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग कई वैश्विक समस्याओं को सुलझाने में मदद करता है.'
जेनेवा: स्विट्ज़रलैंड में रविवार को सार्वजनिक जगहों पर पूरा चेहरा ढंकने के खिलाफ वोटिंग हुई है, जिसमें बैन के समर्थन में बहुत कम अंतर से ज्यादा वोट पड़े हैं. बैन को समर्थकों ने कट्टरपंथी इस्लाम के खिलाफ बड़ा कदम बताया है. वहीं, इसका विरोध करने वालों ने इसे नस्लभेदी और सेक्सिस्ट बताया है. वोटिंग के आधिकारिक नतीजों ने दिखाया है कि 51.21 फीसदी वोटरों और संघीय स्विट्ज़रलैंड के अधिकतर कैंटन राज्यों ने बैन के प्रस्ताव का समर्थन किया है. लगभग 1,426,992 वोटर बैन के समर्थन में थे वहीं, 1,359,621 यानी 50.8 फीसदी इसके खिलाफ थे.
कथित एंटी-बुर्का बैन पर स्विट्ज़रलैंड में वोटिंग तब हो रही है, जब कई यूरोपीय देशों और मुस्लिम बहुलता वाले देशों में बुर्का बैन हो चुका है, हालांकि, स्विट्ज़रलैंड में बुर्का बहुत आम बात नहीं है, फिर भी यहां यह वोटिंग हुई है.
हालांकि, 'पूरा चेहरा ढंकने के खिलाफ बैन पर समर्थन' मांगने वाले इस प्रस्ताव में बुर्का और नकाब का खासतौर पर जिक्र नहीं किया है, लेकिन फिर भी जिस तरह इसकी कैंपेनिंग की गई है, उससे इस बात पर शक की कोई गुंजाइश नहीं रह गई है कि यह डिबेट किस बात पर थी. कई स्विस शहरों में ऐसे पोस्टर दिखाई दिए, जिसमें 'कट्टरपंथी इस्लाम को रोको' और 'उग्रवाद को रोको' जैसे नारों और बुर्का पहने एक महिला का कार्टून बना था. वहीं. विरोधियों ने 'बेतुका, बेकार और इस्लामोफोबिक 'एंटी-बुर्का कानून' को हमारी ना है', जैसे नारों के साथ इसका विरोध किया.
इस बैन का मतलब है कि अब कोई भी सार्वजनिक जगहों पर अपना पूरा चेहरा नहीं ढंक पाएगा, चाहे वो कोई दुकान हो या कोई खुली जगह. हालांकि, कुछ अपवाद रखे गए हैं, जिसके तहत लोग धार्मिक स्थलों, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिहाज से अपना चेहरा ढंका रख सकते हैं. यह वोटिंग ऐसे वक्त पर हो रही है, जब कोरोनावायरस के चलते दुकानों और सार्वजनिक परिवहनों में फेस मास्क को अनिवार्य बनाया गया है.
नई दिल्ली: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने शनिवार को नेशनल एसेंबली में विश्वास मत हासिल कर लिया है. 342 सदस्यी नेशनल एसेंबली में उनको जीत के लिए 171 वोट चाहिए थे. पाकिस्तान तहरीक़े इसाफ़ के 157 और सहयोगी पार्टियों को मिला कर इमरान खान को 178 वोट हासिल हुए. विपक्ष ने इस विश्वास मत का बहिष्कार किया इसलिए सदन में विपक्ष के सांसद मौजूद नहीं थे. सीनेट चुनाव में अपने वित्त मंत्री के हार जाने के बाद विपक्ष ने इमरान खान पर इस्तीफ़े का दबाव बनाया था. वह अविश्वास प्रस्ताव लाने की रणनीति बना रहा था लेकिन इमरान खान ने ख़ुद आगे बढ़ कर विश्वास मत हासिल करने का ऐलान कर दिया.
पाकिस्तान की नेशनल एसेंबली स्पीकर असद क़ैसर ने ऐलान किया कि इमरान खान को आज 178 वोट मिले हैं. उन्होंने कहा कि 2018 में जब पीएम बने थे इमरान खान तो 176 वोट मिले थे. गौरतलब है कि गिलानी की जीत के बाद कई विपक्षी नेताओं ने खान की भारी आलोचना की और मांग की कि उन्हें प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.
क्रिकेटर से नेता बने 68 वर्षीय खान ने कहा गुरुवार को दावा किया था, “मैं परसों (शनिवार) विश्वास मत हासिल करूंगा. मैं अपने सदस्यों से यह दिखाने के लिए कहूंगा कि उनका मुझ पर विश्वास है. अगर वे कहते हैं कि उन्हें कोई भरोसा नहीं है, तो मैं विपक्षी बेंच पर बैठूंगा.”