Owner/Director : Anita Khare
Contact No. : 9009991052
Sampadak : Shashank Khare
Contact No. : 7987354738
Raipur C.G. 492007
City Office : In Front of Raj Talkies, Block B1, 2nd Floor, Bombey Market GE Road, Raipur C.G. 492001
——
सुषमा ने फिलीपींस में भारतीय दूतावास को मदद करने के लिए कहा है।
नई दिल्ली. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने गुरुवार को ट्विटर पर कश्मीरी छात्र शेख अतीक को भूगोल का पाठ पढ़ाया। हुआ यूं कि फिलीपींस में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे एक कश्मीरी छात्र ने नए पासपोर्ट के लिए सुषमा से मदद मांगी थी। लेकिन उसकी प्रोफाइल पर लोकेशन 'भारत अधिकृत कश्मीर' लिखी थी। यह देखकर सुषमा ने सबसे पहले उसके पते पर आपत्ति जताई। इस पर स्टूडेंट ने अपनी प्रोफाइल में बदलाव किया, जिसे देख विदेश मंत्री ने प्रसन्नता जताई।
डेंट अतीक को रिप्लाई में दो ट्वीट किए
- अतीक ने गुरुवार सुबह 6 बजे ट्वीट कर विदेश मंत्री से कहा, "मेरा पासपोर्ट डैमेज हो गया है। इस वजह से मैं भारत नहीं आ पा रहा हूं। मुझे मेडिकल चेकअप के लिए भारत आना है। मैंने एक महीने पहले इसके लिए आवेदन किया था, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया। आप इस प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए मेरी मदद करें।"
सुषमा ने कहा- 'भारत अधिकृत कश्मीर' जैसा कोई स्थान नहीं
- सुषमा स्वराज ने छात्र के ट्वीट के जवाब में लिखा, "अगर आप जम्मू-कश्मीर राज्य से हैं, तो हम निश्चित रूप से आपकी मदद करेंगे। लेकिन आपकी प्रोफाइल कहती है कि आप 'भारत अधिकृत कश्मीर' से हैं। ऐसा कोई स्थान नहीं है।"
- स्वराज के ट्वीट के तुरंत बाद छात्र ने अपनी प्रोफाइल से 'भारत अधिकृत कश्मीर' हटा लिया। जिसके बाद स्वराज ने खुशी जाहिर करते हुए मनीला में भारतीय दूतावास से उसकी मदद करने के लिए कहा।
मदद मांगने के बाद हटाई प्रोफाइल
- कश्मीर स्टूडेंट के प्रोफाइल में भारत अधिकृत कश्मीर लिखे जाने पर ट्विटर पर लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई है। लोगों ने गुस्से में कई कमेंट किये, जिसके बाद अब इस यूजर ने अपना अकाउंट डिलीट कर दिया है।
खराब फ्रिज को लेकर मांगी मदद
- सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को अक्सर लोगों को मदद करते देखा जाता है। ऐसे लोगों की संख्या अधिक है, जिन्होंने ट्विटर के जरिए घर बैठे मदद पाकर विदेश मंत्री को साधुवाद किया।
- 13 जून 2016 को वेंकेट नाम के यूजर ने ट्वीट किया कि उन्हें एक कंपनी ने खराब फ्रिज बेच दिया है। अब कंपनी इसे बदलने के लिए तैयार नहीं है। साथ ही इसकी मरम्मत पर जोर दे रही है। इस पर सुषमा स्वराज ने जवाब दिया कि भाई! मैं रेफ्रिजरेटर से जुड़े मामले में आपकी मदद नहीं कर सकती। मैं संकटग्रस्त लोगों की मदद करने में व्यस्त हूं। इसके बाद ट्विटर पर जमकर मजाक उड़ना शुरू हो गया। साथ ही सुषमा की हाजिरजवाबी की जमकर तारीफ की गई।
गीता को पाकिस्तान से वापस लाने में वाहवाही
- सुषमा स्वराज ने पिछले साल कराची से मूक-बधिर भारतीय लड़की गीता को स्वदेश वापस लाने के लिए अहम प्रयास किए थे। गीता की वापसी के लिए उनके अहम प्रयासों ने वाहवाही लूटी थी। भारत आने पर उन्होंने गीता को गले लगाकर आत्मीयता दर्शाई थी।
पाकिस्तान के तैमूर को ट्विट के 24 घंटे में मिल गया था वीजा
- पिछले वर्ष 19 अक्टूबर 2017 दीवाली पर पाकिस्तान की सुमैरा हमद मलिक ने सुषमा स्वराज को ट्वीट कर मदद मांगी थी। सुमैरा ने अपने भाई कैंसर पीड़ित तैमूर उल हसन के इलाज के लिए वीजा दिलाने की रिक्वेस्ट की। यह परिवार 6 माह से वीजा मिलने की उम्मीद लगाए था। ट्विटर पर सक्रिय सुषमा ने तुरंत जवाब दिया और तैमूर को 24 घंटे के भीतर भारत आने का वीजा मिल गया।
मिस्र की महीला को भी मिला भारत का वीजा
- 4 दिसंबर 2016 को मुंबई के डॉ. मुफ्फी लकड़ावाला ने मिस्र की इमान अहमद की तस्वीर के साथ विदेश मंत्री सुषमा को ट्विट कर मदद मांगी। उन्होंने बताया, मिस्र की इमान का वजन 500 किलोग्राम है। साधारण प्रक्रिया से उसे मेडिकल वीजा मना हो गया है। इस ट्विट के रिप्लाई में सुषमा ने कहा, मेरी नजर में यह मामला लाने के लिए शुक्रिया। मैं जरूर इनकी मदद करूंगी। दो दिन बाद 6 दिसंबर को डॉ. लकड़वाला ने जानकारी दी कि काहिरा में भारतीय दूतावास ने उन्हें बताया है कि इमान को मेडिकल वीजा मिल गया है।
सऊदी से वापस लौटी महिला ने किया शुक्रिया
ईरम आगा
पुरुषों से भरे एक ऑडिटोरियम में जब दो बुर्कानशीं महिलाएं पहुंचती हैं तो सबकी निगाहें उनकी तरफ मुड़ जाती हैं. वक्फ बोर्ड की मीटिंग में महिलाओं का शामिल होना आम घटना नहीं है. वक्फ के एक सदस्य कहते हैं कि इन दो महिलाओं पर उन्हें गर्व है. तमिलनाडु की रहने वाली अमातुल आतिफा (36) और फातिमा मुज्जफर पहली दो महिलाएं हैं जिन्हें वक्फ बोर्ड में विद्वान के तौर पर शामिल किया गया है. ये दोनों न सिर्फ स्टीरियोटाइप तोड़ रही हैं बल्कि उनकी नियुक्ति को लेकर रूढ़िवादियों में बड़ी बहस जारी है.
ओडिशा वक्फ बोर्ड के एक बुजुर्ग सदस्य गर्व के साथ कहते हैं, “तमिलनाडु ने यह करिश्मा कैसे कर दिखाया?” इस पर एक अन्य सदस्य कहते हैं, 'मेरी दुआ है कि दोनों इस काम में सफल हों और नई ऊंचाइयों को छुएं.' दोनों महिलाओं ने वक्फ बोर्ड में सुन्नी समुदाय के प्रमुख काज़ी मोहम्मद सलाउद्दीन अय्युब और शिया समुदाय के प्रमुख काज़ी गुलाम मेहदी खान की जगह ली है. इससे पहले यह जगह सिर्फ काज़ियों को दी जाती थी.
यह पहली बार नहीं है जब तमिलनाडु में महिलाएं वक्फ बोर्ड में शामिल हुई हैं. 2002 में बदर सयीद वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष रह चुकी हैं. इसके बाद के सालों में भी बोर्ड में महिला सदस्य शामिल रही हैं. हालांकि यह पहली बार है जब महिलाओं को बोर्ड में विद्वानों की श्रेणी में शामिल किया गया है.
इन महिलाओं का कहना है कि 30 अप्रैल को उनकी नियुक्ति को लेकर तमिलनाडु वक्फ बोर्ड को मिली जुली प्रतिक्रिया मिल रही है. आतिफा कहती हैं, “एक काज़ी ने मेरी विद्वता पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर मेरे काम को नकार दिया. पर चूंकि मैं एक टीवी नेटवर्क में प्रवचन कर चुकी हूं तो मुझे जनता से और शिया पर्सनल लॉ बोर्ड से काफी समर्थन मिला.”
वहीं दूसरी तरफ सुन्नी विद्वान और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की सदस्य मुज्जफर कहती हैं कि रूढ़िवादियों और काज़ियों के समर्थकों ने उन्हें काफी परेशान किया. वह कहती हैं, “उन्होंने मुझसे कहा कि मेरे पास थोड़ी नैतिकता होनी चाहिए और मुझे यह छोड़ देना चाहिए था.”
सभी समुदायों की महिलाओं के लिए बराबरी के अधिकार की वकालत करती हूई मुज्जफर कहती है, “कट्टरपंथी परंपराओं से बाहर निकलना महिलाओं के लिए हमेशा से मुश्किल रहा है. फिर चाहे पोप की बात हो या पुजारी की. हमारा संघर्ष एक जैसा है.”
ये दोनों मानती हैं कि उनकी नियुक्ति में वनियाम्बाडी विधायक और वक्फ बोर्ड मंत्री डॉक्टर निलोफर कफील की महत्वपूर्ण भूमिका रही. कई सुझावों पर गौर करने के बाद डॉक्टर कफील ने आतिफा और मुजफ्फर को स्कॉलर कैटिगरी में चुना.
नियम के मुताबिक बोर्ड में एक चेयरपर्सन होते हैं. हर इलेक्टोरल कॉलेज से एक या अधिकतम दो सदस्य जिन्हें राज्य सरकार इस पद के लिए उचित समझती है. राज्य की विधानसभा के मुस्लिम सदस्य, राज्य की बार काउंसिल के मुस्लिम सदस्य, वक्फ के वो मुतावल्ली जिनकी सालाना आय 1 लाख या उससे अधिक है.
प्रतिष्ठित मुस्लिम संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले एक या अधिकतम दो सदस्यों को राज्य सरकार चुनती है. इस्लामिक थियोलॉजी के स्कॉलर्स में से एक या अधिकतम दो लोगों को राज्य सरकार नामित कर सकती है. राज्य सरकार में डिप्टी सेक्रेटरी या उससे ऊपर की रैंक के एक अधिकारी.
सरकार और सेंट्रल वक्फ ट्रिब्यूनल के आदेश के मुताबिक बोर्ड में कम से कम दो सदस्य महिलाएं होनी चाहिए.
पद पर नियुक्ति से पहले अपने संघर्ष को याद करती हुई मुजफ्फर कहती हैं कि जब उन्हें चुना गया तो एक याचिका दायर कर सवाल उठाए गए कि कैसे एक औरत काज़ी की जगह ले सकती है? उन्होंने बताया, “मद्रास हाईकोर्ट ने यह साफ किया कि सरकार के प्रावधानों और सेंट्रल वक्फ ट्रिब्यूनल की मदद के आधार पर ही यह किया जा रहा है. ”
मुज्जफर कहती हैं कि वह पीछे हटने वालों में नहीं है. वह जस्टिस अहमद बशीर महिला कॉलेज में हुई एक घटना का जिक्र करती हुई कहती हैं कि वह वहां यूनियन हेड थीं और वहीं उन्होंने 20 सालों बाद कल्चरल प्रोग्राम दोबारा शुरू करवाए थे.
वह कहती हैं, “कॉलेज प्रबंधन को लगता था कि महिला कॉलेज में ये सारी चीजें नहीं होनी चाहिए लेकिन 1991 में मैंने यह करिश्मा कर दिखाया. यह अब भी जारी है.”
वहीं शिया स्कॉलर आतिफा ने कहा कि लोगों की स्वीकार्यता नहीं मिलना सबसे बड़ा चैलेंज है. उन्होंने कहा, “किसी को वक्फ बोर्ड से कोई फर्क नहीं पड़ता था लेकिन हमारे आने के बाद इसकी चर्चा होने लगी.”
दोनों महिलाएं एक ही कॉलेज से पढ़ी हैं और अब दोनों एक ही बोर्ड की सदस्य हैं. दोनों महिला सशक्तिकरण, महिलाओं के स्किल डेवलपमेंट, लोगों की भलाई के लिए वक्फ की संपत्ति का जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल पर फोकस करेंगी.
आतिफा ने कहा, 'हम शिया समुदाय की मदद करेंगे ताकि वे सरकार की सभी स्कीमों का फायदा उठा सकें. जानकारी की कमी की वजह से अब तक वे उसका फायदा नहीं उठा सके हैं.'
‘कुछ कुछ होता है’ – इस फिल्म में शाहरुख खान की लाइन है – हम एक बार जीते हैं, एक बार मरते हैं, शादी भी एक बार होती है, और प्यार, प्यार भी एक ही बार होता है.
पता नहीं आप शाहरुख की इस बात से कितना सहमत हैं. लेकिन दुनिया में की गई कुछ रिसर्च ऐसा नहीं मानती. वो इस बात पर अड़ी हैं कि प्यार तीन बार ही होता है, बाकी जो होता है, वो कुछ भी हो सकता है लेकिन प्यार नहीं. इन अलग अलग शोध के मुताबिक तीन बार हुआ प्यार होने की वजह अलग अलग होती हैं. पहला प्यार जब हम स्कूल-कॉलेज में होते हैं. यह वैसा प्यार होता है जो परियों की कहानियों में या कहें कि फिल्मों से प्रेरित होता है. सब कुछ एकदम आदर्श.
यही वह प्यार होता है जिसमे आप अपना सब कुछ त्याग करने के लिए तैयार रहते हैं. हम इस विश्वास के साथ प्यार में पड़ते हैं कि यही हमारा आखिरी प्यार भी होने वाला है. अगर हमें यह रिश्ता अच्छा नहीं लग रहा, तब भी यह सोचकर कि - प्यार शायद ऐसा ही होता है – हम इसमें डूबे रहते हैं. क्योंकि इस प्यार में हम अपने से ज्यादा दूसरों के विचारों को तवज्जो देते हैं. दूसरों को आपका प्यार कैसा लग रहा है, वो उसके बारे में क्या सोचते हैं, वगैरह..वगैरह.
जैसे मेहनत की कमाई होती है, वैसे ही मेहनत से हासिल किया गया प्यार भी होता है. यही प्यार हमारा दूसरा प्यार होता है. यह प्यार हमें दूसरे से ज्यादा अपने आप के करीब लेकर जाता है. यह हमें बताता है कि हमारी जिंदगी में प्यार कितना जरूरी है. यह प्यार में दर्द, झूठ, उठापटक सब कुछ होता है. हमें लगता है कि हम पहली वाली गलतियां नहीं दोहराएंगे. लेकिन गलतियां होती हैं. या कहना चाहिए कि ड्रामा होता है जिसमें तमाम तरह के उतार चढ़ाव देखने को मिलते हैं. हम इस प्यार को खोना नहीं चाहते इसलिए हम इसे ठीक करने के चक्कर में इसे और पेचीदा बनाते चलते हैं. यह वह प्यार होता है जो हम चाहते हैं कि काम कर जाएं.
लेकिन प्यार अपने कहने या करने से कहां रुकता है. खैर, आगे बढ़कर हमारे सामने आता है तीसरा प्यार. दिलचस्प यह है कि पहले प्यार में धोखा खाने के बाद हम उम्मीद छोड़ चुके होते हैं. और यह प्यार इसी नाउम्मीदी के बीच कहीं से उठकर आता है. हमें इसका एहसास भी नहीं होता. यह उस शक्ल या रूप में होता है जिसके बारे में हमने कभी सोचा नहीं था. यह प्यार को लेकर हमारी तमाम धारणाओं को तोड़ता है. यह प्यार जो इतनी सहजता से आपके जीवन में आता है जिसकी आपने कल्पना भी नहीं की होती है. इस प्यार तक पहुंचते पहुंचते हम किसी दूसरे से अपेक्षाएं करना छोड़ चुके होते हैं. न ही हम किसी और के लिए खुद को बदलने की कोशिश करते हैं. हम एक दूसरे को वैसे ही स्वीकार कर लेते हैं जैसे कि हम हैं.
जैसा कि किसी ने कहा है कि यह वो प्यार है जो लगातार हमारा दरवाज़ा खटखटाता रहता है, फिर हम जवाब देने में कितना भी वक्त क्यों न लगाएं. यह वो प्यार है जिसमें पड़कर लगता है कि सब कुछ सही है. वैसे प्यार को लेकर जिज्ञासा को शांत करने के लिए विज्ञान जगत चुप नहीं बैठा और अन्य किए गए शोध बताते हैं कि प्यार दो या चार बार भी हो जाता है. फिर भी अगर हम औसत निकाले तो तीन ही आता है. यानि तीन बार तो प्यार तो पक्का है, आप प्यार में पड़ना चाहें या नहीं, तीन बार तो आपका इससे सामना होना ही है. वैसे भी प्यार जैसी चीज़ को बार बार नहीं तो एक बार मौका जरूर देना चाहिए...:)
::/fulltext::ई दिल्ली: हर महिला का सपना होता है मां बनना. प्रेग्नेंसी के वो 9 महीने एक्सपीरिएंस करना, हर दिन होने वाले बच्चे के बारे में नए-नए सपने बुनना. लेकिन इस सपने को फीमेल इंफर्टिलिटी (बांझपन) चूर-चूर कर देता है. एक या दो नहीं बल्कि कई महिलाएं इस परेशानी से जूझती हैं. इस कारण उनके मां बनने का सपना बहुत मुश्किल हो जाता है. बांझपन का कोई एक कारण नहीं बल्कि खाने से जुड़ा कोई रोग या एन्डोमीट्रीओसिस (महिलाओं से संबंधित बीमारी जिसमें पीरियड्स और सेक्स के दौरान दर्द होता है) बांझपन की वजह बन सकता है.
आप फीमेल इंफर्टिलिटी के शुरुआती लक्षणों को जानकर इस परेशानी से जल्दी छुटकारा पा सकती हैं. जितना जल्दी इलाज उतना जल्दी निजाद. लेकिन इसके लिए आपको नीचे दिए गए लक्षण पहचानने होंगे.